पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 12 साल की नाबालिग के साथ हुए जघन्य रेप और हत्या के मामले के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल का एनकाउंटर पुलिस के लिए सवालों के घेरे में है। आरोपी की मौत के बाद जारी हुई विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम की नई परतें खोल दी हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, प्रभाष मंडल को भागने की कोशिश के दौरान बेहद करीब से दो गोलियां मारी गई थीं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
मेडिकल बोर्ड द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि प्रभाष मंडल के शरीर में कोई भी गोली या उसका टुकड़ा फंसा हुआ नहीं मिला है। दोनों गोलियां उसकी पीठ की ओर से शरीर में दाखिल हुईं और आर-पार निकल गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक गोली ने उसके दाहिने फेफड़े को पूरी तरह भेद दिया, जबकि दूसरी गोली दाहिनी किडनी के पास से निकल गई। इसका सीधा अर्थ यह है कि एनकाउंटर के दौरान पुलिस द्वारा चलाई गई गोलियां शरीर के अत्यंत महत्वपूर्ण अंगों को निशाना बनाते हुए निकली थीं।
एनकाउंटर का घटनाक्रम
बुधवार तड़के हुई इस घटना के समय आरोपी की आयु 38 वर्ष थी। पुलिस उसे 12 साल की बच्ची के मर्डर और रेप की घटना को समझने के लिए क्राइम सीन (सुरजापुर) लेकर जा रही थी। पुलिस का दावा है कि प्रभाष मंडल ने साथ मौजूद एक पुलिसकर्मी से हथियार छीनकर भागने का प्रयास किया और उन पर फायरिंग शुरू कर दी। स्थिति को काबू में करने के लिए सब इंस्पेक्टर अर्घ्य मंडल ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें आरोपी को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई।
जांच का दायरा और प्रक्रिया
घटना के बाद पूरे मामले की जिम्मेदारी क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) को सौंपी गई है। यह जांच पहले से जारी न्यायिक प्रक्रिया के साथ समानांतर रूप से चलेगी। बरुईपुर पुलिस स्टेशन में इस फायरिंग को लेकर एफआईआर भी दर्ज की गई है। एनएचआरसी के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए इस मामले की जांच एक ऐसे वरिष्ठ अधिकारी की देखरेख में की जाएगी, जिसका संबंध सीधे तौर पर इस शूटआउट से नहीं रहा है।
सीआईडी अब यह बारीकी से जांच करेगी कि क्या आत्मरक्षा में चलाई गई गोलियां वास्तव में आवश्यक थीं या नहीं। उस रात मौके पर मौजूद रहे सभी छह पुलिसकर्मियों को सीआईडी के समक्ष अपना बयान दर्ज कराना होगा। फिलहाल, एनकाउंटर में शामिल किसी भी पुलिस अधिकारी को अस्थायी रूप से निलंबित नहीं किया गया है।
पृष्ठभूमि और कानूनी स्थिति
यह पूरा मामला 5 जुलाई का है, जब दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर में एक तालाब के भीतर से 12 वर्षीय स्कूली छात्रा का शव बरामद हुआ था। जांच में यह भी पता चला था कि हत्यारों ने जब बच्ची को तालाब में फेंका था, तब भी वह जीवित थी और सांस ले रही थी। इस मामले में कुल चार लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से प्रभाष मंडल को पुलिस मुख्य अपराधी मान रही थी।
दिलचस्प बात यह है कि प्रभाष मंडल के परिजनों ने उसकी करतूतों के चलते उसके शव को लेने से साफ मना कर दिया है। परिजनों का कहना है कि उसने जो जघन्य अपराध किया है, उसके बाद वह इसी परिणाम का पात्र था। अब सीआईडी की रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि कानूनी रूप से पुलिस की यह कार्रवाई किन परिस्थितियों के तहत हुई थी।











