छोटे बच्चों के मुंह से दूध का दांत निकलना हर माता-पिता के लिए एक जाना-पहचाना पल होता है, पर अक्सर यही पल ढेरों सवाल भी खड़े कर देता है। दांत कब गिरना शुरू होंगे, कितने साल में पूरे स्थायी दांत आ जाएंगे और किस स्थिति में घबराकर डॉक्टर के पास भागना चाहिए, इन्हीं उलझनों को दूर करते हुए दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. मोइन खान ने विस्तार से समझाया है कि बच्चों के दांतों को लेकर अभिभावकों को क्या-क्या ध्यान रखना चाहिए।
किस उम्र में गिरते हैं दूध के दांत
डॉ. मोइन खान बताते हैं कि ज्यादातर बच्चों में दूध के दांत करीब 6 वर्ष की उम्र से ढीले होकर गिरने लगते हैं। यह कोई एक झटके में होने वाली घटना नहीं, बल्कि धीरे-धीरे चलने वाली प्रक्रिया है। तकरीबन 12 वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश दूध के दांत अपनी जगह खाली कर देते हैं और उनकी जगह स्थायी दांत ले लेते हैं। सबसे पहले निचले जबड़े के सामने वाले दांत गिरते हैं, और इसके बाद बारी आती है ऊपर के सामने वाले दांतों की।
हर बच्चे की रफ्तार अलग होती है
डॉ. खान इस बात पर जोर देते हैं कि हर बच्चे का शारीरिक विकास एक जैसा नहीं होता, इसलिए किसी बच्चे के दांत थोड़ा पहले गिर सकते हैं तो किसी के थोड़ा बाद में। यानी कुछ हफ्तों या महीनों का अंतर सामान्य बात है। लेकिन एक स्थिति को हल्के में नहीं लेना चाहिए, अगर 7 से 8 वर्ष की उम्र तक भी दांत हिलने तक नहीं लगे हों, या फिर नए स्थायी दांत निकलना शुरू हो जाएं मगर पुराने दूध के दांत अपनी जगह जमे रहें, तो यह संकेत अनदेखा करने लायक नहीं है।
आखिर टेढ़े-मेढ़े क्यों निकलते हैं दांत
इसी बिंदु को आगे बढ़ाते हुए डॉ. खान समझाते हैं कि जब दूध के दांत समय पर नहीं गिरते, तो उनके पीछे आने वाले स्थायी दांतों को सही जगह नहीं मिल पाती और वे टेढ़े-मेढ़े उग आते हैं। इसका असर सिर्फ अभी की मुस्कान पर नहीं पड़ता, बल्कि आगे चलकर दांतों की पूरी बनावट बिगड़ सकती है और बच्चे को ऑर्थोडॉन्टिक उपचार यानी ब्रेसिज तक लगवाने की नौबत आ सकती है। उनका कहना है कि अगर समय रहते जांच करा ली जाए तो इस तरह की दिक्कतों को शुरू में ही रोका जा सकता है।
इन लक्षणों पर तुरंत दिखाएं दंत चिकित्सक को
डॉ. खान माता-पिता को सलाह देते हैं कि वे बच्चों के दांतों पर लगातार नजर बनाए रखें। अगर दांत में दर्द हो, मसूड़ों में सूजन दिखे, कोई दांत हद से ज्यादा हिल रहा हो, मसूड़ों से खून आ रहा हो या फिर दांत निकलने में असामान्य रूप से देरी हो रही हो, तो इन्हें टालने के बजाय फौरन दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
दूध के दांतों की देखभाल भी उतनी ही जरूरी
अक्सर अभिभावक यह सोचकर दूध के दांतों की अनदेखी कर देते हैं कि ये तो वैसे भी गिर ही जाने हैं, पर डॉ. मोइन खान इस सोच को गलत बताते हैं। उनके अनुसार इन्हीं शुरुआती दांतों के सहारे बच्चा खाना ठीक से चबाना सीखता है, साफ बोलना सीखता है और सबसे अहम बात, ये दांत आगे आने वाले स्थायी दांतों के लिए सही जगह बनाकर रखते हैं। इसलिए दूध के दांतों की देखभाल उतनी ही जरूरी है जितनी स्थायी दांतों की।
रोजमर्रा की सही आदतें ही बचाव हैं
डॉ. खान का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही दिन में दो बार ब्रश करने की आदत डालनी चाहिए और उन्हें नियमित अंतराल पर दंत जांच के लिए ले जाना चाहिए। सही समय पर थोड़ी सी देखभाल और डॉक्टर की सलाह से न सिर्फ बच्चों के दांत स्वस्थ बने रहते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली कई दंत समस्याओं से भी आसानी से बचा जा सकता है।













