दक्षिण भारतीय खानपान की पहचान रही इडली और डोसा अब देशभर के घरों में नाश्ते का एक नियमित हिस्सा बन चुके हैं। बेहतरीन स्वाद, स्पंजी बनावट और सही कुरकुरापन पाने के लिए सबसे अहम पड़ाव बैटर का सटीक फर्मेंटेशन होता है। यदि बैटर में खमीर अच्छी तरह न उठे, तो इडली सख्त रह जाती है और डोसा तवे पर चिपकने के साथ क्रिस्पी नहीं बन पाता। अक्सर ठंड के दिनों में कम तापमान की वजह से फर्मेंटेशन प्रक्रिया बेहद धीमी पड़ जाती है। ऐसे मौसम में लोग बर्तन को कंबल में लपेटने या गर्म कोनों में रखने जैसे कई जतन करते हैं। इस परेशानी को सुलझाने के लिए शेफ पंकज भदौरिया ने एक बेहद सरल रसोई नुस्खा साझा किया है, जिसमें बिना किसी बाहरी या महंगे तत्व के केवल एक डंठल वाली हरी मिर्च की मदद ली जाती है।
डंठल वाली हरी मिर्च से फर्मेंटेशन में कैसे मिलती है मदद
जब इडली या डोसे के घोल में खमीर उठने में असामान्य रूप से अधिक समय लग रहा हो, तो उसमें साबुत हरी मिर्च डंठल समेत डालना फायदेमंद साबित होता है। आमतौर पर भोजन में तीखापन और जायका लाने के लिए इस्तेमाल होने वाली हरी मिर्च का डंठल इस प्रक्रिया में खास भूमिका निभाता है। हरी मिर्च के डंठल की बाहरी सतह पर प्राकृतिक रूप से लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मौजूद हो सकते हैं। यह लाभकारी बैक्टीरिया मिश्रण के भीतर खमीरीकरण को रफ्तार देने में सहायक माने जाते हैं। इसी कारण से बैटर में डंठल वाली हरी मिर्च डालने पर फर्मेंटेशन की गति तेज हो जाती है और ठंड के मौसम में भी मिश्रण ठीक से तैयार हो पाता है।
नुस्खे को आजमाने का सही तरीका
इस आसान उपाय को अपनाने के लिए सबसे पहले दाल और चावल से इडली या डोसे का बैटर सामान्य प्रक्रिया से पीसकर तैयार कर लें। इसके बाद एक साफ हरी मिर्च लें, जिसका डंठल पूरी तरह सुरक्षित हो, और उसे सीधे बैटर के बीच में डाल दें। मिर्च डालने के तुरंत बाद बर्तन को किसी ढक्कन से अच्छी तरह ढककर रसोई के अपेक्षाकृत गर्म स्थान पर रख दें। इस दौरान बैटर को बार-बार हिलाने, चमचे से चलाने या ढक्कन खोलकर देखने से बचना आवश्यक है ताकि अंदर का तापमान स्थिर बना रहे। जब तय समय बाद बैटर में पर्याप्त खमीर उठ जाए और वह फूल जाए, तो पकाने से ठीक पहले उस हरी मिर्च को बाहर निकाल लें। इसके बाद इस बैटर से जालीदार व मुलायम इडली अथवा मनचाहा कुरकुरा डोसा तैयार किया जा सकता है।



















