टेढ़े-मेढ़े दांतों की बनावट सुधारने के लिए आजकल लोग पारंपरिक धातु वाले तारों की तुलना में पारदर्शी प्लास्टिक ट्रे को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। चेहरे के लुक पर कोई असर न पड़ने के कारण युवा और पेशेवर वर्ग इन्हें काफी सहजता से इस्तेमाल करता है। हालांकि इन बारीक मेडिकल ट्रे की स्पष्टता बरकरार रखना आसान काम नहीं है। नियमित लापरवाही बरतने पर इन ट्रे पर रोगाणुओं का जमावड़ा हो जाता है, इनका रंग मटमैला या पीला दिखने लगता है और सांसों में अप्रिय गंध घुलने लगती है। ऑर्थोडॉन्टिक उपचार के दौरान मुंह की सेहत दुरुस्त रखने के लिए इन उपकरणों की समुचित देखभाल अनिवार्य हो जाती है।
दैनिक धुलाई के लिए सही ब्रश और क्लींजर का चयन
अलाइनर ट्रे को कीटाणुरहित रखने की शुरुआत हर दिन सुबह और सोने से ठीक पहले नियमित धुलाई से होती है। सफाई के लिए एक अलग मुलायम ब्रिसल वाला टूथब्रश तय कर लें, जिसका इस्तेमाल दांतों पर न किया जाता हो। इस काम के लिए हल्के लिक्विड सोप अथवा बिना किसी खुशबू वाले साधारण डिशवॉश जेल की कुछ बूंदें लें और बेहद कोमल हाथों से प्लास्टिक की दोनों सतहों को साफ करें। साधारण टूथपेस्ट का प्रयोग यहां कतई नहीं करना चाहिए। टूथपेस्ट में मिले महीन दानेदार तत्व प्लास्टिक की चिकनी परत पर खरोंच बना देते हैं, जिसके कारण ट्रे धुंधली दिखाई देने लगती है और उनकी पारदर्शिता खत्म हो जाती है।
तापमान और खान-पान से जुड़ी सावधानियां
सफाई करते समय पानी का तापमान सही होना प्लास्टिक की उम्र और उसकी बनावट के लिए निर्णायक होता है। खौलते अथवा अत्यधिक तेज गर्म पानी से इन ट्रे को धोने पर उनका मूल ढांचा पिघल या मुड़ सकता है। एक बार आकार बिगड़ने के बाद वे जबड़ों पर सही दबाव नहीं बना पाते और उपचार का उद्देश्य प्रभावित होता है। इसलिए हमेशा सादे अथवा हल्के गुनगुने पानी का ही सहारा लेना चाहिए। इसके अलावा, सामान्य पानी पीने के अतिरिक्त जब भी कोई अन्य पेय पदार्थ जैसे चाय, कॉफी, रस अथवा कोल्ड ड्रिंक पीनी हो, तो पहले ट्रे को मुंह से बाहर निकालना जरूरी है। ट्रे पहने हुए खाने या पीने से रंगीन द्रव्य और खाद्य कण प्लास्टिक में फंस जाते हैं, जिससे वे बदरंग हो जाते हैं।
भोजनोपरांत ओरल हाइजीन और डीप क्लीनिंग के तरीके
प्रत्येक भोजन के पश्चात अलाइनर्स को मुंह में वापस बिठाने से पूर्व दांतों की स्वच्छता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी नियम है। भोजन के बाद ब्रश करने के साथ-साथ फ्लॉस का उपयोग करें ताकि दांतों के जोड़ों में फंसा अन्न बाहर निकल जाए। यदि भोजन के अंश दांतों में फंसे रह गए और उनके ऊपर अलाइनर ट्रे लगा दी गई, तो वहां रोगाणु तेजी से पनपने लगते हैं, जिससे इनेमल खराब होने और कैविटी का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। नियमित सफाई के अतिरिक्त सप्ताह में दो से तीन बार गहन सफाई प्रक्रिया अपनानी चाहिए। इसके लिए किसी दंत चिकित्सक के सुझाव पर विशेष क्लीनिंग सोकिंग टैबलेट्स का घोल तैयार कर ट्रे को कुछ देर भिगोया जा सकता है, जो हठी बदबू और बैक्टीरिया को जड़ से खत्म कर देता है।
सुरक्षित भंडारण और उपचार की निरंतरता
अक्सर देखा जाता है कि भोजन करते समय लोग अपनी ट्रे को मेज पर या टिश्यू पेपर में लपेटकर रख देते हैं। ऐसा करने से अनजाने में उनके खो जाने या कचरे के डिब्बे में चले जाने की आशंका सबसे अधिक रहती है। इस भूल से बचने के लिए ट्रे को निकालते ही सीधे उसके निर्दिष्ट एयर-टाइट सुरक्षा डिब्बे में ही बंद करके रखें। इन बुनियादी और व्यावहारिक कदमों को दिनचर्या में शामिल करके आप अपनी ट्रे को स्वच्छ, बैक्टीरिया-मुक्त और पारदर्शी रख सकते हैं, जिससे बिना किसी रुकावट के दांतों का सही संरेखण हासिल किया जा सकता है।
























