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अंबाला नागरिक अस्पताल की डॉक्टर रजिता ने बताया बच्चों और महिलाओं में एंग्जायटी के लक्षण, जानें बचाव के आसान उपायस्वास्थ्य
15 अग॰ 2026, 11:13 am (5 घंटे पहले)· 2

अंबाला नागरिक अस्पताल की डॉक्टर रजिता ने बताया बच्चों और महिलाओं में एंग्जायटी के लक्षण, जानें बचाव के आसान उपाय

अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में बढ़ती मानसिक समस्याओं के बीच डॉ. रजिता ने बच्चों में पढ़ाई का दबाव और महिलाओं में घबराहट के कारणों पर विस्तृत परामर्श दिया है।

बदलते दौर और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लगातार गंभीर रूप ले रही हैं। अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में आने वाले मरीजों के अनुभवों से यह साफ हो रहा है कि तनाव और मानसिक दबाव अब केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। बच्चे और महिलाएं भी बड़े पैमाने पर एंग्जायटी की गिरफ्त में आ रहे हैं। अस्पताल में परामर्श दे रहीं होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता के अनुसार, मानसिक सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ाना और सही समय पर मार्गदर्शन पाना बेहद आवश्यक हो गया है। समय रहते लक्षणों की पहचान करके जीवनशैली में बदलाव करने से इस स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

बच्चों में पढ़ाई का खौफ और सवाल पूछने का झिझक

अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉक्टर रजिता ने बताया कि इन दिनों बच्चों के बीच अकादमिक प्रदर्शन को लेकर घबराहट काफी बढ़ रही है। कई बार जब किसी बच्चे को कक्षा में कोई विषय ठीक से समझ में नहीं आता, तब भी वह शिक्षक से दोबारा पूछने में हिचकिचाता है। उसके मन में यह भय बैठ जाता है कि दोबारा सवाल करने पर सहपाठी उसे कम अकलमंद समझकर उसका मजाक उड़ाएंगे।

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डॉ. रजिता का कहना है कि यह झिझक और मन की बात छिपाने की आदत धीरे-धीरे बच्चे के मस्तिष्क पर गहरा दबाव बनाती है। बच्चा अपनी दुविधा किसी के सामने जाहिर नहीं करता और अंदर ही अंदर कुढ़ता रहता है। इसका सीधा असर उसके सामाजिक व्यवहार, स्कूल के प्रदर्शन और दैनिक दिनचर्या पर दिखाई देने लगता है। इसी वजह से अभिभावकों को केवल बच्चे की अंकतालिका और नतीजों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उसके बदलते व्यवहार की बारीक निगरानी करनी चाहिए।

महिलाओं पर जिम्मेदारियों का बोझ और हार्मोनल उतार-चढ़ाव

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी यह समस्या महिलाओं को भी अलग-अलग रूपों में प्रभावित करती है। गृहस्थी की अनगिनत जिम्मेदारियां संभालना, निरंतर बना रहने वाला मानसिक तनाव और जीवन के विभिन्न चरणों में होने वाले शारीरिक व हार्मोनल बदलाव महिलाओं की मनोदशा पर गहरा प्रभाव डालते हैं। समाज और परिवार की अपेक्षाओं को पूरा करने की होड़ में बहुत सी महिलाएं अपनी तकलीफों को अपनों से साझा नहीं कर पातीं।

लंबे समय तक अपनी भावनाओं को दबाकर रखने के कारण महिलाएं निरंतर तनाव में जीती हैं। डॉ. रजिता के मुताबिक, इस मानसिक दबाव का असर उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर भी साफ दिखने लगता है। जब भावनाएं व्यक्त नहीं होतीं, तो वे एंग्जायटी और गंभीर चिंता के रूप में बाहर आती हैं।

एंग्जायटी के प्रमुख लक्षण और चिकित्सकीय परामर्श का महत्व

एंग्जायटी की पहचान के लिए शरीर और व्यवहार में आने वाले बदलावों को समझना जरूरी है। अत्यधिक गुस्सा आना, स्वभाव में चिड़चिड़ापन, किसी भी कार्य में एकाग्रता न बन पाना, शरीर का लगातार थकावट महसूस करना, सिर भारी रहना और दिनभर घबराहट बने रहना इसके प्रमुख संकेत हो सकते हैं।

