मौसम के बदलते ही फ्लू और मौसमी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल ने स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए अपनी सभी प्रशासनिक और चिकित्सीय तैयारियां पूरी कर ली हैं। अस्पताल में संभावित रोगियों के त्वरित उपचार और रोकथाम के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा संदिग्ध रोगियों की पहचान, रक्त व स्वाब के नमूने एकत्र करने, जांच प्रक्रिया और समुचित इलाज को लेकर अस्पताल के सभी चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मचारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
द्वितीय तल पर विशेष आइसोलेशन वार्ड की स्थापना
संक्रमण के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल के आईपीडी ब्लॉक की दूसरी मंजिल पर एक समर्पित स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। यदि कोई मरीज अस्पताल में ऐसे लक्षणों के साथ पहुंचता है जो स्वाइन फ्लू की ओर इशारा करते हैं, तो डॉक्टरों की टीम उसकी गहन चिकित्सकीय जांच करेगी। स्थिति की गंभीरता और जांच रिपोर्ट की आवश्यकता के आधार पर मरीज को तत्काल अन्य सामान्य रोगियों से अलग करते हुए इस विशेष वार्ड में भर्ती किया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अस्पताल परिसर के भीतर अन्य लोगों और स्वास्थ्य कर्मियों में संक्रमण फैलने की किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करना है।
रोजाना 1500 से 1800 मरीजों की ओपीडी में विशेष सतर्कता
इस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना लगभग 1500 से 1800 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इतनी बड़ी संख्या में आने वाले मरीजों के बीच फ्लू जैसे लक्षणों वाले रोगियों की शुरुआती चरण में ही पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने सभी चिकित्सकों को निर्देश दिया है कि जो मरीज तेज खांसी, जुकाम, तेज बुखार, गले में दर्द या खराश जैसे लक्षणों की शिकायत लेकर आएं, उनकी जांच में अत्यधिक सतर्कता बरती जाए। यदि किसी मरीज में लक्षण अधिक गंभीर या संदिग्ध प्रतीत होते हैं, तो बिना किसी देरी के उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाना अनिवार्य किया गया है।
24 घंटे डॉक्टरों की ड्यूटी और डीआईपीएचएल लैब में जांच सुविधा
अस्पताल के डॉक्टर विनय ने जानकारी दी कि राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की सभी हिदायतों का अस्पताल परिसर में कड़ाई से पालन किया जा रहा है। अस्पताल में आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध करा दिया गया है ताकि मरीजों को इलाज के दौरान किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, डीआईपीएचएल लैब में स्वाइन फ्लू संबंधी नमूनों की जांच के लिए सभी जरूरी टेस्ट किट उपलब्ध करा दी गई हैं। किसी भी समय संदिग्ध मरीज के सामने आने पर उसका सैंपल तुरंत लेकर लैब में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे बीमारी की सटीक स्थिति स्पष्ट हो सके और सही समय पर लक्षित इलाज शुरू किया जा सके।
किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा 24 घंटे और सातों दिन के आधार पर डॉक्टरों तथा फिजिशियनों की रोस्टर ड्यूटी लगाई गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि दिन हो या देर रात, मरीज किसी भी समय अस्पताल पहुंचेगा तो उसे तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख और त्वरित जांच सुविधा उपलब्ध होगी।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण और चिकित्सीय सलाह
डॉक्टर विनय ने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखने पर घबराने या पैनिक होने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार बना हुआ है या खांसी व गले में दर्द की समस्या बनी हुई है, तो उसे अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से दवा खरीदकर खाने यानी खुद से इलाज करने से बचना चाहिए। समय पर डॉक्टर की सलाह लेने और जांच कराने से बीमारी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार के साथ अचानक ठंड लगना, सूखी या बलगम वाली खांसी, गले में खराश या तेज दर्द, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन व दर्द, तथा अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और थकावट शामिल हैं। इसके अलावा, मरीज को लगातार छींक आने, नाक बंद रहने या पानी बहने, सांस लेने में तकलीफ होने और कुछ मामलों में उल्टी या दस्त जैसी पेट की समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं।
संक्रमण से बचाव के आसान और असरदार तरीके
स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए नागरिकों हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए अपने हाथों को साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोना चाहिए। यदि साबुन उपलब्ध न हो, तो अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग करें। खांसते या छींकते समय हमेशा टिश्यू पेपर या साफ रुमाल से अपने मुंह और नाक को ढकें। इसके साथ ही, बिना हाथ धोए अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचना अत्यंत आवश्यक है। भीड़भाड़ वाले इलाकों या सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय मास्क का प्रयोग करने से संक्रमण की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क जांच से मरीजों को बड़ी राहत
स्वास्थ्य विभाग की इस त्वरित तैयारी से आम जनता को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर मरीजों को महंगे निजी जांच केंद्रों या निजी अस्पतालों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर द्वारा प्राथमिक जांच के बाद जरूरत पड़ने पर मरीज का सैंपल नि:शुल्क लिया जाएगा और इन-हाउस प्रयोगशाला में उसकी जांच की जाएगी। इससे न केवल समय पर सही उपचार शुरू हो सकेगा, बल्कि मरीजों को निजी चिकित्सा संस्थानों में होने वाले भारी-भरकम खर्चों से भी मुक्ति मिलेगी।



















