बारिश का मौसम अपने साथ सुहावना तापमान तो लाता है, लेकिन साथ ही स्वास्थ्य से जुड़ी कई परेशानियां भी खड़ी कर देता है। इन्हीं में से एक आम समस्या है मानसून के दौरान कान बंद होना, उनमें भारीपन महसूस होना या फिर हल्का दर्द उठना। अक्सर लोग इन लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही भी कान के गंभीर संक्रमण को दावत दे सकती है। हवा में मौजूद अत्यधिक नमी, कान के अंदर पानी का रुक जाना, बार-बार होने वाली सर्दी-जुकाम या मौसमी एलर्जी इसके मुख्य कारण हो सकते हैं। विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और जिन्हें पहले से कान की कोई बीमारी रही है, उन्हें इस मौसम में अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
मानसून में कान बंद होने के मुख्य कारण
बारिश के दिनों में हवा में नमी का स्तर बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर हमारे कान के स्वास्थ्य पर पड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में कान का वैक्स कान की नली की रक्षा करता है, लेकिन उमस बढ़ने पर यह वैक्स नरम होकर पूरी नली में फैल सकता है, जिससे कान बंद महसूस होता है। इसके अलावा, बारिश में भीगने के दौरान अगर कान में पानी चला जाए और वह देर तक अंदर ही रहे, तो वहां फंगस या बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जो संक्रमण का बड़ा कारण बन सकते हैं।
इसके अलावा, कान, नाक और गला आपस में एक-दूसरे से जुड़े हुए होते हैं। जब हमें सर्दी-जुकाम या कोई एलर्जी होती है, तो कान और गले को जोड़ने वाली यूस्टेशियन ट्यूब में सूजन या दबाव बढ़ जाता है। इस कारण कान में भारीपन या दर्द का अनुभव होता है। यह ठीक वैसा ही दबाव है जैसा अक्सर विमान में यात्रा करते समय महसूस होता है।
कान की देखभाल कैसे करें
कानों को मानसून के दौरान सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सूखा रखना सबसे अनिवार्य है। यदि आप बारिश में भीग गए हैं या नहाते समय कान में पानी चला गया है, तो उसे तुरंत बाहर निकालने का प्रयास करें। इसके लिए सिर को थोड़ा झुकाएं और एक मुलायम तौलिये से कान के बाहरी हिस्से को धीरे से पोंछ लें। इस दौरान कान के अंदर किसी भी तरह की नुकीली वस्तु या तीली डालने की गलती कतई न करें।
बहुत से लोग कान साफ करने के लिए कॉटन बड्स का उपयोग करते हैं, जो असल में हानिकारक साबित हो सकता है। बड्स का इस्तेमाल करने से वैक्स बाहर आने के बजाय और अधिक अंदर चला जाता है, जिससे कान की नली को नुकसान भी पहुंच सकता है। यदि कान के आसपास नमी महसूस हो रही है, तो आप हेयर ड्रायर का उपयोग कर सकते हैं। इसे बहुत कम तापमान पर और एक सुरक्षित दूरी से चलाएं, लेकिन ध्यान रखें कि तेज या गर्म हवा सीधे कान के भीतर न जाए।
घरेलू सिकाई और सावधानियां
यदि आपको कान में हल्का भारीपन या मामूली दर्द हो रहा है, तो गुनगुने कपड़े से कान के बाहरी हिस्से के आसपास सिकाई करने से आराम मिल सकता है। इसके साथ ही, कुछ मिनट तक भाप लेने से कान और गले की नली पर बना दबाव कम होता है। सर्दी के कारण होने वाले बंद कान में गुनगुने पानी से गरारे करना भी काफी राहत देता है। हालांकि, किसी भी स्थिति में बिना ईएनटी विशेषज्ञ की सलाह के कान में तेल, कोई घरेलू मिश्रण या ईयर ड्रॉप्स नहीं डालने चाहिए, क्योंकि ये संक्रमण को गंभीर बना सकते हैं।
किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है
जो लोग पहले से ही कान की बीमारियों, एलर्जी या बार-बार कान में वैक्स जमने की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें मानसून के दौरान अधिक सावधान रहना चाहिए। बच्चों में कान का संक्रमण बहुत जल्दी फैलता है, इसलिए उनकी कान की तकलीफों को कभी नजरअंदाज न करें। यदि आप नियमित रूप से स्विमिंग करते हैं, तो बारिश के दिनों में कान की सफाई और उन्हें सूखा रखने को प्राथमिकता दें।
डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए
यदि कान में तेज दर्द बना हुआ है, सुनाई देना कम हो गया है, कान से पानी या पस निकल रहा है, चक्कर आ रहे हैं या साथ में बुखार है, तो घरेलू उपायों के भरोसे न बैठें। ऐसी स्थितियों में तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए ताकि सही समय पर इलाज हो सके और सुनने की क्षमता पर कोई बुरा असर न पड़े।











