देवघर में बारिश शुरू होते ही चरने वाले पशुओं पर मंडराया जहरीली घास का खतराझारखंड
1 दिन पहले· 3

देवघर में बारिश शुरू होते ही चरने वाले पशुओं पर मंडराया जहरीली घास का खतरा

बारिश के मौसम में खेतों और सड़क किनारे तेजी से उगने वाली पार्थेनियम, नरकुल और मदार जैसी जहरीली घास गाय-भैंसों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, देवघर की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

मानसून की पहली बारिश के साथ ही खेतों, सड़क किनारे और खाली पड़ी जमीन पर हरियाली फैलने लगती है और यही वह समय होता है जब झारखंड के देवघर जैसे इलाकों में पशुपालक अपने गाय-भैंसों को खुले मैदानों में चरने के लिए छोड़ देते हैं। मकसद सीधा होता है, जानवरों को आसानी से हरा चारा मिल जाए, लेकिन पशु चिकित्सकों का कहना है कि यही आम आदत कई बार जानलेवा साबित हो जाती है। वजह यह है कि बारिश के मौसम में उगने वाला हर हरा पौधा पशुओं के खाने लायक नहीं होता। इसी दौरान कई जहरीले खरपतवार तेजी से पनपते हैं और अगर दुधारू पशु गलती से इन्हें खा लें तो वे गंभीर रूप से बीमार पड़ सकते हैं, उनका दूध उत्पादन घट सकता है और कुछ मामलों में उनकी जान तक को खतरा पैदा हो सकता है।

कांग्रेस घास से पशुओं को सबसे ज्यादा खतरा

देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन के मुताबिक, बारिश के दिनों में पशुपालकों को अपने जानवरों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। अगर पशु खुले में चर रहे हैं तो यह जरूर देखा जाना चाहिए कि वे किस तरह के पौधे और घास खा रहे हैं, क्योंकि हरी घास के साथ-साथ जहरीले खरपतवार भी पशुओं के मुंह में चले जाते हैं और इसका असर तुरंत नजर नहीं आता। डॉ. सोरेन बताती हैं कि कई बार बीमारी के लक्षण खाने के कुछ घंटों बाद ही सामने आते हैं, इसलिए पहले से सतर्क रहना ही सबसे कारगर बचाव है। उनके अनुसार सबसे खतरनाक खरपतवारों में पार्थेनियम का नाम सबसे ऊपर आता है, जिसे आमतौर पर कांग्रेस घास के नाम से जाना जाता है। यह घास खेतों, सड़क किनारे और खाली पड़ी जमीन पर बड़ी आसानी से उग आती है। अगर गाय या भैंस इसे खा लें तो उनकी त्वचा, पाचन तंत्र और शरीर के भीतरी अंग सीधे प्रभावित होते हैं। लंबे समय तक इस घास के संपर्क में रहने या इसे खाते रहने से पशु धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगता है और साथ ही उसकी दूध देने की क्षमता में भी गिरावट आ जाती है।

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तालाब किनारे का नरकुल और मदार का दूधिया जहर

बरसात के मौसम में सिर्फ खेत ही नहीं, तालाब किनारे, पानी से भरे इलाके और दलदली जमीन पर उगने वाला नरकुल खरपतवार भी पशुओं के लिए कम खतरनाक नहीं है। डॉ. सोरेन के मुताबिक अगर गाय-भैंस इसे अधिक मात्रा में खा लें तो उन्हें अपच, पेट फूलने और शरीर में जहरीले प्रभाव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। यही वजह है कि तालाब किनारे या दलदली इलाकों में पशुओं को चराने से पहले वहां उगी घास और पौधों की सही पहचान कर लेना बेहद जरूरी माना जाता है। इसके अलावा मदार का पौधा भी पशुओं के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आता है। जब इस पौधे की टहनी या पत्ती तोड़ी जाती है तो उसमें से दूध जैसा सफेद और जहरीला तरल पदार्थ रिसने लगता है। अगर यह पौधा किसी तरह पशु के पेट में चला जाए तो उसे दस्त, बुखार, कमजोरी और बेचैनी जैसी परेशानियां घेर सकती हैं। डॉ. सोरेन का कहना है कि कई बार स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि पशु को तुरंत इलाज की जरूरत पड़ जाती है।

पशु बीमार दिखे तो पहला कदम क्या हो

अगर कोई पशु गलती से जहरीली घास या पौधा खा लेता है और उसमें अपच, सुस्ती, पेट फूलना या इसी तरह के अन्य लक्षण दिखने लगें, तो पशुपालकों को बिल्कुल भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। डॉ. पूनम सोरेन के अनुसार शुरुआती अवस्था में सबसे पहले पशु को भरपूर मात्रा में साफ पानी पिलाना चाहिए। घरेलू उपाय के तौर पर इमली का पानी भी दिया जा सकता है, जिससे कई बार पशु को उल्टी हो जाती है और शरीर के भीतर पहुंचा जहरीला पदार्थ बाहर निकलने में मदद मिलती है। हालांकि डॉ. सोरेन साफ करती हैं कि यह सिर्फ प्राथमिक उपचार है और इसे अंतिम इलाज नहीं समझा जाना चाहिए। अगर पशु की हालत गंभीर नजर आए या लक्षण लगातार बने रहें, तो बिना देर किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि समय पर मिला इलाज ही पशु की जान बचा सकता है और आगे होने वाले गंभीर नुकसान को रोक सकता है।

सवाल-जवाब

पशुओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक कौन सी घास है?
डॉ. पूनम सोरेन के मुताबिक पार्थेनियम, जिसे कांग्रेस घास भी कहा जाता है, पशुओं के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक खरपतवार है।
पार्थेनियम घास खाने से पशु पर क्या असर पड़ता है?
इससे पशु की त्वचा, पाचन तंत्र और शरीर के भीतरी अंग प्रभावित होते हैं, पशु धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है और उसकी दूध देने की क्षमता घट जाती है।
नरकुल घास किन जगहों पर उगती है और यह कितनी खतरनाक है?
नरकुल तालाब किनारे, पानी भरे इलाकों और दलदली जमीन पर उगता है, और इसे ज्यादा मात्रा में खाने से गाय-भैंसों को अपच, पेट फूलना और जहरीले प्रभाव की समस्या हो सकती है।
मदार का पौधा पशुओं के लिए क्यों खतरनाक है?
मदार की टहनी या पत्ती तोड़ने पर दूध जैसा सफेद जहरीला तरल निकलता है, जो पशु के पेट में चले जाने पर दस्त, बुखार, कमजोरी और बेचैनी पैदा कर सकता है।
अगर पशु ने गलती से जहरीली घास खा ली हो तो पहला उपाय क्या है?
डॉ. सोरेन के अनुसार पशु को पहले भरपूर साफ पानी पिलाना चाहिए और घरेलू उपाय के तौर पर इमली का पानी दिया जा सकता है, जिससे उल्टी होकर जहर बाहर निकल सकता है।
यह सलाह किसने दी है?
यह सलाह देवघर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की पशु चिकित्सक डॉ. पूनम सोरेन ने दी है।
पशु की हालत गंभीर दिखे तो क्या करना चाहिए?
लक्षण गंभीर या लगातार बने रहने पर बिना देर किए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, ताकि समय पर इलाज मिल सके।
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