बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है, जिसे पूरा करने के लिए विशेषज्ञ अक्सर विभिन्न प्रकार के सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। हालांकि, पर्याप्त जानकारी न होने के कारण कई लोग इन पोषक तत्वों का सेवन गलत तरीके से करने लगते हैं, जिससे फायदे के बजाय शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। इस समस्या से बचने और सही परिणाम पाने के लिए डॉक्टर जुश्या भाटिया ने सप्लीमेंट्स लेने का सही समय, उचित तरीका और सही कॉम्बिनेशन साझा किया है।
आयरन, कैल्शियम और विटामिन बी 12 लेने के नियम
आयरन को हमेशा विटामिन सी के साथ खाली पेट लेना फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इस मेल से शरीर में आयरन का अवशोषण बहुत अच्छी तरह होता है। इसके विपरीत, कैल्शियम सप्लीमेंट्स का सेवन हमेशा रात के समय करना चाहिए। रात में कैल्शियम लेने से न केवल नींद अच्छी आती है बल्कि मांसपेशियां भी पूरी तरह से रिलैक्स होती हैं। ध्यान रखें कि कैल्शियम को कभी भी आयरन के साथ एक साथ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये दोनों एक-दूसरे के अवशोषण की प्रक्रिया को बाधित करते हैं। इसके अलावा, विटामिन बी 12 सप्लीमेंट्स को हमेशा दिन के वक्त लेना चाहिए ताकि शरीर को भरपूर एनर्जी मिल सके। यह पोषक तत्व भोजन को ऊर्जा में बदलने का काम करता है जिससे पूरे दिन शरीर में फुर्ती बनी रहती है। इसे रात में लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपकी नींद में खलल डाल सकता है।
कोलेजन, ग्लूटाथिओन और मैग्नीशियम के सेवन का तरीका
कोलेजन सप्लीमेंट्स को या तो पूरी तरह खाली पेट लें या फिर पोस्ट वर्कआउट के बाद इस्तेमाल करें। खाली पेट लेने से इसका अवशोषण बेहतर होता है, जबकि वर्कआउट के बाद लेने से मांसपेशियों और जोड़ों की रिकवरी में भारी मदद मिलती है। ग्लूटाथिओन सप्लीमेंट्स को सुबह खाली पेट नाश्ते से ठीक आधे घंटे पहले लेना चाहिए ताकि इसका अवशोषण पूरी क्षमता के साथ हो सके। मैग्नीशियम भी एक ऐसा सप्लीमेंट है जिसे रात के समय लेना बेहद फायदेमंद होता है। रात में मैग्नीशियम लेने से नींद की गुणवत्ता में सुधार होता है और शरीर की मांसपेशियां शांत होती हैं। यह नसों को शांत करने के साथ कोर्टिसोल के स्तर को नियंत्रित करता है और नींद से जुड़े हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है।
ओमेगा थ्री, बायोटिन और जिंक की सही टाइमिंग
ओमेगा थ्री फिश ऑयल सप्लीमेंट्स को हमेशा दोपहर के भोजन के तुरंत बाद लेना एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। ऐसा करने से यह सप्लीमेंट अन्य खाद्य पदार्थों के साथ आसानी से घुल-मिल जाता है, जिससे मुंह में मछली जैसी गंध आने वाली डकार जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। बायोटिन सप्लीमेंट्स को हमेशा भोजन के साथ लेना उचित है, जिससे पेट से जुड़ी किसी भी तरह की समस्याओं से बचाव हो जाता है। बायोटिन भोजन में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और फैट को ऊर्जा में बदलने का काम करता है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म काफी बेहतर होता है। दूसरी ओर, जिंक सप्लीमेंट्स को कभी भी खाली पेट नहीं लेना चाहिए क्योंकि इससे जी मिचलाने की समस्या हो सकती है, इसलिए इसे हमेशा हल्के भोजन या नाश्ते के साथ ही लेना चाहिए।



















