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छात्रों की चिंता की जड़ पकड़ेगा कानपुर विश्वविद्यालय का नया स्केल, टेस्ट महज 20 मिनट कास्वास्थ्य
5 जुल॰ 2026, 6:54 pm (69 दिन पहले)· 4

छात्रों की चिंता की जड़ पकड़ेगा कानपुर विश्वविद्यालय का नया स्केल, टेस्ट महज 20 मिनट का

कानपुर के सीएसजेएमयू ने 17 से 25 साल के युवाओं के लिए एक नया जनरल एंग्जायटी स्केल तैयार किया है, जो महज 18 से 20 मिनट में बता देगा कि छात्र की चिंता पढ़ाई, भावनाओं, सामाजिक माहौल या भविष्य को लेकर है।

पढ़ाई का बढ़ता दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर को लेकर चिंता और भविष्य की अनिश्चितता, इन सबने आज देश के लाखों युवाओं को तनाव और एंग्जायटी की चपेट में ला दिया है। बहुत बार छात्र अपनी उलझन किसी को बता ही नहीं पाते और यह मानसिक दबाव अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। इसी समस्या से निपटने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा वैज्ञानिक पैमाना तैयार किया है, जो चंद मिनटों में यह बता देगा कि कोई छात्र किस तरह की चिंता से जूझ रहा है।

टीम ने मिलकर तैयार किया एंग्जायटी स्केल

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में शिक्षा विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. विमल सिंह, शोधार्थी शुभी रस्तोगी, आईसीएसएसआर फेलो देश दीपक और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी लखनऊ की सहायक प्राध्यापिका डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर यह जनरल एंग्जायटी स्केल तैयार किया है। यह खासतौर पर 17 से 25 साल के युवाओं के लिए बनाया गया है, यानी वह उम्र जिसमें ज्यादातर छात्र स्कूल से कॉलेज और फिर करियर की दहलीज पार करते हैं। इस स्केल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सिर्फ यह नहीं बताती कि छात्र तनाव में है या नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि उसकी चिंता पढ़ाई को लेकर है, भावनाओं से जुड़ी है, सामाजिक माहौल की वजह से है, ज्यादा सोचने की आदत से उपजी है या फिर भविष्य को लेकर है। इस तरह शिक्षक और काउंसलर सीधे जड़ तक पहुंच सकते हैं, बजाय इसके कि सिर्फ यह पता चले कि छात्र परेशान है।

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65 सवालों से घटकर 35 पर टिका फॉर्मेट, 800 छात्रों पर परीक्षण

इस स्केल को अंतिम रूप देने से पहले शोधकर्ताओं ने शुरुआत में 65 सवाल तैयार किए थे। विशेषज्ञों की राय के बाद इनकी संख्या घटाकर 35 कर दी गई, ताकि यह छात्रों के लिए ज्यादा आसान और व्यावहारिक बन सके। इसके बाद उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर इसका परीक्षण किया गया। यह पैमाना फाइव-प्वाइंट लिकर्ट स्केल पर आधारित है, जिसमें छात्रों को हर सवाल के जवाब में पूर्णतः सहमत से लेकर पूर्णतः असहमत तक के विकल्प चुनने होते हैं। खास बात यह है कि इसे पूरा करने में मुश्किल से 18 से 20 मिनट लगते हैं और इसे किसी एक छात्र पर या पूरे समूह पर एक साथ भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे स्कूल और कॉलेज बड़े पैमाने पर भी इसका इस्तेमाल कर सकेंगे।

0.94 की विश्वसनीयता, जीएडी-7 से भी हुई जांच

डॉ. विमल सिंह के मुताबिक इस स्केल की विश्वसनीयता 0.94 है, जो इसे बेहद भरोसेमंद पैमाना बनाती है। इतना ही नहीं, इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से इस्तेमाल हो रहे जीएडी-7 स्केल के साथ भी परखा गया, जिसमें भी अच्छे नतीजे सामने आए। इसी विश्वसनीयता के आधार पर देश की जानी-मानी संस्था प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड ने इस स्केल को प्रकाशित भी किया है, जो इसे शैक्षणिक और मनोवैज्ञानिक हलकों में और मजबूती देता है।

अब समय रहते मिल सकेगी सही काउंसिलिंग

इस स्केल के आने के बाद शिक्षक, काउंसलर और मनोवैज्ञानिक चंद मिनटों में यह समझ सकेंगे कि किसी खास छात्र को किस तरह की परेशानी सबसे ज्यादा घेरे हुए है। इसके आधार पर उसे जरूरत के हिसाब से सही समय पर काउंसिलिंग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद दी जा सकेगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे कई युवाओं को गंभीर मानसिक समस्याओं की चपेट में आने से पहले ही राहत मिल सकेगी, क्योंकि दिक्कत की पहचान जितनी जल्दी होगी, इलाज और मदद उतनी ही असरदार होगी।

कुलपति बोले, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी उपलब्धि

कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय हमेशा से शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और आने वाले समय में इसका फायदा देशभर के शिक्षण संस्थानों और लाखों छात्र-छात्राओं को मिलेगा।

सवाल-जवाब

सीएसजेएमयू का जनरल एंग्जायटी स्केल क्या है?
यह एक वैज्ञानिक पैमाना है जो 17 से 25 साल के युवाओं में तनाव और एंग्जायटी की पहचान करता है और बताता है कि चिंता किस वजह से है।
यह स्केल किसने और किसके मार्गदर्शन में तैयार किया?
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन में डॉ. विमल सिंह, शुभी रस्तोगी, देश दीपक और डॉ. दिव्या आर पंजवानी ने मिलकर इसे तैयार किया।
इस टेस्ट का परिणाम आने में कितना समय लगता है?
इसे पूरा करने में केवल 18 से 20 मिनट लगते हैं।
यह स्केल कितना भरोसेमंद है?
इसकी विश्वसनीयता 0.94 है और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के जीएडी-7 स्केल से भी जांचा जा चुका है।
इसका परीक्षण कितने छात्रों पर किया गया?
इसे उत्तर प्रदेश के 800 स्नातक छात्रों पर परखा गया।
इस स्केल में सवालों की संख्या कितनी है?
शुरुआत में 65 सवाल बनाए गए थे, जिन्हें विशेषज्ञों की सलाह के बाद घटाकर 35 कर दिया गया।
इसे किस संस्था ने प्रकाशित किया है?
इसे प्रसाद साइको प्राइवेट लिमिटेड ने प्रकाशित किया है।
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