बाड़मेर जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बिशाला के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ स्कूल परिसर में पिछले एक महीने से भी अधिक समय से लोहे का एक टूटा हुआ भारी-भरकम टीन शेड हवा में लटका हुआ है। यह जर्जर ढांचा किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकता है, लेकिन नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी प्रशासन ने इसे हटाने या ठीक करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
जून की आंधी में उखड़ा था शेड का हिस्सा
स्कूल के प्रधानाचार्य जेपी शारदा ने बताया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान, 1 जून को क्षेत्र में आए एक भीषण रेतीले तूफान की वजह से इस मजबूत लोहे के टीन शेड का एक हिस्सा उखड़कर जमीन पर गिर गया था। हालांकि, इस शेड का दूसरा बड़ा हिस्सा अभी भी हवा में अधर में लटका हुआ है। वर्तमान में मानसून का मौसम चल रहा है और जब भी तेज हवाएं चलती हैं, तो हवा में झूलता हुआ यह भारी हिस्सा तेजी से हिलने लगता है। इसके कारण इसके कभी भी नीचे गिरने का डर बना रहता है, जिससे स्कूल में मौजूद बच्चों को गंभीर चोटें आ सकती हैं।
सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा दांव पर
इस विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों की संख्या काफी अधिक है। वर्तमान सत्र में यहाँ कुल 304 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें 200 छात्र और 104 परीक्षाएं देने वाली छात्राएं शामिल हैं। जब मध्यांतर का समय होता है, तो बच्चे खेलते-खेलते अनजाने में इस खतरनाक और लटके हुए ढांचे के पास चले जाते हैं। बच्चों को इस जानलेवा खतरे के इतने करीब देखकर स्कूल के शिक्षकों और विद्यार्थियों के अभिभावकों की सांसें अटकी रहती हैं। इस टीन शेड का निर्माण वर्ष 2019-20 में तत्कालीन सरपंच लीला देवी द्वारा करवाया गया था, जिसकी लागत लगभग 3 लाख 29 हजार रुपये आई थी। इतने बड़े खर्च से बने इस ढांचे की यह दुर्दशा अब बच्चों के जीवन के लिए बड़ा खतरा बन गई है।
सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, लेकिन बिशाला का यह विद्यालय बुनियादी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की कहानी बयां कर रहा है। लंच के दौरान जब सैकड़ों बच्चे खुले मैदान में दौड़ते-भागते हैं, तब इस जर्जर टीन शेड के पास जाने का जोखिम बहुत अधिक बढ़ जाता है। अभिभावकों का कहना है कि वे हर रोज अपने बच्चों को भारी मन से स्कूल भेजते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं हवा में लटकती यह भारी लोहे की चादर उनके बच्चों पर न गिर जाए।
मरम्मत का मिला आश्वासन, पर सुस्ती से स्थानीय लोग नाराज
सुरक्षा चिंताओं पर बात करते हुए प्रधानाचार्य जेपी शारदा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को इस क्षतिग्रस्त हिस्से से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। स्कूल प्रशासन लगातार बच्चों को इस खतरे के पास जाने से रोक रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विद्यालय के स्टाफ और वर्तमान सरपंच के सहयोग से बहुत जल्द इस टीन शेड की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि पूरा एक महीना बीत जाने के बाद भी मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी व्यवस्था में आपदा प्रबंधन और तत्परता की भारी कमी है। जून की शुरुआत में हुए इस नुकसान को जुलाई का महीना बीतने के बाद भी दुरुस्त नहीं किया जा सका है। ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर बरती जा रही यह सुस्ती किसी गंभीर दुर्घटना को निमंत्रण दे रही है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग किसी हादसे के होने का इंतजार करता है या समय रहते इस लटके हुए मौत के साये को वहां से हटाता है।











