बाजार से खरीदकर लाए गए कच्चे सीताफल या शरीफा को लेकर यदि आप भी उसे पकाने के तौर-तरीकों को लेकर असमंजस में हैं, तो अब आपको बिल्कुल भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। बुरहानपुर के स्थानीय बाजारों में मिलने वाले इन फलों को घर पर ही बेहद आसान देसी और प्राकृतिक विधियों के जरिए पूरी तरह पकाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी भी तरह की महंगी सामग्री या फिर किसी विशेष व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। आपके अपने घर में ही आसानी से मिल जाने वाले कागज बारदान या फिर सूखे अनाज की सहायता लेकर सीताफल को पकाने का पारंपरिक तरीका अपनाया जा सकता है। मौसम की स्थिति, तापमान और फल की मौजूदा अवस्था के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में लगभग दो से तीन दिन का समय लग जाता है।
गोपाल महाजन की सलाह और सीताफल की खासियत
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर शहर के फल विक्रेता गोपाल महाजन ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी साझा करते हुए बताया है कि सीताफल एक बेहद लोकप्रिय मौसमी फल है, जिसे लोग इसके अनोखे मीठे स्वाद और इसके बेहद मुलायम गूदे के कारण बहुत चाव से पसंद करते हैं। हालांकि कई बार बाजार से खरीदारी करते वक्त अनजाने में कच्चे या फिर अधपके सीताफल भी हमारे हाथ लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर हड़बड़ाहट में आकर फलों को जल्दी पकाने के लिए तमाम तरह के अलग-अलग नुस्खे आजमाने लगते हैं। यदि आप घर पर ही फलों को सही तरीके से संभलकर रखते हैं, तो वे धीरे-धीरे अपने आप पक जाते हैं और आप आसानी से कृत्रिम रसायनों या कार्बाइड के हानिकारक इस्तेमाल से बच सकते हैं।
कागज बारदान में लपेटकर रखने का पारंपरिक तरीका
घर पर कच्चे सीताफल को पूरी तरह पकाने के लिए सबसे पहले बाजार से लाए गए सभी फलों को बहुत ही ध्यानपूर्वक देखना चाहिए। जो फल बिल्कुल साफ-सुथरे हों और जिन पर किसी भी प्रकार की सड़न के निशान न हों, उन्हें उठाकर किसी साफ और सूखे कागज में बहुत ही हल्के हाथों से लपेटकर रख देना चाहिए। इसके पश्चात इन लिपटे हुए फलों को किसी ऐसी सुरक्षित जगह पर रखना बेहद जरूरी है जहां पर जरा भी नमी न हो और हवा का आवागमन लगातार बना रहे। ध्यान रखें कि फलों को आपस में बहुत अधिक कसकर दबाकर या फिर एक-दूसरे के ऊपर भारी वजन लादकर बिल्कुल न रखें। रोजाना नियमित रूप से उनकी स्थिति की जांच करते रहना चाहिए। जब फल हाथों से छूने पर थोड़े नरम महसूस होने लगें और उनमें प्राकृतिक रूप से पकने के स्पष्ट संकेत दिखाई देने लगें, तो आप समझ सकते हैं कि वे खाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं।
सूखे अनाज का उपयोग और अन्य जरूरी सावधानियां
हमारे देश के कुछ परिवारों और घरों में कच्चे फलों को पकाने के लिए उन्हें सूखे अनाज के बीचों-बीच दबाकर रखने की पुरानी परंपरा भी आज तक चली आ रही है। हालांकि इस खास तरीके को अपनाते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है कि अनाज और फल दोनों की साफ-सफाई पूरी तरह से बरकरार रहे। इसके अलावा कच्चे फल को किसी भी बंद, अत्यधिक गीली या फिर बहुत अधिक गर्म जगह पर रखने से हमेशा बचना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से उन पर फफूंद लगने और फल के पूरी तरह से खराब होने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। फलों को अपनी इच्छा से बहुत जल्दी पकाने के चक्कर में कभी भी कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक और हानिकारक पदार्थों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इस प्रकार के तमाम रासायनिक पदार्थों के अवशेष इंसानी स्वास्थ्य के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर देखा जाए तो घर पर सीताफल को पूरी तरह प्राकृतिक रूप से पकाना एक बहुत ही सरल और सुरक्षित विकल्प है। यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए कि फल को पूरी तरह पकने में अनुमानित तौर पर दो से तीन दिन का समय लग सकता है, जो कि फल की परिपक्वता और आसपास के तापमान के मुताबिक थोड़ा कम या ज्यादा भी हो सकता है।












