भारत में मधुमेह यानी डायबिटीज एक तेजी से पैर पसारती हुई स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। यह समस्या खासकर चालीस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सबसे अधिक नजर आती है, हालांकि अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस स्थिति को काबू में रखने के लिए लोग अक्सर महंगी अंग्रेजी दवाओं का सहारा लेते हैं।
इन दवाओं का सेवन फौरन शरीर में शुगर की मात्रा घटाकर डायबिटीज के स्तर को संभाल तो लेता है, लेकिन लंबे वक्त तक इनका इस्तेमाल करने से शरीर पर कई तरह के साइड इफेक्ट्स और विपरीत असर पड़ने लगते हैं। डायबिटीज एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है जो रक्त में ग्लूकोज यानी शुगर के स्तर को असामान्य रूप से बढ़ा देती है।
यदि समय रहते इसे नियंत्रित करने के आवश्यक कदम न उठाए जाएं, तो यह शरीर में कई अन्य गंभीर बीमारियों को भी आमंत्रित कर सकती है और खासतौर पर किडनी की कार्यप्रणाली को भारी नुकसान पहुंचाती है। यही वजह है कि मरीज शुरुआत में ही ब्लड शुगर को साधने के लिए नियमित रूप से दवाइयां खाना शुरू कर देते हैं।
लेकिन शरीर में डायबिटीज के स्तर को संभालने के लिए सबसे असरदार और बिना किसी साइड इफेक्ट वाला जरिया प्राकृतिक उपचार है जिसे बेहद सुरक्षित माना जाता है। शरीर में शुगर को नियंत्रित करने के लिए जड़ी-बूटियों का उपयोग सबसे ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है और आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर बिना किसी नुकसान के सेहत को सुधारा जा सकता है।
हमारे आस-पास और घरों के आसपास कई ऐसे पेड़-पौधे मौजूद होते हैं जिनकी पत्तियां डायबिटीज को काबू करने में अत्यंत उपयोगी मानी जाती हैं। इन्हीं में से एक पौधा अमरूद का है, जिसका फल खाने में जितना स्वादिष्ट होता है, उतनी ही गुणकारी इसकी पत्तियां भी होती हैं जो तमाम औषधीय गुणों से भरी होती हैं।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. आशीष गुप्ता का कहना है कि नियमित तौर पर अमरूद की कोमल पत्तियों का सेवन करने से खून में मौजूद ग्लूकोज के स्तर को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। यह प्राकृतिक रूप से शरीर में इंसुलिन के स्तर को संतुलित रखती है जिससे ब्लड शुगर काबू में रहता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस घरेलू नुस्खे को आजमाना बहुत ही आसान है।
डायबिटीज की समस्या से परेशान मरीज रोजाना सुबह के समय खाली पेट अमरूद की दो से तीन नर्म पत्तियों का सेवन कर सकते हैं। इन पत्तियों को खाने से पहले अच्छी तरह साफ पानी से धोना बेहद जरूरी होता है, जिसके बाद इन्हें सीधे चबाया जा सकता है। इसके अलावा, यदि कोई चाहे तो इन पत्तियों को पानी में उबालकर और छानकर एक असरदार हर्बल काढ़े के रूप में भी पी सकता है।
अमरूद की पत्तियों में प्रचुर मात्रा में डाइटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो सेहत के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। उच्च मात्रा में मौजूद फाइबर पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है जिससे पेट का डाइजेशन बेहतर रहता है और बेहतर डाइजेशन होने की वजह से शरीर में शुगर का स्तर भी ठीक तरह से मेंटेन रहता है।
इन पत्तियों में विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाई जाती है। नियमित रूप से अमरूद की पत्तियों का उपयोग करने से शरीर में विटामिन सी की कमी पूरी होती है जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत होती है। इम्यूनिटी मजबूत होने से मधुमेह के बुरे प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है और शरीर कई प्रकार के संक्रामक रोगों से सुरक्षित रहता है。


















