मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मानसूनी बारिश के कारण नदियां और बरसाती नाले पूरे उफान पर हैं। भारी वर्षा से उत्पन्न बाढ़ जैसे हालात के बीच गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते होते टल गया। खंडवा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित हांडीकुंडी क्षेत्र में सुक्ता और आवना नदियों के संगम स्थल पर पिकनिक मनाने पहुंचे चार स्थानीय निवासी अचानक जलस्तर बढ़ने से नदी के बीच बने एक टापू पर फंस गए। तेज बहाव और बढ़ते पानी के कारण चारों ओर से घिरे युवकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन और राहत बलों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग 11 घंटे तक चले इस कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार तड़के सभी चार लोगों को सकुशल सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
पिकनिक के दौरान अचानक बिगड़े हालात
घटना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे चार लोग पिकनिक मनाने के इरादे से सुक्ता और आवना नदियों के संगम हांडीकुंडी क्षेत्र में पहुंचे थे। उस समय मौसम खराब था और ऊपरी इलाकों में लगातार तेज बारिश हो रही थी। पिकनिक मनाते समय अचानक भाम और चिखल्या नदियों समेत आसपास के नदी-नालों में पानी का तेज रेला आ गया। देखते ही देखते नदियों का जलस्तर बेहद खतरनाक स्तर तक बढ़ गया। इस दौरान भाम और चिखल्या नदी क्षेत्र में कुल सात लोग बाढ़ के पानी में घिर गए थे। हालांकि, तीन लोगों को स्थिति की गंभीरता समझते ही समय रहते सुरक्षित स्थानों पर निकाल लिया गया, लेकिन हांडीकुंडी क्षेत्र में मौजूद चार युवा नदी के बीच टापू पर ही फंसे रह गए।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचा प्रशासन
नदी के बीच टापू पर युवकों के फंसे होने की खबर मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। बृहस्पतिवार शाम 6:15 बजे पुलिस नियंत्रण कक्ष को घटना की आधिकारिक सूचना दी गई। सूचना प्राप्त होते ही राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम, स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बिना देरी किए घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और पुलिस अधीक्षक अगम जैन खुद मौके पर पहुंचे और पूरे बचाव अभियान की कमान संभाली। अधिकारियों की मौजूदगी में राहत कर्मियों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन नदी की प्रचंड धारा और रात का अंधेरा अभियान में बड़ी बाधा बन गया।
उफनती नदी में नाव पलटने से बढ़ी चुनौती
बचाव दल ने शुरुआत में मोटरबोट की मदद से टापू तक पहुंचने की कोशिश की। लेकिन बारिश के कारण नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि बोट धारा के सामने टिक नहीं सकी। राहत कर्मियों ने कई बार बोट को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, परंतु शक्तिशाली लहरों की वजह से बोट बार-बार पलटने लगी और आगे बढ़ना पूरी तरह असंभव हो गया। जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और टापू का दायरा सिमटता जा रहा था। ऐसे में टापू पर फंसे लोगों का हौसला बनाए रखना और उन तक तात्कालिक सहायता पहुंचाना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया था।
ड्रोन से पहुंचाया गया भोजन और बचाव उपकरण
परंपरागत साधनों के निष्फल होने पर जिला प्रशासन ने एक नया और आधुनिक तरीका अपनाया। खंडवा जिले के किसी रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली बार उच्च क्षमता वाले ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया गया। राहत दल ने ड्रोन की मदद से नदी के पार टापू पर फंसे युवकों तक जरूरी सामान भेजा। ड्रोन के जरिए युवकों तक लाइफ जैकेट, मजबूत सुरक्षा रस्से और पैक्ड भोजन सामग्री पहुंचाई गई। इस हवाई सहायता से न केवल फंसे हुए लोगों को शारीरिक राहत मिली, बल्कि उन्हें यह विश्वास भी हुआ कि प्रशासन उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
हेलिकॉप्टर रेस्क्यू की योजना में मौसम बना बाधा
जैसे-जैसे रात बीत रही थी, जलस्तर और नदी की उग्रता कम होने का नाम नहीं ले रही थी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आपातकालीन रेस्क्यू हेलिकॉप्टर बुलाने का संपर्क साधा। योजना यह थी कि रात में ही एयरलिफ्ट करके युवकों को टापू से बाहर निकाल लिया जाए। लेकिन देर रात लगभग 1:30 बजे तक खराब मौसम और भारी बादलों के कारण हेलिकॉप्टर मौके पर नहीं पहुंच सका। इसी दौरान क्षेत्र में फिर से मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे एयर रेस्क्यू की सारी उम्मीदें समाप्त हो गईं और पूरी निर्भरता जमीनी तथा जल-आधारित रेस्क्यू पर ही आ गई।
11 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद मिली सफलता
पूरी रात अधिकारी और एसडीआरएफ के जवान नदी किनारे डटे रहे और जलस्तर पर पैनी नजर बनाए रखी। तड़के के समय नदी के जलस्तर में हल्की गिरावट दर्ज की गई। इस अनुकूल परिस्थिति का लाभ उठाते हुए बचाव दल ने एक नई रणनीति तैयार की। राहत कर्मियों ने नदी के दोनों किनारों के बीच मजबूत सुरक्षा रस्सियों का नेटवर्क स्थापित किया। इन रस्सियों के सहारे नियंत्रित करते हुए मोटरबोट को उफनती धारा के बीच टापू की ओर रवाना किया गया। आखिरकार, लगभग 11 घंटे तक चले इस साहसिक और थका देने वाले अभियान के बाद शुक्रवार तड़के 4:45 बजे चारों युवकों को एक-एक करके सुरक्षित किनारे पर ले आया गया।
बचाए गए लोगों की पहचान और प्रशासनिक चेतावनी
सकुशल बचाए गए लोगों की पहचान 40 वर्षीय हुजेफा हामिद, 16 वर्षीय मयंक उर्फ गोपाल, 35 वर्षीय अली असगर और 18 वर्षीय आयुष के रूप में की गई है। चारों लोग खंडवा शहर के ही रहने वाले हैं। सफल रेस्क्यू के बाद सभी को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच दी गई। अभियान के समापन पर जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील जारी की है। भारी बारिश के मौसम में नदी-नालों, बांधों और उफनते जलभराव वाले पिकनिक स्थलों के पास जाने से सख्त परहेज करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि मानसून के दौरान नदी का प्रवाह अचानक बढ़ सकता है, इसलिए ऐसे संवेदनशील इलाकों में पर्यटन या पिकनिक के लिए जाना जानलेवा साबित हो सकता है।



















