घर के बजट को प्रभावित करने वाली छोटी-छोटी बातों में से एक बाथरूम में साबुन का जल्दी खत्म होना भी है। अक्सर देखा जाता है कि नया साबुन इस्तेमाल में आने के महज दो से तीन दिनों के भीतर ही पानी के संपर्क में आकर गलने लगता है। साबुन का यह पेस्ट जैसा बनकर बह जाना न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि बार-बार नया साबुन खरीदने की झंझट भी पैदा करता है। यदि आप भी रोजमर्रा की इस समस्या से परेशान हैं, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। दैनिक दिनचर्या और रख-रखाव में मामूली बदलाव करके आप अपने साबुन की उम्र दोगुनी से भी अधिक बढ़ा सकते हैं।
जल निकासी वाली सही साबुनदानी का चुनाव करें
साबुन के समय से पहले गलकर खत्म होने के पीछे सबसे मुख्य कारण गलत सोप डिश या साबुनदानी का चयन होता है। बाजार में कई ऐसी साबुनदानियां मिलती हैं जिनका पेंदा समतल और बंद होता है, जिससे नहाने के बाद बचा हुआ पानी उसी में जमा रह जाता है। जब साबुन घंटों तक इस रुके हुए पानी में डूबा रहता है, तो उसकी निचली सतह गलकर तरल बन जाती है। इस परेशानी से बचने के लिए हमेशा ऐसी साबुनदानी इस्तेमाल करें जिसमें नीचे छेद बने हों या फिर जालीदार डिजाइन हो। इससे अतिरिक्त पानी तुरंत बाहर निकल जाता है और साबुन हवा के संपर्क में आकर तेजी से सूख जाता है।
साबुन को इस्तेमाल से पहले छोटे हिस्सों में काटें
जब आप एक बड़े साबुन के पूरे बार को सीधे इस्तेमाल के लिए बाथरूम में रखते हैं, तो हर बार नहाते समय उसकी पूरी सतह पानी और नमी के संपर्क में आती है। इसके चलते पूरा साबुन एक साथ नरम पड़ने लगता है और तेजी से घिसता है। एक बेहद कारगर उपाय यह है कि नए साबुन की टिकिया को पैक से निकालते ही चाकू की मदद से दो या तीन बराबर टुकड़ों में काट लें। केवल एक ही टुकड़े को बाथरूम में इस्तेमाल के लिए रखें और बाकी हिस्सों को किसी सूखी जगह पर सुरक्षित रख दें। ऐसा करने से बाकी का साबुन नमी से बचा रहेगा और आपका एक साबुन हफ्ते के बजाय पूरे महीने तक आसानी से चलेगा।
लूफा या स्पंज की मदद से भरपूर झाग बनाएं
साबुन को सीधे शरीर या त्वचा पर घिसने से उसकी खपत बहुत अधिक होती है। त्वचा की सतह से घर्षण और नहाने के पानी के सीधे बहाव के कारण साबुन की बड़ी मात्रा बिना किसी इस्तेमाल के ही बह जाती है। इसकी जगह नहाते समय किसी स्पंज, लूफा या सूती कपड़े का प्रयोग करना एक समझदारी भरा फैसला है। साबुन को लूफा या स्पंज पर हल्का सा 2 से 3 बार रगड़ें और फिर उससे झाग बनाएं। इससे बहुत कम साबुन में ही पर्याप्त झाग बन जाता है, जिससे सफाई भी बेहतर होती है और साबुन का एक बार बहुत लंबे समय तक टिका रहता है।
बचे हुए छोटे टुकड़ों को फेंके नहीं, नए साबुन से चिपकाएं
अक्सर जब साबुन घिसकर बहुत छोटा या पतला हो जाता है, तो लोग उसे बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। साबुन के इन छोटे टुकड़ों को फेंकने के बजाय उनका सही उपयोग करके आप पैसे बचा सकते हैं। जब भी पुराना साबुन छोटा हो जाए, तो एक नया साबुन निकालें। दोनों साबुन की सतह को थोड़े से पानी से गीला करें और पुराने टुकड़े को नए साबुन के ऊपर मजबूती से दबाकर चिपका दें। कुछ घंटों में दोनों आपस में जुड़कर एक हो जाएंगे। इस आसान तरीके से साबुन का एक भी कतरा व्यर्थ नहीं जाएगा और आप उसका शत-प्रतिशत उपयोग कर पाएंगे।













