मानसून की दस्तक के साथ ही मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में मच्छर जनित बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ने लगा है। शहर के दो प्रमुख इलाकों, कुंदा नगर और आनंद नगर में डेंगू के दो नए मरीज सामने आने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह चौकन्ना हो गया है। संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रभावित बस्तियों में लार्वा विनिष्टीकरण, धुआं छिड़काव यानी फॉगिंग और मच्छरों की पैदावार वाले स्थानों को खत्म करने की गतिविधियां तेज कर दी गई हैं। चिकित्सा अधिकारियों ने आम जनता को सतर्क रहने तथा बुखार की स्थिति में बिना किसी देरी के रक्त परीक्षण कराने की सलाह दी है।
सर्वे अभियान में 7500 जगहों पर मिला लार्वा
जिले में मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर मनोज पाटीदार के अनुसार, वर्ष की शुरुआत यानी जनवरी माह से लेकर अब तक पूरे जिले में करीब 1 लाख 90 हजार आवासीय परिसरों एवं मकानों का भौतिक सर्वे पूरा किया जा चुका है। इस दौरान स्वास्थ्य टीमों को लगभग साढ़े सात हजार विभिन्न स्थानों पर डेंगू का वाहक माने जाने वाले एडीज मच्छर का लार्वा मिला, जिसे मौके पर ही रसायनों और सफाई के जरिए नष्ट करवा दिया गया। इसके अलावा, अब तक लगभग 500 संदिग्ध मरीजों के रक्त नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि जिले में अब तक कुल 19 व्यक्तियों में डेंगू के एक्टिव संक्रमण की पुष्टि दर्ज की गई है।
डेंगू के मुख्य लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि समय पर पहचान और डॉक्टरी सलाह ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। डेंगू के प्रभाव में आने पर रोगी को तीव्र बुखार के साथ आंखों के पिछले हिस्से में खिंचाव या दर्द महसूस हो सकता है। इसके अतिरिक्त, शरीर के जोड़ों, पीठ, पेट, मांसपेशियों और हड्डियों में असहनीय दर्द होना इस बीमारी के प्रमुख संकेत हैं। मरीजों में ठंड लगने के साथ भयंकर शारीरिक थकान, भोजन की अनिच्छा या भूख न लगना, उल्टी आने जैसा मन होना और लगातार सिरदर्द की समस्या देखी जाती है। कई मामलों में त्वचा पर लाल रंग के दाने, चकत्ते अथवा शरीर पर खरोंच जैसे निशान भी उभर आते हैं। ऐसे किसी भी संकेत के दिखने पर मरीज को स्वयं दवाएं लेने के बजाय निकटतम अस्पताल जाकर जांच करानी चाहिए।
सप्ताह में एक दिन 'ड्राई डे' मनाने का आग्रह
मच्छरों के चक्र को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से हर सप्ताह एक दिन 'ड्राई डे' के रूप में चिन्हित करने की अपील की है। इस दिन घर के भीतर और आसपास मौजूद सभी पानी के बर्तनों, वाटर कूलर, पानी की टंकियों, बाल्टियों और गमलों की अच्छी तरह सफाई कर उनका पानी पूरी तरह सुखा देना चाहिए। डॉक्टर मनोज पाटीदार ने रेखांकित किया कि डेंगू का वायरस केवल संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से ही एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है। चूंकि यह मच्छर साफ और स्थिर जल में अपने अंडे देता है, इसलिए आवासीय परिसरों में जलजमाव न होने देना प्राथमिक जिम्मेदारी है। बचाव के तौर पर टंकियों को हमेशा ढंक कर रखें, कूलर का पानी नियमित अंतराल पर बदलते रहें, शरीर को पूरी तरह ढकने वाले परिधान पहनें और सोते समय मच्छरदानी या मच्छररोधी क्रीम का प्रयोग करें।
पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर एक नजर
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी पिछले पांच सालों के आंकड़े दर्शाते हैं कि खरगोन जिले में डेंगू का खतरा समय-समय पर उभरता रहा है। यदि बीते वर्षों का विश्लेषण करें तो साल 2021 में जिले के भीतर सर्वाधिक 320 डेंगू मरीज दर्ज किए गए थे। इसके बाद साल 2022 में संक्रमण के मामलों में भारी कमी आई और केवल 24 मरीज मिले। वहीं साल 2023 में यह संख्या बढ़कर 53 तक पहुंची, जबकि साल 2024 में कुल 98 और साल 2025 में 96 मामलों की पुष्टि हुई थी। मौजूदा वर्ष 2026 में अब तक 19 मामले सामने आ चुके हैं, जिससे साफ है कि मानसून के दौरान थोड़ी सी भी लापरवाही स्थिति को गंभीर बना सकती है।


















