18 घंटे तक कुछ न खाकर सोनाली बेंद्रे ने पाई ऐसी फिटनेस, जानें उनका पूरा राज़स्वास्थ्य
2 घंटे पहले· 2

18 घंटे तक कुछ न खाकर सोनाली बेंद्रे ने पाई ऐसी फिटनेस, जानें उनका पूरा राज़

51 साल की सोनाली बेंद्रे ने खुलासा किया कि वह कई बार 18 से 20 घंटे तक कुछ नहीं खातीं, लेकिन उनकी फिटनेस का असली राज़ सिर्फ भूखे रहने में नहीं बल्कि पूरी अनुशासित जीवनशैली में छिपा है।

बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे उम्र के हर पड़ाव पर अपनी फिटनेस को लेकर सुर्खियों में रहती हैं और अब उन्होंने अपनी शानदार बॉडी और चमकती स्किन के पीछे का असली राज़ खोल दिया है। 51 साल की उम्र में भी उनकी एनर्जी, ग्लोइंग स्किन और फिट बॉडी देखकर लोग अक्सर हैरान रह जाते हैं और यही वजह है कि जब भी वह अपनी डाइट या रूटीन के बारे में बात करती हैं, फैंस उसे ध्यान से सुनते हैं। हाल ही में सोनाली ने खुद बताया कि वह कई बार 18 से 20 घंटे तक कुछ नहीं खातीं और अपनी पूरी दिनचर्या को बेहद अनुशासन के साथ फॉलो करती हैं। इस खुलासे के बाद उनकी हेल्दी लाइफस्टाइल एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है।

सिर्फ भूखे रहने से नहीं बनती फिटनेस

गौर करने वाली बात यह है कि सोनाली की फिटनेस का पूरा राज़ सिर्फ लंबे समय तक भूखा रहने में नहीं छिपा है। वह इस बात का पूरा ध्यान रखती हैं कि जब भी खाना खाएं, वह पौष्टिक और संतुलित हो। उनके लिए फिटनेस किसी क्रैश डाइट का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी जीवनशैली है जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत और अनुशासन से अपनाया है। शायद यही कारण है कि बढ़ती उम्र के बावजूद उनकी फिटनेस लोगों के लिए एक मिसाल बनी हुई है और कई लोग उनसे प्रेरणा लेते हैं।

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क्या होती है 18 से 20 घंटे की यह फास्टिंग

दरअसल 18 से 20 घंटे तक बिना भोजन किए रहना आमतौर पर इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक रूप माना जाता है। इस तरीके में इस बात पर ज्यादा जोर दिया जाता है कि भोजन कब किया जाए, न कि सिर्फ कितनी मात्रा में किया जाए। कुछ लोग 16:8 का पैटर्न अपनाते हैं तो कुछ 18:6 या इससे अलग समय सीमा चुनते हैं, जिसमें एक तय समय के भीतर ही भोजन किया जाता है और बाकी घंटों में शरीर को उपवास की स्थिति में रखा जाता है। हालांकि हर इंसान की शारीरिक जरूरत अलग होती है, इसलिए फास्टिंग की यह अवधि भी व्यक्ति के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग से मिल सकते हैं ये फायदे

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि अगर इंटरमिटेंट फास्टिंग को सही तरीके से अपनाया जाए तो यह वजन को नियंत्रित रखने, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है। कुछ लोगों को इस तरीके से बार-बार भूख लगने की दिक्कत भी कम महसूस होती है। इसके अलावा जब पाचन तंत्र को कुछ घंटों का आराम मिलता है, तो शरीर अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल कहीं बेहतर ढंग से कर पाता है। लेकिन यह फायदा तभी मिलता है जब फास्टिंग खत्म होने के बाद पौष्टिक और संतुलित भोजन ही लिया जाए, न कि कुछ भी उल्टा-सीधा खा लिया जाए।

यह तरीका हर किसी के लिए सही नहीं

भले ही इंटरमिटेंट फास्टिंग के फायदे गिनाए जाते हों, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि यह हर किसी के लिए उपयुक्त तरीका है। डायबिटीज के मरीजों, लो ब्लड प्रेशर से जूझ रहे लोगों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक फास्टिंग करने से बचना चाहिए। अगर शरीर को उसकी जरूरत के मुताबिक समय पर भोजन न मिले, तो कमजोरी, चक्कर आना या शरीर में पोषण की कमी जैसी दिक्कतें भी पैदा हो सकती हैं।

सिर्फ डाइट नहीं, पूरी जीवनशैली मायने रखती है

सोनाली बेंद्रे अपनी फिटनेस के लिए केवल खानपान पर निर्भर नहीं रहतीं। वह नियमित रूप से योग, हल्की एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधियों को भी अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाती हैं। इसके साथ ही पर्याप्त नींद लेना, तनाव को काबू में रखना और खुद को मानसिक रूप से सकारात्मक बनाए रखना भी उनकी हेल्दी लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा है। उनके लिए फिटनेस सिर्फ वजन घटाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का एक पूरा तरीका है।

सोनाली बेंद्रे की यह दिनचर्या साफ दिखाती है कि अनुशासन और निरंतरता का कोई विकल्प नहीं होता। हालांकि किसी भी सेलिब्रिटी की डाइट या फास्टिंग रूटीन को बिना सोचे समझे अपनाने की बजाय पहले अपनी सेहत और शरीर की जरूरत को समझना जरूरी है। किसी भी नई डाइट या इंटरमिटेंट फास्टिंग की शुरुआत डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही करनी चाहिए।

सवाल-जवाब

सोनाली बेंद्रे ने अपनी फिटनेस को लेकर क्या बताया है?
उन्होंने बताया कि वह कई बार 18 से 20 घंटे तक कुछ नहीं खातीं और अपनी दिनचर्या को अनुशासन के साथ फॉलो करती हैं।
क्या सोनाली की फिटनेस का राज़ सिर्फ भूखे रहना है?
नहीं, वह इस बात का भी ध्यान रखती हैं कि जब भी खाना खाएं, वह पौष्टिक और संतुलित हो, यह उनके लिए क्रैश डाइट नहीं बल्कि पूरी जीवनशैली है।
18 से 20 घंटे बिना खाए रहना किस तरह की फास्टिंग है?
यह आमतौर पर इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक रूप माना जाता है, जिसमें कुछ लोग 16:8 या 18:6 जैसे पैटर्न अपनाते हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग के क्या फायदे बताए गए हैं?
रिसर्च के मुताबिक यह वजन नियंत्रित रखने, इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर करने और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करने में मदद कर सकती है।
क्या इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सुरक्षित है?
नहीं, डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं या गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के बिना यह नहीं करनी चाहिए।
सोनाली बेंद्रे अपनी फिटनेस के लिए और क्या करती हैं?
वह नियमित योग, हल्की एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और मानसिक सकारात्मकता को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाती हैं।

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