बारिश शुरू होते ही जामुन, यानी काला बेर, बाजार और मंडियों में छा जाता है। भीलवाड़ा की मंडी में भी इन दिनों जामुन की जमकर बिक्री हो रही है, भले ही इसकी कीमत 200 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गई हो। ग्राहकों को कीमत की परवाह नहीं, क्योंकि जामुन सिर्फ खट्टे-मीठे स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत को होने वाले असली फायदों के लिए भी जाना जाता है। यही वजह है कि कई डॉक्टर अब खुलकर मरीजों को इसे खाने की सलाह देने लगे हैं।
सिर्फ बारिश में मिलने वाला फल
राजकीय एकीकृत आयुष चिकित्सालय, भीलवाड़ा में आयुर्वेद और पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ संजय कुमार शर्मा बताते हैं कि जामुन के पेड़ आमतौर पर नदी और तालाब के किनारे ही उगते पाए जाते हैं। ज्यादातर फलों के उलट जामुन साल भर नहीं मिलता, यह सिर्फ दो से तीन महीने के लिए, वह भी सिर्फ मानसून के दौरान ही पेड़ पर दिखाई देता है, इसके बाद अगली बरसात तक इंतजार करना पड़ता है। डॉ शर्मा के मुताबिक जामुन के पेड़ का लगभग हर हिस्सा किसी न किसी रूप में फायदेमंद है, इसकी पत्ती, छाल और फल, तीनों ही सेहत के लिए उतने ही उपयोगी माने जाते हैं, सिर्फ फल ही नहीं।
दिल के लिए फायदेमंद कसैला फल
जामुन का फल स्वाद में कसैला होता है और डॉ शर्मा के अनुसार यही कसैलापन दिल की मांसपेशियों को मजबूती देने का काम करता है। इससे हृदय से जुड़ी बीमारियों में भी राहत मिलती है। जामुन में भरपूर मात्रा में फाइबर भी पाया जाता है, और डॉ शर्मा इसे दिल के लिए किसी टॉनिक जैसा असर बताते हैं, जो हृदय को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।
विटामिन सी और आयरन का खजाना
फाइबर के अलावा डॉ शर्मा बताते हैं कि जामुन में कई तरह के लवण और पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिनकी शरीर को जरूरत होती है। इसमें विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, साथ ही आयरन और अन्य विटामिन भी भरपूर मिलते हैं, जो नियमित सेवन करने पर सेहत के लिए बेहद लाभदायक साबित होते हैं।
गुठली से मिलेगी डायबिटीज से राहत
डॉ शर्मा के मुताबिक जामुन का फायदा सिर्फ उसके गूदे तक सीमित नहीं है। फल के अंदर मौजूद गुठली भी डायबिटीज के मरीजों के लिए खास तौर पर कारगर मानी जाती है। गुठली के अंदर के बीज को सुखाकर उसका बारीक पाउडर बनाया जाता है, और इसका सेवन अकेले ही किया जाता है। डॉ शर्मा बताते हैं कि जो व्यक्ति यह पाउडर रोजाना सुबह और शाम लेता है, उसे डायबिटीज के लक्षणों में कमी नजर आ सकती है और लंबे समय में इस बीमारी से राहत मिलने की भी पूरी संभावना रहती है।













