महाराष्ट्र के 1.08 लाख स्कूलों और उनके आसपास के इलाकों में अब बच्चों को समोसा, वड़ा पाव और अन्य जंक फूड नहीं मिलेंगे। राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंधे ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्कूलों के परिसरों के भीतर और उनके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री और विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। प्रशासन का यह कदम बच्चों की सेहत में सुधार की दिशा में उठाया गया है, लेकिन बच्चों की खान-पान की आदतों के कारण अभिभावकों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
प्रतिबंधित खाद्य पदार्थ और स्वास्थ्य पर पड़ता असर
जारी किए गए नए आदेश के तहत स्कूल की कैंटीन और आसपास की दुकानों पर अत्यधिक वसा, चीनी और नमक वाले प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पाबंदी रहेगी। इस प्रतिबंध के दायरे में वड़ा पाव, समोसा, आलू चिप्स, कोल्ड ड्रिंक, चॉकलेट, आइसक्रीम और इसी तरह के अन्य पैक्ड आइटम शामिल हैं। स्वास्थ्य प्रशासन ने यह सख्त फैसला बच्चों में तेजी से बढ़ती मोटापे की समस्या, मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और जीवनशैली से जुड़ी अन्य बीमारियों को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कम उम्र में बच्चों को पौष्टिक खान-पान के प्रति जागरूक करना और उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
FSSAI के दिशा-निर्देश और पुरानी स्थिति
स्कूलों में खान-पान से जुड़े नियमों का इतिहास पुराना है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लंबा विचार-विमर्श करने के बाद स्कूली बच्चों के बेहतर पोषण के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार किए थे। इन नियमों को 4 सितंबर 2020 से आधिकारिक तौर पर लागू किया गया था, लेकिन पिछले वर्षों के दौरान जमीन पर इनका असरदार क्रियान्वयन नहीं हो पाया। अब FDA ने इन्हीं नियमों का कड़ाई से पालन कराने और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
जमीनी क्रियान्वयन की चुनौतियां और कैंटीन की स्थिति
आदेश जारी होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इसके व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर सामने आ रही है। फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों की 50 मीटर की सीमा के बाहर लगने वाले ठेलों, स्टॉलों और छोटी दुकानों पर इस पाबंदी को लागू कराने के लिए क्या तंत्र काम करेगा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों के ठीक बाहर जंक फूड आसानी से मिलने के कारण बच्चे पौष्टिक खाने की जगह चिप्स और कोल्ड ड्रिंक खरीदना पसंद करते हैं। इसके अलावा, कई स्कूलों के आयोजनों में भी समोसे, वड़ा पाव और वेफर्स परोसे जाते हैं, जबकि पोहा, उपमा, इडली और रोटी-सब्जी जैसे पौष्टिक विकल्प बहुत कम दिखाई देते हैं।
प्रशासनिक समन्वय और अभिभावकों की जिम्मेदारी
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू और शराब की बिक्री रोकने के लिए कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन हमेशा पूरी तरह प्रभावी नहीं रहा है। जंक फूड पर रोक को सफल बनाने के लिए केवल एक विभाग का प्रयास काफी नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नगर निकायों, पुलिस, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच मजबूत तालमेल की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अगर बच्चे घर से टिफिन में जंक फूड लाएंगे या उन्हें बाहर से सामान खरीदने के लिए पैसे दिए जाएंगे, तो इस पाबंदी का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाएगा। बच्चों में स्वस्थ खान-पान की आदत डालने के लिए परिवारों को भी आगे आना होगा।



















