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नोएडा के स्टार्टअप ने बनाया बांस का अनोखा डायपर, 150 बार धुलकर कर सकेंगे उपयोगस्वास्थ्य
1 अक्तू॰ 2026, 12:30 am (1 घंटे पहले)· 0

नोएडा के स्टार्टअप ने बनाया बांस का अनोखा डायपर, 150 बार धुलकर कर सकेंगे उपयोग

नोएडा स्थित स्टार्टअप बम्बूलॉजी ने बांस से बने दोबारा इस्तेमाल योग्य और बैक्टीरिया रोधी डायपर तैयार किए हैं, जो बच्चों के साथ बुजुर्गों के लिए भी उपयोगी हैं।

पर्यावरण संरक्षण और सेहतमंद जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए नोएडा स्थित स्टार्टअप बम्बूलॉजी ने एक खास पहल की है। कोविड महामारी के दौरान करीब चार साल पहले स्थापित हुई यह कंपनी अब बांस के रेशों से बने विशेष डायपर का उत्पादन कर रही है। यह उत्पाद पारंपरिक सिंगल-यूज डिस्पोजेबल डायपर का एक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प बनकर सामने आया है। कंपनी की संस्थापक फैहमीदा चौधरी ने प्रदूषण घटाने और सस्टेनेबल उत्पादों को आम लोगों तक पहुंचाने के लक्ष्य के साथ इस उद्यम की नींव रखी थी।

कपड़ों से लेकर पेटेंट हासिल करने तक का सफर

शुरुआती दौर में बम्बूलॉजी ने बांस के रेशों से बने कपड़ों पर काम करना शुरू किया था। इसके बाद कंपनी ने अपनी अनुसंधान प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए बांस से बने डायपर और पीरियड पैंटी के लिए पेटेंट आवेदन दाखिल किया। व्यापक परीक्षण और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद पिछले साल जून के महीने में इस उत्पाद को आधिकारिक पेटेंट प्राप्त हुआ। पेटेंट मिलने के बाद कंपनी ने इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार में वितरण की दिशा में व्यावहारिक कदम उठाए हैं।

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प्राकृतिक खूबियां और केमिकल से बचाव

बांस से तैयार इस डायपर की मुख्य पहचान इसका पूरी तरह बायो-बेस्ड और रीयूजेबल स्वरूप है। प्राकृतिक रूप से बांस के फैब्रिक में जीवाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं, जिससे बैक्टीरिया पनपने की आशंका घट जाती है और दुर्गंध पर भी नियंत्रण रहता है। सामान्य सूती कपड़े यानी कॉटन की तुलना में बांस से बने इस उत्पाद में सूक्ष्मजीवों की बढ़ोतरी काफी धीमी होती है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक डिस्पोजेबल डायपर में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक तत्वों और PFAS जैसे हानिकारक घटकों को लेकर लगातार चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं। इन्हीं स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को टालने के लिए कंपनी ने एक सुरक्षित विकल्प तैयार करने पर जोर दिया।

शिशुओं से लेकर बुजुर्गों और मरीजों तक के लिए उपयोगी

यह अभिनव डायपर केवल छोटे बच्चों तक ही सीमित नहीं है। इसे नवजात शिशुओं से लेकर लगभग दो साल तक की उम्र के बच्चों के लिए विभिन्न नापों में तैयार किया गया है। इसके साथ ही वयस्कों की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए एडल्ट साइज भी पेश किए गए हैं। बढ़ती उम्र के साथ अनैच्छिक मूत्र रिसाव या यूरिन इनकॉन्टिनेंस का सामना करने वाली महिलाओं के लिए यह काफी मददगार साबित हो सकता है। साथ ही लंबे समय से बिस्तर पर आश्रित मरीजों, बुजुर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के दैनिक उपयोग को आसान बनाने के लिए इसे उच्च अवशोषण क्षमता वाला और पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाया गया है।

