यौन सुख और शारीरिक अंतरंगता के मामलों में अक्सर तेज गति और तीव्र लय को ही चरम आनंद का जरिया माना जाता है। हालांकि, कभी-कभी धीमी और अधिक सोच-समझकर अपनाई गई तकनीकें कहीं अधिक शक्तिशाली और संतोषजनक परिणाम दे सकती हैं। बेडरूम में आनंद बढ़ाने के लिए एक ऐसी ही तकनीक इन दिनों चर्चा में है जिसे लोग अनजाने में तो करते हैं, लेकिन इसके फायदों से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। इस तकनीक को "आउटस्ट्रोकिंग" कहा जाता है। इसका सीधा सा मतलब है कि शारीरिक संबंध बनाने के दौरान योनि या मलाशय से लिंग या सेक्स टॉय को बेहद धीरे-धीरे बाहर निकालना। हालांकि कई लोग इस प्रक्रिया को बिना किसी योजना के स्वाभाविक रूप से करते हैं, लेकिन विशेषज्ञों और वैज्ञानिक अध्ययनों का मानना है कि इस बाहर निकालने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान देने से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर चरम सुख को बढ़ाया जा सकता है।
धीमी गति से बाहर निकालने के पीछे के हैरान करने वाले आंकड़े
यौन शिक्षा से जुड़ी एक लोकप्रिय वेबसाइट ओएमजीयस द्वारा किए गए एक बड़े सर्वेक्षण में इस तकनीक को लेकर बेहद दिलचस्प खुलासे हुए हैं। लगभग 20,000 महिलाओं पर किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि करीब 57% महिलाओं को शारीरिक संबंध बनाने के दौरान लिंग या सेक्स टॉय को शरीर से धीरे-धीरे बाहर निकालने की प्रक्रिया में अतिरिक्त आनंद मिलता है। यह अध्ययन इस आम धारणा को चुनौती देता है कि शारीरिक सुख केवल अंदर की तरफ दबाव डालने से ही मिलता है। इसके बजाय, शरीर से बाहर आने का यह धीमा सफर भी उतना ही उत्तेजक हो सकता है।
यौन विशेषज्ञ जीजी एंगल का कहना है कि हर किसी को अपने अंतरंग पलों में इस तकनीक को जरूर शामिल करना चाहिए। उनके अनुसार, हमें वैसे भी अपने शरीर से चीजों को धीरे-धीरे ही बाहर निकालना चाहिए। लोग कई बार अनजाने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि योनि या मलाशय से किसी टॉय या लिंग को अचानक और तेजी से बाहर निकालना दर्दनाक हो सकता है। ऐसे में आउटस्ट्रोकिंग न केवल असुविधा को दूर रखती है, बल्कि सुखद अहसास को भी काफी लंबा खींच देती है।
मानसिक उत्तेजना और नियंत्रण का मनोविज्ञान
आउटस्ट्रोकिंग के इतना प्रभावी होने का एक बड़ा कारण यह है कि हमारा दिमाग यौन उत्तेजना को किस तरह महसूस करता है। पुस्तक किंक क्यूरियस की लेखिका और विशेषज्ञ जीजी एंगल समझाती हैं कि जब शरीर के भीतर किसी वस्तु के प्रवेश या निकास की गति को जानबूझकर बहुत धीमा कर दिया जाता है, तो इससे दिमाग में एक प्रकार की उत्सुकता पैदा होती है। यह उत्सुकता सीधे तौर पर हमारे मस्तिष्क की उत्तेजना प्रणाली से जुड़ी होती है। आगे क्या होने वाला है, इस बात का सस्पेंस शरीर में जोश और उत्तेजना को काफी बढ़ा देता है।
इस अनुभव को और अधिक कामुक बनाने के लिए जीजी एंगल बातचीत का सहारा लेने की सलाह देती हैं। उनके अनुसार, शारीरिक संबंध के दौरान कामुक बातें करना इस प्रक्रिया को और भी ज्यादा रोमांचक बना सकता है। अपने पार्टनर को धीरे-धीरे बाहर आने के अहसास के बारे में बताना या अपनी धीमी गति के जरिए उनके शरीर पर नियंत्रण महसूस कराना, इस पूरे अनुभव को एक अलग ही मानसिक ऊंचाई पर ले जाता है। इससे आपसी तालमेल और गहरा होता है।
शरीर पर आउटस्ट्रोकिंग का जैविक प्रभाव