हालांकि, डॉ. रजिता ने स्पष्ट किया कि ये लक्षण अन्य शारीरिक या मानसिक विकारों की वजह से भी पैदा हो सकते हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे या दैनिक कामकाज को प्रभावित करने लगे, तो बिना देरी किए योग्य विशेषज्ञ से डॉक्टरी सलाह लेना ही सबसे उचित मार्ग है।

योग, प्राणायाम और खान-पान में जरूरी सुधार

मानसिक संतुलन और एंग्जायटी पर काबू पाने के लिए डॉ. रजिता ने दैनिक दिनचर्या में मेडिटेशन, योग, भ्रामरी और प्राणायाम के विभिन्न रूपों को शामिल करने का सुझाव दिया है। मानसिक शांति बनाए रखने में शारीरिक गतिविधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

योग के साथ-साथ भोजन की आदतों पर ध्यान देना भी उतना ही आवश्यक है। बहुत ज्यादा तली हुई और अत्यधिक मिर्च-मसालेदार चीजों के सेवन से बचना चाहिए। अपनी दैनिक खुराक में ताजे फल, पौष्टिक आहार और पर्याप्त मात्रा में जल शामिल करने से शरीर और मन दोनों को ऊर्जा मिलती है और तनाव का स्तर कम होता है।

डिजिटल स्क्रीन नियंत्रण और आउटडोर खेल

बच्चों की मानसिक सेहत सुधारने के लिए उनके स्क्रीन टाइम को संतुलित करना बहुत जरूरी है। बच्चों को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया से अचानक पूरी तरह काट देने के बजाय उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित और सही उपयोग के बारे में समझाना अधिक प्रभावी होता है।

माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल का समय तय करें। इसके साथ ही बच्चों को सुबह की सैर, जॉगिंग और शाम को खुले मैदान में खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। मैदानी खेल न केवल शारीरिक विकास में मदद करते हैं बल्कि मानसिक थकावट को भी दूर भगाते हैं।

पारिवारिक सहयोग और अपेक्षाओं का संतुलन

डॉ. रजिता के अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण कदम यह है कि माता-पिता बच्चों पर अपनी अवास्तविक महत्वाकांक्षाओं और उम्मीदों का बोझ न लादें। हर बच्चे की क्षमताएं और कमजोरियां अलग होती हैं, जिन्हें समझकर उसका मार्गदर्शन और सहयोग करना चाहिए।

घर के भीतर ऐसा स्नेहमयी माहौल तैयार करना चाहिए जहां बच्चा अपनी किसी भी समस्या या डर को बिना किसी संकोच के परिवार के साथ साझा कर सके। पर्याप्त नींद, संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और परिवार का भावनात्मक संबल बच्चों और महिलाओं को हर तरह के मानसिक तनाव से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। यदि परेशानी गंभीर लगे, तो समय रहते विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

सवाल-जवाब

बच्चों में एंग्जायटी बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
पढ़ाई का डर, परीक्षा में अच्छे अंक लाने का दबाव और कक्षा में दोबारा सवाल पूछने पर सहपाठियों द्वारा कम समझदार समझे जाने का डर बच्चों में एंग्जायटी बढ़ाता है।
महिलाओं में मानसिक तनाव और घबराहट के क्या कारण हैं?
पारिवारिक जिम्मेदारियां, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव, और शरीर में होने वाले हार्मोनल व शारीरिक बदलाव महिलाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।
एंग्जायटी के मुख्य शारीरिक और व्यवहारगत लक्षण क्या हैं?
अत्यधिक गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन, काम में मन न लगना, लगातार थकावट महसूस होना, सिर में भारीपन और दिनभर घबराहट रहना एंग्जायटी के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।
एंग्जायटी से बचाव के लिए कौन से योग और प्राणायाम उपयोगी हैं?
दिनचर्या में मेडिटेशन, योग, भ्रामरी प्राणायाम और विभिन्न श्वास संबंधी अभ्यासों को शामिल करने से एंग्जायटी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की क्या सलाह है?
बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह अलग करने के बजाय इंटरनेट का सही इस्तेमाल सिखाएं, स्क्रीन टाइम की सीमा तय करें और उन्हें आउटडोर खेल व टहलने के लिए प्रेरित करें।
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