नया मकान बनवाते समय या घर का नवीनीकरण कराते समय मजबूत और टिकाऊ फर्नीचर बनवाना हर किसी की प्राथमिक इच्छा होती है। हालांकि, कई बार काफी मोटी रकम खर्च करके खरीदा गया लकड़ी का सोफा, बेड या अलमारी भी कुछ ही महीनों में दरकने लगती है या उसमें घुन और दीमक लग जाते हैं। केवल महंगी या सुंदर दिखने वाली लकड़ी खरीद लेना ही किसी फर्नीचर के लंबे समय तक चलने की गारंटी नहीं होता। लकड़ी की सही प्रजाति का चयन करने के साथ-साथ उसकी वैज्ञानिक रासायनिक प्रोसेसिंग यानी ट्रीटमेंट और उचित सीजनिंग कराया जाना बेहद अनिवार्य है। इन प्रक्रियाओं के बिना लकड़ी की प्राकृतिक मजबूती भी समय के साथ कमजोर पड़ जाती है।
शीशम और सागवान: फर्नीचर निर्माण की पहली पसंद
उत्तर प्रदेश का सहारनपुर शहर अपने बेजोड़ काष्ठ कला और लकड़ी के बड़े कारोबार के लिए देश ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर विख्यात है। यहां बनने वाले लकड़ी के नक्काशीदार सामान और फर्नीचर की भारी मांग विदेशी बाजारों में भी रहती है। सहारनपुर के प्रमुख काष्ठ व्यवसायी तंजीम नवाज के अनुसार, भारतीय घरों में लंबे समय से शीशम और सागवान को फर्नीचर बनाने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इनकी प्राकृतिक बुनावट और मजबूती किसी भी अन्य विकल्प से बेहतर परिणाम देती है।
शीशम और सागवान के अतिरिक्त स्थानीय एवं निर्यात बाजार के लिए नीम तथा आम की लकड़ी का भी काफी इस्तेमाल किया जाता है। खास तौर पर विदेशों में भेजे जाने वाले सजावटी सामान, हस्तशिल्प और गिफ्ट आइटम्स के लिए मैंगो वुड और एकेसिया जैसी लकड़ियों की बहुत मांग रहती है। हालांकि, किसी भी प्रकार की लकड़ी से बेहतरीन और टिकाऊ उत्पाद तैयार करने के लिए उसकी सही तैयारी और प्रोसेसिंग पहली शर्त होती है।
दीमक और घुन से सुरक्षा: बोरिक-बोरेक्स ट्रीटमेंट की भूमिका
कच्ची या अनट्रीटेड लकड़ी पर कीट-पतंगों, दीमक और घुन का हमला होने की आशंका हमेशा बनी रहती है। इससे बचाव के लिए लकड़ी को विशेष केमिकल ट्रीटमेंट की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। तंजीम नवाज बताते हैं कि लकड़ी को कीड़ों से सुरक्षित रखने के लिए बोरिक और बोरेक्स जैसे रसायनों के मिश्रण का इस्तेमाल किया जाता है। यह केमिकल घोल लकड़ी की अंदरूनी परतों तक जाकर उसे ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान करता है जिससे घुन या दीमक उसमें नहीं लग पाते।
अगर लकड़ी का केमिकल ट्रीटमेंट सही मानकों के अनुरूप किया गया हो, तो उसकी संभावित उम्र लगभग 10 से 15 साल तक बढ़ जाती है। हालांकि, फर्नीचर का वास्तविक जीवनकाल इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसे किस तरह के माहौल में रखा गया है, कमरे में नमी का स्तर कितना है और उसकी नियमित देखभाल किस तरह की जा रही है।
सीजनिंग की प्रक्रिया: नमी को 95% से घटाकर 10-14% तक लाना
केमिकल ट्रीटमेंट पूरा होने के बाद लकड़ी को सीजनिंग की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया से गुजारा जाना जरूरी होता है। जब पेड़ को काटा जाता है, तो उसकी लकड़ी में पानी या नमी का स्तर काफी ज्यादा होता है। शुरुआती चरण में किसी पेड़ की लकड़ी में नमी की मात्रा लगभग 95 प्रतिशत तक दर्ज की जा सकती है। इतने अधिक मॉइस्चर लेवल के साथ यदि फर्नीचर बना दिया जाए, तो सूखने पर लकड़ी सिकुड़ जाएगी और उसमें बड़ी-बड़ी दरारें आ जाएंगी।
सीजनिंग चैंबरों में वैज्ञानिक पद्धति से सुखाकर लकड़ी के नमी स्तर को नियंत्रित रूप से घटाकर लगभग 10 से 14 प्रतिशत के दायरे में लाया जाता है। तंजीम नवाज के मुताबिक, 10 से 14 प्रतिशत की नमी वाला स्तर ही बारीक नक्काशी करने और मजबूत फर्नीचर का निर्माण करने के लिए सबसे आदर्श माना गया है। इस स्तर पर आने के बाद लकड़ी में ऐंठन या खिंचाव आने का खतरा नगण्य हो जाता है।
केवल भट्टी में सुखाना काफी नहीं: सीजनिंग और किल्न-ड्राइंग में अंतर
अक्सर लोग सोचते हैं कि लकड़ी को किसी गर्म भट्टी में सुखा देना ही उसकी सीजनिंग है, लेकिन तंजीम नवाज इस धारणा को पूरी तरह गलत बताते हैं। अत्यधिक उच्च तापमान पर लकड़ी को तेजी से सुखाने पर उसकी बाहरी सतह तो सख्त हो जाती है, लेकिन उसका आंतरिक संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसी लकड़ी बहुत अधिक कठोर हो जाती है और बाद में जब उसे सामान्य वातावरण में रखा जाता है, तो वह हवा से दोबारा नमी सोखना शुरू कर देती है।
यही वजह है कि सहारनपुर के गुणवत्तापूर्ण नक्काशीदार फर्नीचर निर्माण में पहले पूरी तरह से बोरिक और बोरेक्स रसायनों से ट्रीटमेंट किया जाता है और उसके बाद ही नियंत्रित तापमान तथा आर्द्रता वाले माहौल में चरणबद्ध सीजनिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस संतुलित प्रक्रिया से लकड़ी का मॉइस्चर हमेशा के लिए स्थिर हो जाता है और वह वातावरणीय बदलावों को आसानी से सहन कर सकती है।
फर्नीचर खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
जब भी आप बाजार में अपने घर के लिए सोफा, बेड या कोई अन्य लकड़ी का सामान खरीदने जाएं, तो सिर्फ उसकी बाहरी चमक, पॉलिश या रंग-रूप को देखकर फैसला न लें। बिकने वाले सामान की लकड़ी किस प्रजाति की है, इसके साथ-साथ विक्रेता से यह सवाल जरूर पूछें कि क्या वह लकड़ी पूरी तरह से केमिकल ट्रीटेड और सीजंड है। सही तरीके से प्रोसेस की गई लकड़ी से बना फर्नीचर सालों-साल बिना किसी खराबी के टिका रहता है और उस पर मौसम के बदलावों का प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।


















