देश भर में नींबू और अमरूद के साथ सबसे ज्यादा आम के पेड़ लगाए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में मानसून के बाद आम के पौधे खुद-ब-खुद उग आते हैं, जबकि कई लोग गुठली से भी पौधे तैयार करते हैं। हालांकि देसी किस्मों में फल आने में पांच से सात साल का लंबा समय लग जाता है, इसलिए हमेशा ग्राफ्टेड पौधे लगाना बेहतर माना जाता है। यदि आपने गमले में आम का पौधा लगाया है, तो अक्टूबर के महीने में इसकी विशेष देखभाल की जरूरत होती है। इस दौरान सही मात्रा में खाद और पानी देना बेहद आवश्यक है। अक्टूबर का महीना ग्राफ्टेड पौधा लगाने के लिए भी एकदम उपयुक्त होता है। आप नर्सरी से पांच से छह महीने पुराना पौधा लाकर लगा सकते हैं।
नर्सरी से पौधा खरीदते समय हमेशा बारहमासी किस्मों का ही चयन करें। बारहमासी आम की वैरायटी में कटिमॉन, बाड़ी-11, कानभोग और सुरंगाना प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये खास किस्में साल भर में दो से तीन बार तक फल देती हैं और इन्हें गमलों में बहुत आसानी से उगाया जा सकता है। बस इसके लिए कुछ जरूरी बातों का खास ख्याल रखना पड़ता है। यदि आप चाहते हैं कि आने वाले गर्मियों के सीजन में आपके गमले में लगे पौधे पर बंपर फ्रूटिंग हो, तो अभी से उसे पोषक तत्वों से भरपूर खाद देनी शुरू कर दें। इससे नई शाखाओं का विकास होगा और जितनी ज्यादा शाखाएं आएंगी, उतना ही अधिक बौर यानी फूल खिलेगा और फल भी उतने ही ज्यादा लगेंगे।
सबसे पहले गमले की मिट्टी की अच्छी तरह से गुड़ाई कर लें। इसके बाद उसमें करीब 300 ग्राम पुरानी गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट डालें। इसके साथ ही अच्छी क्वालिटी का प्रोम यानी प्लांट ग्रोथ प्रमोटर और दो चम्मच सीविड का इस्तेमाल करें। सीविड आप किसी भी अच्छी कंपनी का ले सकते हैं, जिसमें धनजाइम या सागरिका भी शामिल हैं। इन तीनों तरह की खादों को आपस में मिलाने के बाद गमले की मिट्टी में अच्छी तरह से मिक्स कर दें और अंत में पौधे में भरपूर पानी डाल दें। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीनों में पौधे को जितनी बेहतरीन खाद मिलेगी, उसकी ग्रोथ उतनी ही तेजी से होगी। इन तीन महीनों के दौरान पौधा पत्तियों में कार्बन का स्टोरेज कर लेता है, जिससे सर्दियों के मौसम में प्राकृतिक रूप से फूलों के हार्मोन्स बनते हैं।
अक्टूबर के महीने में पौधे की सभी सूखी, सड़ी-गली या खराब शाखाओं और पत्तियों को छांटकर बाहर निकाल दें। जिन-जिन जगहों से डालियों को काटा जाए, वहां पर फंगस या फफूंद लगने से बचाने के लिए हल्दी का लेप जरूर लगाएं। अगर पौधा एक या दो साल पुराना है, तो उसे पांच किलो तक सड़ी हुई गोबर की खाद दी जा सकती है। अक्टूबर के समय में ह्यूमिक एसिड का उपयोग भी किया जा सकता है, खासकर तब जब पौधे को पहले कोई खाद न दी गई हो। लगभग दो ग्राम ह्यूमिक एसिड को एक लीटर पानी में घोलकर महीने में एक बार पौधे की जड़ों के पास की मिट्टी में डालने से जड़ों का विकास तेजी से होता है और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। यदि पौधा बारहमासी है, तो उसे हर महीने खाद दी जा सकती है।
यदि आपका पौधा बारहमासी नहीं है, तो नवंबर और दिसंबर के महीनों में उसकी खास देखभाल करनी पड़ती है। सर्दियों के इन दो महीनों में पौधे में किसी भी प्रकार की खाद नहीं डालनी चाहिए। पानी देते समय भी पूरी सावधानी बरतें और केवल तभी पानी दें जब गमले की मिट्टी की ऊपरी परत पूरी तरह सूखी हुई नजर आए। नवंबर और दिसंबर के दौरान आम का पौधा डोरमेंसी यानी सुप्त अवस्था में चला जाता है, इसलिए उसे ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है। इस अवधि में मल्चिंग करना भी फायदेमंद रहता है, जिसके लिए गमले में सूखा भूसा डाला जा सकता है ताकि पौधे को सर्दियों में जरूरी गर्माहट मिलती रहे।
जनवरी के महीने में जब पौधे में फूल आने की शुरुआत हो, तो उसे दोबारा खाद दें। इस समय ओस गिरने के कारण बौर पर कीटों का खतरा काफी बढ़ जाता है। कीटों के प्रकोप से बचाव के लिए नीम ऑयल और शैंपू के मिश्रण का स्प्रे किया जा सकता है। आम के पौधे के लिए कम से कम बीस इंच का गमला या ग्रो बैग का इस्तेमाल करना उचित रहता है। पौधे को जनवरी और फरवरी के बाद हर बीस से पच्चीस दिन के अंतराल पर कोई न कोई पोषक खाद जरूर देते रहें। खाद देने से दो-तीन दिन पहले पौधे में पानी देना पूरी तरह बंद कर दें। पहले मिट्टी की गुड़ाई करें और उसके बाद ही खाद डालें। फरवरी और मार्च के दौरान फ्रूटिंग मिक्स खाद भी डाली जा सकती है, जिसमें आयरन, जिंक, फॉस्फोरस, कैल्शियम और पोटाश प्रचुर मात्रा में होते हैं।
पौधे में ज्यादा से ज्यादा फूल और फल प्राप्त करने के लिए फिटकरी को पानी में घोलकर भी डाला जा सकता है, जिससे बौर झड़ने की समस्या से राहत मिलती है। इसके अलावा, नीला थोथा यानी कॉपर सल्फेट को चूने के साथ घोलकर गमले में डाला जा सकता है। सर्दियों के दिनों में सरसों की खली को पानी में भिगोकर देने से भी बौर और फूलों की संख्या में भारी इजाफा होता है। यदि आप अगले चार महीनों तक पौधे की इसी प्रकार सही देखभाल करेंगे, तो आने वाली गर्मियों में आपको खाने के लिए ढेरों मीठे और रसीले आम मिलेंगे।