साधारण धुलाई और खर्च में भारी कमी

देखभाल के लिहाज से इस डायपर को इस्तेमाल के बाद सामान्य रूप से हाथों से धोकर सुखाया जा सकता है। उत्पाद की मजबूती को इस तरह तैयार किया गया है कि एक सिंगल पीस को लगभग 150 बार तक धोकर दोबारा पहनाया जा सकता है। पुनर्चक्रण योग्य होने से परिवारों के घरेलू बजट में भी बड़ी बचत संभव है। सामान्य डिस्पोजेबल डायपर की कीमत औसतन 10 से 12 रुपये या उससे अधिक प्रति पीस बैठती है, जबकि बांस से बने इस रीयूजेबल डायपर के प्रत्येक उपयोग की वास्तविक लागत घटकर लगभग 2.5 से 3 रुपये के बीच आ जाती है।

प्लास्टिक कचरे में भारी कमी और निर्माण प्रक्रिया

प्लास्टिक जनित कचरे की समस्या से निपटना इस नवाचार का एक अहम उद्देश्य है। एक सामान्य बच्चा प्रतिदिन औसतन करीब तीन डिस्पोजेबल डायपर इस्तेमाल करता है। डेढ़ से दो साल की अवधि के दौरान यह आंकड़ा हजारों तक पहुंच जाता है, जहां लगभग दो वर्षों में एक बच्चा करीब 2,200 डायपर खत्म कर देता है। बांस के इस रीयूजेबल डायपर को अपनाकर लैंडफिल में जाने वाले कचरे की इस भारी मात्रा को बड़े स्तर पर रोका जा सकता है। पेटेंट प्राप्त इस उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कंपनी ने एक अनुबंधित निर्माण इकाई के साथ साझेदारी की है। इस व्यवस्था के तहत कंपनी स्वयं तैयार कपड़ा, भीतरी परतें, लेबल और कच्चा माल मुहैया कराती है, जबकि निर्माता इकाई मुख्य रूप से इसकी सटीक सिलाई का कार्य संभालती है।

सवाल-जवाब

बांस से बने इस डायपर का निर्माण किस कंपनी ने किया है?
इस डायपर को नोएडा स्थित स्टार्टअप बम्बूलॉजी ने तैयार किया है, जिसकी संस्थापक फैहमीदा चौधरी हैं।
एक बांस डायपर को कितनी बार इस्तेमाल किया जा सकता है?
कंपनी के अनुसार इस डायपर को साधारण हैंडवॉश के बाद करीब 150 बार तक धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस डायपर के इस्तेमाल से प्रति उपयोग कितना खर्च आता है?
जहां सामान्य डिस्पोजेबल डायपर 10 से 12 रुपये का पड़ता है, वहीं इस रीयूजेबल डायपर की प्रति उपयोग लागत लगभग 2.5 से 3 रुपये आती है।
क्या यह डायपर केवल बच्चों के लिए बनाया गया है?
नहीं, यह नवजात से लेकर दो साल तक के बच्चों के अलावा बुजुर्गों, बेडरिडन मरीजों और इनकॉन्टिनेंस से पीड़ित महिलाओं के लिए एडल्ट साइज में भी उपलब्ध है।
बांस के फैब्रिक में ऐसी क्या खासियत है जो इसे सुरक्षित बनाती है?
बांस के रेशों में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो जीवाणुओं की वृद्धि और दुर्गंध को रोकते हैं, साथ ही यह PFAS जैसे केमिकल्स से मुक्त है।
दो साल में एक बच्चा औसतन कितने डिस्पोजेबल डायपर का कचरा पैदा करता है?
एक औसत बच्चा रोजाना लगभग तीन डायपर का उपयोग करता है, जिससे लगभग दो साल में करीब 2,200 डायपर का कचरा जमा हो जाता है।
कंपनी को इस उत्पाद के लिए पेटेंट कब मिला?
कंपनी के अनुसार इस बांस आधारित डायपर और पीरियड पैंटी के डिजाइन को पिछले साल जून में पेटेंट प्राप्त हुआ था।
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