बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा कृति सेनन वर्तमान में 35 वर्ष की हो चुकी हैं। अपनी निजी जिंदगी और करियर के बारे में स्पष्ट रुख रखते हुए उन्होंने साझा किया है कि फिलहाल उनका शादी करने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, भविष्य की संभावनाओं को सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने काफी पहले ही एक महत्वपूर्ण कदम उठा लिया था। कृति सेनन ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि उन्होंने पांच साल पहले ही एग्स फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली थी। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि जो महिलाएं फिलहाल मातृत्व के लिए तैयार नहीं हैं, उनके लिए समय रहते एग्स फ्रीजिंग करवाना एक विवेकपूर्ण निर्णय है ताकि भविष्य में प्रेग्नेंसी संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके। यही कारण है कि आज के दौर में कई सेलिब्रिटीज 25 से 30 वर्ष की आयु में ही इस विकल्प को चुन रही हैं।
कृति सेनन ने अपने अनुभव से जुड़ी एक ऐसी सच्चाई भी बयां की है जिस पर विचार करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के बाद उन्हें कुछ समय तक शारीरिक परेशानियों से गुजरना पड़ा, जिसमें पेट फूलना यानी ब्लोटिंग की समस्या प्रमुख थी। उन महिलाओं के लिए जो इस प्रक्रिया पर विचार कर रही हैं, यह जानना आवश्यक है कि वास्तव में इस दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं और इनसे कैसे निपटा जाए। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए हमने बिड़ला फर्टिलिटी सेंटर की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. मुस्कान छाबड़ा से विस्तृत चर्चा की है।
10 से 12 दिनों का हार्मोनल इंजेक्शन कोर्स
डॉ. मुस्कान छाबड़ा बताती हैं कि आज के दौर में करियर की प्राथमिकताओं और मेडिकल कारणों से युवा महिलाओं के बीच एग्स फ्रीजिंग, जिसे तकनीकी भाषा में उसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन कहते हैं, काफी लोकप्रिय हो गया है। महिलाओं का शरीर एक जटिल जैविक चक्र से संचालित होता है। हर महीने मासिक धर्म की प्रक्रिया के दौरान, मस्तिष्क से गर्भाशय तक हार्मोन्स का निरंतर आवागमन होता है। पीरियड्स के बाद शरीर में ऐसे हार्मोन्स रिलीज होते हैं जो ओवरी में एक अंडा विकसित करने में मदद करते हैं। यदि यह अंडा स्पर्म के साथ फर्टिलाइज होता है, तो प्रेग्नेंसी संभव होती है, अन्यथा शरीर इसे बाहर निकाल देता है।
एग्स फ्रीजिंग के दौरान, डॉक्टर महिला को 10 से 12 दिनों तक विशेष हार्मोनल इंजेक्शन देते हैं। इन इंजेक्शनों का उद्देश्य ओवरी को प्रेरित करना होता है ताकि वे एक साथ 10 से 15 अंडे विकसित कर सकें। चूंकि यह प्रक्रिया शरीर के नेचुरल हार्मोनल संतुलन में बदलाव लाती है, इसलिए कुछ छोटी-मोटी जटिलताएं महसूस होना स्वाभाविक है। यदि यह प्रक्रिया किसी प्रशिक्षित और योग्य फर्टिलिटी एक्सपर्ट की देखरेख में की जाए, तो जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
हार्मोनल उतार-चढ़ाव और शारीरिक लक्षण
डॉ. मुस्कान छाबड़ा का कहना है कि जब इंजेक्शन के माध्यम से शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से बढ़ता है, तो यह हमारे मूड को नियंत्रित करने वाले हार्मोन्स को भी प्रभावित करता है। इस हार्मोनल असंतुलन के कारण महिलाओं को मूड स्विंग्स, अचानक गुस्सा आना, उदासी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, थकान और स्तनों में भारीपन या दर्द जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। बढ़े हुए हार्मोन्स के कारण शरीर की कोशिकाएं पानी को होल्ड करना शुरू कर देती हैं, जिससे ओवरी का आकार बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ आकार पेट के निचले हिस्से पर दबाव डालता है, जिस कारण पेट में भारीपन, गैस और ब्लोटिंग महसूस होती है। कई बार इस दौरान वजन में भी अस्थाई वृद्धि हो सकती है। हालांकि, ये लक्षण आमतौर पर प्रीमैंस्ट्रुअल सिंड्रोम की तरह ही होते हैं और काफी हल्के होते हैं।
विशेषज्ञ की भूमिका और सुरक्षा
डॉ. मुस्कान छाबड़ा जोर देकर कहती हैं कि एग्स फ्रीजिंग का अनुभव काफी हद तक आपके डॉक्टर की विशेषज्ञता पर निर्भर करता है। यदि प्रक्रिया सही ढंग से संपन्न नहीं हुई, तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं। गलत तरीके से इंजेक्शन या सर्जरी करने पर पेट में पानी भर सकता है, ओवरी का आकार जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है, या इंफेक्शन हो सकता है, जो भविष्य में प्रेग्नेंसी को मुश्किल बना सकता है। यदि सुई का उपयोग करते समय सावधानी नहीं बरती गई या स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा गया, तो ब्लीडिंग जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। अतः महिलाओं को ऐसे ही विशेषज्ञों का चुनाव करना चाहिए जिनके पास फर्टिलिटी के क्षेत्र में उच्च डिग्री और पर्याप्त अनुभव हो।
एग्स फ्रीजिंग से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल
एक बार में कितने अंडे फ्रीज किए जा सकते हैं? बिड़ला फर्टिलिटी सेंटर की एक्सपर्ट डॉ. मुस्कान छाबड़ा के अनुसार, उसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन के दौरान लक्ष्य यह होता है कि ओवरी में 10 से 15 अंडे पैदा हों। जब ये अंडे विकसित हो जाते हैं, तो एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया और सुई के माध्यम से इन्हें शरीर से निकाल लिया जाता है ताकि इन्हें फ्रीज किया जा सके।
इन अंडों का उपयोग कब तक किया जा सकता है? आमतौर पर एग्स को 10 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अंडे निकालने के बाद एम्ब्रियोलॉजिस्ट यानी भ्रूण वैज्ञानिक इन्हें क्रायोटॉप स्ट्रॉ के अंदर रखते हैं और फिर बेलनाकार कंटेनर गोब्लेट में रखकर माइनस 196 डिग्री तापमान पर स्टोर करते हैं। ध्यान रहे कि यदि यह प्रक्रिया एक बार शुरू हो जाए और कंटेनर खुल जाए, तो पूरी प्रक्रिया को उसी समय पूरा करना अनिवार्य होता है।











