स्मार्टफोन पर लगातार कई घंटों तक गेमिंग करने और गलत तरीके से लेटकर स्क्रीन देखने का खमियाजा यूट्यूबर और एक्ट्रेस शकीला को अपनी गर्दन की सर्जरी कराकर भुगतना पड़ा है। बेड पर अस्वस्थ पॉश्चर में मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह से उनकी गर्दन की रीढ़ की स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंततः 3 लाख रुपये खर्च करके ऑपरेशन कराना पड़ा। फिलहाल इस जटिल सर्जरी के बाद शकीला धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं और डॉक्टरों ने उन्हें सुरक्षा के तौर पर सपोर्टिव नेक कॉलर पहनने का निर्देश दिया है। शकीला ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो जारी कर अपनी इस दर्दनाक आपबीती को साझा किया और आम लोगों के साथ-साथ अभिभावकों को भी बच्चों और खुद के अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
लंबे समय तक स्क्रीन देखने से गर्दन की रीढ़ पर असर
स्मार्टफोन के अधिक इस्तेमाल और गर्दन की गंभीर बीमारियों के बीच के संबंध को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना बहुत जरूरी है। इस विषय पर फरीदाबाद स्थित अमृता हॉस्पिटल में ऑर्थोपेडिक्स एवं स्पाइन सर्जरी के कंसल्टेंट और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर अर्चित गोयल ने महत्वपूर्ण चिकित्सकीय तथ्य स्पष्ट किए हैं। उनके अनुसार यह धारणा गलत है कि गर्दन की रीढ़ से जुड़ी गंभीर समस्याएं केवल किसी दुर्घटना, गिरने या सीधी चोट लगने से ही पैदा होती हैं। वास्तव में जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक सिर को आगे की तरफ झुकाकर या एक ओर तिरछा रखकर मोबाइल चलाता है, तो गर्दन की रीढ़ की हड्डी पर लगातार अत्यधिक शारीरिक दबाव बना रहता है।
लगातार झुकी हुई स्थिति में रहने से गर्दन को सहारा देने वाली मांसपेशियों को बिना आराम किए काम करना पड़ता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद इंटरवर्टेब्रल डिस्क, जोड़ों और लिगामेंट्स पर भी बार-बार खिंचाव पैदा होता है। इस वजह से शुरुआती चरणों में व्यक्ति को गर्दन में गंभीर अकड़न, कंधों में तेज दर्द, सिरदर्द, दोनों कंधों के बीच जलन और बाहों तक फैलने वाले दर्द का अहसास होने लगता है।
गर्दन के दर्द को कब नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि हर बार गर्दन में उठने वाला दर्द रीढ़ की किसी बड़ी या स्थायी बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार गलत तरीके से बैठने या उठने के कारण मांसपेशियों में सामान्य खिंचाव आ जाता है जो थोड़े आराम से ठीक हो सकता है। हालांकि कुछ ऐसे चेतावनी देने वाले लक्षण हैं जिन्हें नजरअंदाज करना सेहत के लिए बेहद भारी पड़ सकता है।
यदि गर्दन के दर्द के साथ-साथ हाथों और पैरों में लगातार झनझनाहट महसूस हो रही हो, हाथ सुन्न पड़ने लगें या मांसपेशियों में कमजोरी आ जाए, तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। इसके अलावा अगर हाथ की पकड़ इतनी कमजोर हो जाए कि चीजें बार-बार छूटकर गिरने लगें, तो तुरंत स्पाइन विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। बार-बार होने वाले गर्दन दर्द के साथ सुन्नपन का जुड़ जाना नस दबने का सीधा संकेत हो सकता है।
क्या मोबाइल गेमिंग से डिस्क की बीमारी हो जाती है?
स्मार्टफोन पर गेमिंग और डिस्क की समस्याओं के संबंध पर बात करते हुए डॉक्टर अर्चित गोयल ने कहा कि इस मामले में सही परिप्रेक्ष्य समझना जरूरी है। घंटों तक मोबाइल पर गेम खेलने या वीडियो देखने से व्यक्ति गलत पॉश्चर में फंसा रहता है, जिससे गर्दन और हाथों की नसों तथा मांसपेशियों में विकार उत्पन्न होने का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
लेकिन इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मोबाइल पर गेम खेलने वाले हर व्यक्ति को डिस्क की बीमारी हो जाएगी या उसे सर्जरी की आवश्यकता पड़ेगी। मुख्य समस्या स्वयं डिवाइस में नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल के गलत तरीके में निहित है। विशेषकर तब जब कोई व्यक्ति बिना कोई ब्रेक लिए कई घंटों तक लगातार एक ही अनुचित पॉश्चर में लेटा या बैठा रहता है।
गर्दन को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय
गर्दन और रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित रखने के लिए चिकित्सकों ने कुछ बेहद सरल लेकिन प्रभावी सावधानियां बरतने का सुझाव दिया है
- स्मार्टफोन या लैपटॉप का उपयोग करते समय हमेशा अपने बैठने और लेटने के पॉश्चर का ध्यान रखें।
- लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने के दौरान शरीर द्वारा दिए जाने वाले थकावट या दर्द के संकेतों को अनसुना न करें।
- यदि हाथों में सुन्नपन या झनझनाहट का अहसास हो, तो तुरंत फोन चलाना बंद करें।
- गेम खेलने या वीडियो देखने के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना बेहद आवश्यक है।
- मोबाइल चलाते समय अपनी शारीरिक स्थिति और गर्दन के एंगल को बदलते रहें।
- गर्दन को लंबे समय तक एक ही कोण पर स्थिर रखने से बचें और हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम करें।



















