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फरीदाबाद: 61 साल के किसान से पेंशन के बदले मांगी गई 3 महीने की रकम, फैमिली आईडी की गलती से रुका हकहरियाणा
22 जुल॰ 2026, 4:12 pm (21 घंटे पहले)· 0

फरीदाबाद: 61 साल के किसान से पेंशन के बदले मांगी गई 3 महीने की रकम, फैमिली आईडी की गलती से रुका हक

फरीदाबाद के बल्लभगढ़ निवासी 61 वर्षीय किसान कुंवर दास बुढ़ापा पेंशन के लिए सरकारी सिस्टम और बिचौलियों से जूझ रहे हैं। फैमिली आईडी में गलत इनकम और रिश्वत की मांग ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं।

फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ इलाके में रहने वाले 61 वर्षीय कुंवर दास इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि कैसे सरकारी सिस्टम की खामियां और जमीनी स्तर पर फैला भ्रष्टाचार एक आम इंसान की मुश्किलें बढ़ा देते हैं। देश में कई गरीब लोग इसी तरह की परेशानी झेल रहे हैं, जहां योजनाओं का लाभ उन तक नहीं पहुंच पाता। जिस उम्र में लोग जीवन की भागदौड़ से संन्यास लेकर आराम की जिंदगी बिताना चाहते हैं, उस उम्र में यह बुजुर्ग किसान आज भी हर रोज कड़ी मेहनत करने को मजबूर है। कुंवर दास को उम्मीद थी कि बुढ़ापे में सरकार की तरफ से मिलने वाली पेंशन उनके लिए एक बड़ा सहारा बनेगी, लेकिन उनका यह हक अभी तक कागजों में ही उलझा हुआ है। उनकी परेशानी सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांव के कुछ लोगों ने इस मजबूरी का फायदा उठाने की कोशिश भी की है।

साइकिल से खेतों का सफर और मौसम की मार

कुंवर दास फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव के निवासी हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनकी जिम्मेदारियां जरा भी कम नहीं हुई हैं। वह हर दिन अपने घर ऊंचा गांव से सुनपेड़ गांव में स्थित अपने खेतों तक का सफर साइकिल से तय करते हैं। सुबह-सुबह घर से निकलने के बाद उनका पूरा दिन खेतों में पसीना बहाते हुए गुजरता है। चाहे चिलचिलाती धूप हो, तेज बारिश हो या फिर कड़ाके की ठंड, कुंवर दास को हर मौसम में खेतों पर जाना ही पड़ता है। उनके पास जीवनयापन का कोई दूसरा साधन नहीं है। खेती की कमाई भी अब पहले जैसी नहीं रही। कभी अचानक ओले गिरने से फसल बर्बाद हो जाती है, तो कभी बेमौसम बारिश और सूखा उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देते हैं। इन सबके बीच खेती से जो भी थोड़ी-बहुत आमदनी होती है, उससे बस किसी तरह उनके परिवार का रोजमर्रा का खर्च ही निकल पाता है। इस अनिश्चितता के कारण बुढ़ापा पेंशन उनके लिए बेहद जरूरी हो गई है।

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फैमिली आईडी में गलत आय का दर्द

बुढ़ापा पेंशन न बन पाने के पीछे सबसे बड़ा कारण परिवार पहचान पत्र (फैमिली आईडी) में हुई एक बड़ी गलती है। कुंवर दास के पास पेंशन बनवाने के लिए सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन उनकी फैमिली आईडी में उनकी सालाना आय वास्तविक कमाई से कहीं ज्यादा दिखा दी गई है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि सिस्टम में उनकी कितनी आय दर्ज की गई है, इसकी जानकारी खुद उन्हें भी नहीं है। यह तकनीकी खामी उनके और उनके हक के बीच एक बड़ी दीवार बन गई है। सारी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद, सिर्फ इस एक गलती की वजह से उनकी बुढ़ापा पेंशन की फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। बिना किसी अन्य रोजगार के, वह पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं और यह सरकारी त्रुटि उनके मानसिक तनाव का कारण बनी हुई है।

पेंशन के नाम पर रिश्वत की मांग

सिस्टम की खामियों के अलावा, कुंवर दास को स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने खुलासा किया कि गांव में ही कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो पेंशन बनवाने का दावा करते हैं और इसके बदले में मोटी रकम वसूलते हैं। कुंवर दास से भी ऐसे ही लोगों ने संपर्क किया और शर्त रखी। कुंवर दास ने कहा, "मुझसे कहा गया कि शुरुआत की तीन पेंशन देनी पड़ेगी, तभी पेंशन बनवाएंगे।" इस मांग ने इस बुजुर्ग किसान को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें यह सुनकर बहुत दुख हुआ और उन्होंने बिचौलियों को एक भी पैसा देने से साफ इनकार कर दिया। अपनी मेहनत और ईमानदारी की कमाई पर भरोसा करने वाले कुंवर दास ने भ्रष्टाचार के सामने झुकने से बेहतर इंतजार करना सही समझा।

इंसाफ की उम्मीद और आगे का रास्ता

भले ही अब तक कुंवर दास सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने खुद अपना हक मांगने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वह अब तक पेंशन कार्यालय नहीं गए थे, लेकिन अब वह जल्द ही वहां जाकर अधिकारियों के सामने अपनी पूरी बात रखेंगे। उनकी मांग बेहद सीधी और स्पष्ट है: यदि उनके सभी कागज पूरे हैं और वह वास्तव में इसके हकदार हैं, तो बिना किसी रिश्वत या बिचौलिए के उनकी पेंशन चालू की जाए। उन्हें उम्मीद है कि पेंशन मिलने से उनके बुढ़ापे को एक छोटा सा आर्थिक सहारा मिल सकेगा और उन्हें हर दिन की आर्थिक चिंताओं से कुछ हद तक राहत मिलेगी। सरकार को भी ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करना चाहिए ताकि पात्र नागरिकों को उनका हक बिना किसी परेशानी के मिल सके।

सवाल-जवाब

कुंवर दास की पेंशन क्यों नहीं बन पा रही है?
उनकी फैमिली आईडी (परिवार पहचान पत्र) में उनकी सालाना आय बहुत ज्यादा दिखाई गई है, जिस कारण उनकी पेंशन रुकी हुई है।
बिचौलियों ने कुंवर दास से क्या मांग रखी थी?
गांव के कुछ लोगों ने पेंशन चालू करवाने के एवज में उनसे शुरुआत की तीन पेंशन की रकम रिश्वत के तौर पर मांगी थी।
कुंवर दास कहां के रहने वाले हैं और वे क्या काम करते हैं?
वे फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित ऊंचा गांव के रहने वाले हैं और हर दिन साइकिल से सुनपेड़ गांव जाकर खेतों में किसानी का काम करते हैं।
कुंवर दास अब आगे क्या करने वाले हैं?
उन्होंने बिचौलियों को पैसे देने से मना कर दिया है और अब वे अपनी बात रखने के लिए सीधे पेंशन कार्यालय जाने की योजना बना रहे हैं।
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