अगर हम शरीर की बनावट को समझें, तो महिला के जननांगों में मौजूद संवेदनशील कोशिकाएं आउटस्ट्रोकिंग के दौरान बहुत सक्रिय हो जाती हैं। उत्तेजना के दौरान योनि की दीवारों में रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे वे सूज जाती हैं और बेहद संवेदनशील हो जाती हैं। ऐसे में जब कोई लहरदार बनावट वाला टॉय या लिंग बहुत धीरे-धीरे बाहर खींचा जाता है, तो वह इन संवेदनशील दीवारों के साथ एक विशेष प्रकार का घर्षण पैदा करता है। यह घर्षण सामान्य झटकों से मिलने वाले अहसास से बिल्कुल अलग और अधिक गहरा होता है।
यह तकनीक मलाशय के जरिए लिए जाने वाले आनंद के लिए भी बेहद कारगर मानी जाती है। मलाशय का बाहरी हिस्सा बेहद संवेदनशील तंत्रिकाओं से भरा होता है। चरम सुख के समय मलाशय से किसी टॉय, विशेष रूप से एनल बीड्स, को धीरे-धीरे बाहर निकालना इस अहसास को कई गुना बढ़ा देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इसकी बनावट मलाशय के खुलने वाले हिस्से की नसों को सीधे उत्तेजित करती है।
ओएमजीयस के सर्वेक्षण में शामिल महिलाओं ने भी इस बात की पुष्टि की है। एक महिला ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें बाहर खींचते समय मिलने वाला हल्का खिंचाव बेहद पसंद है। अगर टॉय में लहरदार या उभरी हुई बनावट हो, तो यह सुखद खिंचाव एक के बाद एक कई बार महसूस होता है। वहीं एक अन्य महिला ने बताया कि जब टॉय या लिंग पूरी तरह बाहर निकल जाता है, तो उसके बाद मांसपेशियों में होने वाला संकुचन उन्हें चरम आनंद जैसा अहसास कराता है।
पुरुषों के लिए भी समान रूप से फायदेमंद
यह तकनीक केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसका भरपूर आनंद ले सकते हैं। जीजी एंगल के अनुसार, सिस पुरुषों के लिए भी मलाशय के रास्ते किए जाने वाले प्ले के दौरान धीरे-धीरे बाहर निकालने की यह प्रक्रिया ठीक वैसा ही सुखद अहसास देती है जैसा महिलाओं को मिलता है। इसके अलावा, जब पुरुष खुद लिंग को धीरे-धीरे बाहर निकालते हैं, तो उन्हें अपनी उत्तेजना पर एक बेहतर नियंत्रण महसूस होता है। यह नियंत्रण उनके लिए एक कामुक खेल की तरह काम करता है, जिससे वे अपने और अपने पार्टनर के सुख को लंबे समय तक बढ़ा सकते हैं।
आउटस्ट्रोकिंग आजमाने के लिए विशेषज्ञों की खास सलाह
यदि आप और आपके पार्टनर इस तकनीक को आजमाना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं
- सरप्राइज का एलिमेंट जोड़ें: यदि आपको अनिश्चितता पसंद है, तो ऐसे एनल टॉयज का उपयोग करें जिनमें बीड्स अलग-अलग आकार के हों और वे किसी क्रम में न होकर रैंडम तरीके से लगे हों। इसके अलावा, खिंचाव की जिम्मेदारी अपने पार्टनर को सौंप दें ताकि आपको अंदाजा न हो कि अगला अहसास कब होने वाला है।
- धैर्य और लुब्रिकेंट का इस्तेमाल: यदि आप पहली बार एनल बीड्स का उपयोग कर रहे हैं, तो बहुत अधिक धैर्य रखें और प्रचुर मात्रा में लुब्रिकेंट का उपयोग करें। एक बार में केवल एक बीड को ही पार करें और यदि कहीं भी दर्द महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं।
- सही समय का चुनाव: कई महिलाएं इस तकनीक को शारीरिक संबंध बनाने के अंतिम चरणों में इस्तेमाल करना पसंद करती हैं, जब शरीर पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका होता है। चरम सुख की कगार पर पहुंचने के दौरान धीरे-धीरे बाहर खींचने की यह क्रिया शरीर को चरम सीमा पार कराने में मदद करती है और ऑर्गेज्म को और अधिक तीव्र बना देती है।
- साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान: बेडरूम में सुरक्षा और स्वच्छता सबसे महत्वपूर्ण है। यदि किसी टॉय का उपयोग मलाशय में किया गया है, तो उसे योनि में डालने से पहले गुनगुने पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचा जा सके।



















