बाजार में मिलने वाले नमकीन, चिप्स, बिस्कुट, आइसक्रीम और तमाम पैकेट बंद खाने की चीजों में इन दिनों पाम ऑयल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया है। वजह साफ है, यह तेल सस्ता पड़ता है और खाने की चीजों को लंबे समय तक खराब होने से बचाता है। यही कारण है कि कंपनियां प्रोसेस्ड फूड बनाने में इसे खुलकर इस्तेमाल कर रही हैं। लेकिन होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. रिद्धी पांडे का कहना है कि अगर ऐसी चीजें रोजाना और ज्यादा मात्रा में खाई जाएं, तो शरीर को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने लोगों को खानपान में संतुलन बनाए रखने की सलाह दी है।
सिर्फ बड़ा ब्रांड होने से भरोसा न करें
डॉ. पांडे के मुताबिक आजकल लगभग हर बड़े और नामी पैकेज्ड फूड ब्रांड में किसी न किसी रूप में पाम ऑयल मिलाया जाता है। नमकीन से लेकर चिप्स, बिस्कुट और आइसक्रीम जैसी फैटी और प्रोसेस्ड चीजों में इसका इस्तेमाल अब आम बात हो गई है। उनका कहना है कि किसी उत्पाद के बड़े ब्रांड का होने भर से यह साबित नहीं होता कि उसे रोज खाना पूरी तरह सुरक्षित है। कभी-कभार ऐसी चीजें खाने में कोई खास दिक्कत नहीं है, लेकिन इन्हें रोजमर्रा की डाइट का नियमित हिस्सा बना लेना सही नहीं माना जा सकता।
ज्यादा गर्म करने पर बढ़ जाता है खतरा
डॉक्टर ने बताया कि पाम ऑयल को जब बार-बार करीब 200 डिग्री सेल्सियस या उससे भी ज्यादा तापमान पर गर्म किया जाता है, तो उसमें कुछ खास तरह के यौगिक यानी एस्टर बनने लगते हैं। ये यौगिक शरीर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं और लगातार इनके संपर्क में रहने से सेहत से जुड़ी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि तले हुए और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाने को सीमित मात्रा में ही खाने की सलाह दी जाती है।
कोलेस्ट्रॉल पर पड़ता है सीधा असर
डॉ. पांडे ने बताया कि पाम ऑयल से बने खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन शरीर में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है। जब एलडीएल बढ़ता है, तो शरीर में फैट जमा होने लगता है और इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। वहीं दूसरी तरफ एचडीएल यानी गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहतर बनाए रखना जरूरी है। इसलिए रोजमर्रा के खानपान में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
बच्चों में भी दिख रहा है असर
डॉ. पांडे के अनुसार आजकल छोटे बच्चों में पैकेट वाले स्नैक्स, चिप्स, कुरकुरे और नमकीन खाने की आदत तेजी से बढ़ रही है। कई बार ऐसे बच्चे बार-बार बीमार पड़ते हैं या उन्हें पेट से जुड़ी दिक्कतें होती रहती हैं। जांच में कुछ मामलों में यह सामने आया है कि जरूरत से ज्यादा जंक फूड और प्रोसेस्ड चीजें खाना ही उनकी तकलीफ की एक बड़ी वजह हो सकता है। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों के खानपान पर खास ध्यान देने की जरूरत है।
देसी घी हो सकता है बेहतर विकल्प
डॉ. पांडे का कहना है कि अगर सीमित मात्रा और संतुलित डाइट के साथ खाया जाए, तो देसी घी पाम ऑयल वाले प्रोसेस्ड फूड के मुकाबले एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। बच्चों और बड़ों, दोनों के लिए तय मात्रा में देसी घी का सेवन फायदेमंद माना जाता है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी तरह की चिकनाई या वसा का जरूरत से ज्यादा सेवन सेहत के लिए ठीक नहीं है।
घर के बने खाने को दें प्राथमिकता
डॉक्टर के मुताबिक अगर कभी-कभार अच्छे ब्रांड का पैकेज्ड फूड या नमकीन खाया जाए, तो इससे बड़ी दिक्कत नहीं होती। लेकिन रोज-रोज चिप्स, नमकीन, बिस्कुट और दूसरे प्रोसेस्ड फूड खाने की आदत लंबे समय में सेहत बिगाड़ सकती है। इसलिए ताजा और घर पर बना खाना खाने को प्राथमिकता देनी चाहिए और पैकेज्ड फूड का सेवन सीमित रखना चाहिए।













