सीलिएक रोग के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 13 सितंबर को नेशनल सीलिएक अवेयरनेस डे 2026 के रूप में मनाया जाता है। सीलिएक एक ऐसी गंभीर और पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसके बारे में आज भी समाज में बहुत कम जानकारी है, जबकि दुनिया भर में करोड़ों लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के शरीर में सुरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम भोजन में मौजूद ग्लूटेन नामक प्रोटीन के खिलाफ असामान्य रूप से प्रतिक्रिया करने लगता है। यह हानिकारक प्रतिक्रिया छोटी आंत की नाजुक अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचाती है, जिससे शरीर खाए गए भोजन से जरूरी पोषक तत्वों को ठीक से सोख नहीं पाता है।
सीलिएक रोग के लक्षण और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम
यह बीमारी जीवन के किसी भी पड़ाव पर, चाहे वह बचपन हो या वयस्क अवस्था, किसी को भी प्रभावित कर सकती है। इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य और रोजमर्रा की दिक्कतों जैसे होते हैं कि लोग अक्सर इसे पेट की साधारण समस्या, गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। समय पर इस बीमारी की पहचान न होने के कारण यह शरीर को अंदर से खोखला कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया, हड्डियों का कमजोर होना, कुपोषण और कई अन्य गंभीर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। बच्चों में इस बीमारी का सबसे बड़ा और चिंताजनक लक्षण उनके शारीरिक और मानसिक विकास की गति का धीमा होना है।
अनुवांशिक संबंध और आंतों को नुकसान पहुंचाने वाले कारक
सीलिएक रोग मुख्य रूप से एक आनुवंशिक और ऑटोइम्यून स्थिति है। जब कोई मरीज ग्लूटेन युक्त भोजन खाता है, तो उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली छोटी आंत पर हमला कर देती है। ग्लूटेन मुख्य रूप से गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाने वाला एक विशेष प्रोटीन है। जब सीलिएक के मरीज इन अनाजों या इनसे बनी चीजों का सेवन करते हैं, तो उनकी छोटी आंत की अंदरूनी परत गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसके कारण शरीर के लिए भोजन में मौजूद आवश्यक विटामिन, मिनरल और अन्य पोषक तत्वों को अवशोषित करना असंभव हो जाता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।
बचाव के तरीके, सुरक्षित आहार और बीमारी की जांच
हालांकि सीलिएक रोग को पूरी तरह से ठीक करने का कोई प्रमाणित वैज्ञानिक तरीका या दवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन जीवनभर पूरी तरह से ग्लूटेन-फ्री आहार अपनाकर इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। मरीजों को गेहूं, जौ, राई के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। इसके विपरीत, चावल, दालें, ताजे फल, हरी सब्जियां, आलू, अंडे और अधिकांश प्राकृतिक खाद्य पदार्थ इस बीमारी में खाने के लिए पूरी तरह से सुरक्षित माने जाते हैं। इस बीमारी के सटीक निदान के लिए डॉक्टर आमतौर पर विशेष ब्लड टेस्ट की सलाह देते हैं और जरूरत पड़ने पर छोटी आंत की स्थिति देखने के लिए एंडोस्कोपी भी की जा सकती है।


















