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नेपाल के पहाड़ों की दुर्लभ जंगली प्याज से जोड़ों के दर्द और त्वचा रोग में राहत का दावा, सीतामढ़ी में वैद्य की चिकित्सा सेवास्वास्थ्य
5 जुल॰ 2026, 2:19 pm (115 दिन पहले)· 4

नेपाल के पहाड़ों की दुर्लभ जंगली प्याज से जोड़ों के दर्द और त्वचा रोग में राहत का दावा, सीतामढ़ी में वैद्य की चिकित्सा सेवा

वैद्य राजेश सिंह का दावा है कि नेपाल के दुर्गम पहाड़ों में मिलने वाली एक दुर्लभ 'जंगली प्याज' गठिया, जोड़ों के दर्द और त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत देती है, और वे अगले एक-दो महीने सीतामढ़ी में अपनी सेवाएं देंगे.

सीतामढ़ी और आसपास के जिलों में इन दिनों एक पारंपरिक औषधि को लेकर चर्चा तेज है, जिसे वैद्य राजेश सिंह पिछले काफी समय से तैयार करते आ रहे हैं. उनका दावा है कि इस दवा की जान 'जंगली प्याज' नाम की एक दुर्लभ जड़ी-बूटी है, जो आम रसोई वाली प्याज से बिल्कुल अलग है.

नेपाल के दुर्गम पहाड़ों से आती है यह जड़ी-बूटी

राजेश सिंह के मुताबिक, यह पौधा नेपाल के ऊंचे और पथरीले पहाड़ी इलाकों में उगता है, जहां तक पहुंचना आसान नहीं है. इसे ढूंढ़ने और जमीन से निकालने में काफी मेहनत और समय लगता है. मिलने के बाद इसे किसी फैक्ट्री या मशीन से नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक विधि से औषधि के रूप में तैयार किया जाता है.

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गठिया और जोड़ों के दर्द में राहत का दावा

वैद्य का कहना है कि यह जड़ी-बूटी खासतौर पर उन मरीजों के लिए फायदेमंद बताई जाती है, जिन्हें शरीर में यूरिक एसिड बढ़ने से गठिया की शिकायत हो गई हो. इसके अलावा पुराने जोड़ों के दर्द, वात रोग और साइटिका जैसी तकलीफों में भी इसे असरदार बताया जा रहा है. राजेश सिंह के अनुसार, इस औषधि का सेवन करने वाले कई मरीजों ने दर्द से राहत मिलने की बात कही है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन दावों की पुष्टि किसी स्वतंत्र वैज्ञानिक अध्ययन से अब तक नहीं हुई है.

त्वचा और कान के संक्रमण में भी उपयोगी होने का दावा

सिर्फ जोड़ों और गठिया तक ही यह दावा सीमित नहीं है. राजेश सिंह का कहना है कि यही जड़ी-बूटी पुरानी खुजली और फोड़े-फुंसियों जैसी त्वचा से जुड़ी समस्याओं में भी काम आती है. साथ ही जिन लोगों के कान से संक्रमण के कारण पानी या मवाद बहने की शिकायत रहती है, उनमें भी इस पारंपरिक औषधि के इस्तेमाल की बात कही जा रही है.

सीतामढ़ी में अगले एक-दो महीने मिलेगी सेवा

फिलहाल वैद्य राजेश सिंह सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों में मौजूद हैं और अगले एक से दो महीने तक यहीं रहकर लोगों को अपनी पारंपरिक चिकित्सा सेवा देंगे. इस दौरान जो मरीज गठिया, जोड़ों के दर्द या त्वचा संबंधी समस्याओं से परेशान हैं, वे उनसे संपर्क कर सकते हैं.

डॉक्टर की सलाह के बिना इस्तेमाल न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि कोई भी जड़ी-बूटी या पारंपरिक इलाज अपनाने से पहले किसी योग्य डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए. यह सावधानी खासतौर पर उन मामलों में और भी जरूरी हो जाती है, जहां बीमारी पुरानी हो या हालत गंभीर हो, क्योंकि बिना जांच के किसी भी औषधि पर निर्भर रहना खतरनाक साबित हो सकता है.

सवाल-जवाब

जंगली प्याज क्या है?
वैद्य राजेश सिंह के मुताबिक यह आम प्याज से अलग एक जड़ी-बूटी है, जो नेपाल के ऊंचे और पथरीले पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है.
यह जड़ी-बूटी किन बीमारियों में फायदेमंद बताई गई है?
दावा है कि यह यूरिक एसिड बढ़ने से होने वाले गठिया, पुराने जोड़ों के दर्द, वात रोग और साइटिका में राहत देती है.
क्या यह त्वचा रोगों में भी काम करती है?
हां, राजेश सिंह का कहना है कि यह पुरानी खुजली, फोड़े-फुंसियों और संक्रमण से कान बहने जैसी दिक्कतों में भी उपयोगी हो सकती है.
क्या इन दावों की वैज्ञानिक पुष्टि हुई है?
नहीं, इन दावों की कोई स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है.
वैद्य राजेश सिंह कहां और कब तक सेवा देंगे?
वे फिलहाल सीतामढ़ी और आसपास के इलाकों में अगले एक-दो महीने तक रहकर लोगों को अपनी पारंपरिक चिकित्सा सेवा देंगे.
इस औषधि को इस्तेमाल करने से पहले क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी जड़ी-बूटी या पारंपरिक इलाज को अपनाने से पहले योग्य डॉक्टर या आयुष विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें, खासकर बीमारी पुरानी या गंभीर होने पर.
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