अक्सर लोग ठंडा या गर्म खाने-पीने पर दांतों में होने वाली तेज झनझनाहट को एक सामान्य बात समझकर अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह लापरवाही दांतों की किसी बड़ी समस्या का शुरुआती संकेत हो सकती है। इस विषय पर बेगूसराय के प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने विस्तार से महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
डेंटिन हाइपरसेंसिटिविटी क्या है?
डॉ. अमित कुमार के अनुसार, इस तकलीफ को चिकित्सा भाषा में डेंटिन हाइपरसेंसिटिविटी कहा जाता है। अक्सर लोगों को लगता है कि यह थोड़े समय की समस्या है, लेकिन इसका मुख्य कारण दांतों में लंबे समय से जमी डेंटल कैरीज यानी दांतों की सड़न हो सकती है। जब इस सड़न का सही समय पर उपचार नहीं किया जाता है, तो यह गहराई तक पहुंच जाती है और धीरे-धीरे दांतों की नस के काफी करीब पहुंच जाती है।
ठंडा-गर्म लगने के पीछे का विज्ञान
जब दांत की बाहरी सुरक्षात्मक परत कमजोर हो जाती है या सड़न के कारण नस तक पहुंचने का रास्ता बन जाता है, तो बाहरी तापमान का असर सीधे तंत्रिकाओं पर पड़ता है। इसी वजह से ठंडा या गर्म पानी पीते ही दांतों में असहनीय दर्द या कनकनाहट महसूस होती है। यह समस्या इंगित करती है कि दांत की नसों को सुरक्षा देने वाली परत अब सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं है।
उपचार और बचाव के तरीके
इस समस्या से राहत पाने के लिए विशेषज्ञ सबसे पहले मरीज को एंटी-सेंसिटिविटी टूथपेस्ट का उपयोग करने की सलाह देते हैं। कई मामलों में नियमित और सही तरीके से इस टूथपेस्ट का प्रयोग करने से सेंसिटिविटी में काफी कमी आ जाती है। यदि कुछ दिनों के प्रयोग के बाद भी आराम नहीं मिलता है, तो बिना देरी किए किसी अनुभवी डेंटिस्ट से दांतों की जांच करवाना अत्यंत आवश्यक है। डॉक्टर यह पता लगाते हैं कि क्या सड़न बहुत गहरी है या समस्या के पीछे कोई अन्य कारण जिम्मेदार है।
गलत तरीके से ब्रश करना भी है घातक
डॉ. अमित कुमार ने यह भी चेतावनी दी है कि गलत तकनीक से ब्रश करने की आदत भी दांतों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है। यदि आप ब्रश करते समय बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं, तो दांत की डेंटिन परत घिसने लगती है। इस घिसाव के कारण दांत संवेदनशील हो जाते हैं। इन परिस्थितियों में आपको अपने नजदीकी दंत चिकित्सक के पास जाकर परामर्श लेना चाहिए, जो सरकारी अस्पतालों में भी आसानी से उपलब्ध होते हैं।











