मानसून में ये 5 चीज़ें खाईं तो पेट में मच सकती है तबाही, दो महीने के लिए बना लें दूरीस्वास्थ्य
3 घंटे पहले· 1

मानसून में ये 5 चीज़ें खाईं तो पेट में मच सकती है तबाही, दो महीने के लिए बना लें दूरी

बारिश के मौसम में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेज़ी से पनपते हैं, जिससे पाचन धीमा पड़ जाता है। जानिए कौन-सी 5 चीज़ें अगले दो महीने न खाना ही समझदारी है।

मानसून की फुहारें भले ही मन को सुकून दें, लेकिन यह मौसम पेट के लिए उतना दोस्ताना नहीं होता जितना दिखता है। हवा में नमी बढ़ते ही बैक्टीरिया और फंगस तेज़ी से पनपने लगते हैं, जिसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र की रफ्तार पर पड़ता है। अगर इस मौसम में खानपान को लेकर लापरवाही बरती जाए, तो पेट में गैस, एसिडिटी और ऐंठन इतनी बढ़ सकती है कि इसे संभालना ही मुश्किल हो जाए। यही वजह है कि अगले दो महीने डॉक्टर के चक्कर लगाने से बचना है, तो कुछ खास चीज़ों से फौरन दूरी बना लेनी चाहिए।

चाय के साथ पकौड़े-समोसे भारी पड़ सकते हैं

बारिश शुरू होते ही सबसे पहले चाय के साथ गरमागरम पकौड़े या समोसे खाने का मन करता है, लेकिन यही आदत पेट पर भारी पड़ सकती है। इस मौसम में भारी और तली-भुनी चीज़ों को पचाना शरीर के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। इनकी वजह से सीने में जलन यानी एसिड रिफ्लक्स की शिकायत हो सकती है और पेट में भारीपन महसूस होने लगता है।

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हरी पत्तेदार सब्ज़ियों से भी रहें सावधान

वैसे तो हरी पत्तेदार सब्ज़ियां सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं, लेकिन बारिश के मौसम में इनके साथ थोड़ी सावधानी बरतनी ज़रूरी है। पत्तागोभी और पालक जैसी सब्ज़ियों की परतों में इस मौसम में बैक्टीरिया तेज़ी से पनपते हैं और इनमें गंदगी या कीटाणु छिपे रह सकते हैं। इन्हें खाने से पेट का इन्फेक्शन, फूड पॉइज़निंग और पेट में तेज़ दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

सड़क किनारे के गोलगप्पे और चाट-पकौड़ी से बचें

बारिश के इस मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले गोलगप्पे का तीखा पानी और दूसरी चाट-पकौड़ी खाना काफी जोखिम भरा साबित हो सकता है। अक्सर इन्हें बिना ढके रखा जाता है, जिससे मक्खियां आसानी से बैठ जाती हैं, और इन्हें बनाने में कई बार दूषित पानी का इस्तेमाल भी हो जाता है। इसी वजह से टाइफाइड, दस्त और पेट में तेज़ मरोड़ जैसी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।

सीफूड और नॉन-वेज से दूरी ही समझदारी

बारिश का मौसम असल में मछली और दूसरे समुद्री जीवों के प्रजनन का समय होता है। इस दौरान सीफूड खाने से पेट के इन्फेक्शन का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसीलिए अगले कुछ महीनों तक नॉन-वेज, खासकर सीफूड से परहेज़ करना ही सही रहता है, ताकि पेट किसी अनजान इन्फेक्शन का शिकार न बने।

कटे हुए फल और ज़्यादा पानी वाली चीज़ों का ध्यान रखें

सड़क किनारे बिकने वाले पहले से कटे हुए फल कीटाणुओं का घर बन सकते हैं, क्योंकि इन्हें खुले में और बिना ढके रखा जाता है। इसके अलावा इस मौसम में ठंडी तासीर वाले फलों का ज़्यादा सेवन करने से पाचन बिगड़ सकता है, जिससे गैस बनने और पेट फूलने जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इसलिए बेहतर यही है कि फल हमेशा घर पर धोकर और ताज़ा काटकर ही खाए जाएं।

कुल मिलाकर, मानसून के मौसम में पेट को स्वस्थ रखना है तो तली-भुनी चीज़ों, कुछ खास पत्तेदार सब्ज़ियों, स्ट्रीट फूड, सीफूड और पहले से कटे फलों से दूरी बनाना ही सबसे आसान और असरदार तरीका है।

सवाल-जवाब

मानसून में पाचन कमजोर क्यों हो जाता है?
हवा में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और फंगस तेज़ी से पनपते हैं, जिससे शरीर का चयापचय (मेटाबॉलिज्म) धीमा पड़ जाता है।
बारिश में कौन-सी पत्तेदार सब्ज़ियों से बचना चाहिए?
पत्तागोभी और पालक जैसी सब्ज़ियों में इस मौसम में बैक्टीरिया तेज़ी से पनप सकते हैं, इसलिए इन्हें ठीक से साफ करके ही खाना चाहिए।
गोलगप्पे और चाट खाना बारिश में खतरनाक क्यों है?
इन्हें अक्सर बिना ढके बेचा जाता है, जिससे मक्खियां बैठती हैं और बनाने में दूषित पानी इस्तेमाल होने का खतरा रहता है, जिससे टाइफाइड और दस्त हो सकते हैं।
मानसून में सीफूड क्यों नहीं खाना चाहिए?
यह मछली और समुद्री जीवों के प्रजनन का समय होता है, जिससे इस दौरान सीफूड खाने पर पेट के इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
कटे हुए फल खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
सड़क किनारे बिके पहले से कटे फल कीटाणुओं का घर हो सकते हैं और ठंडी तासीर वाले फलों का ज़्यादा सेवन गैस व पेट फूलने की समस्या बढ़ा सकता है।
इन चीज़ों से कितने समय तक परहेज़ करने की सलाह दी गई है?
अगले 2 महीने तक इन चीज़ों से परहेज़ करने की सलाह दी गई है।

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