मेक्सिको के केंद्रीय बैंक बैंक्सिको ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 6.50% पर बरकरार रखने के साथ ही भविष्य में महंगाई के रास्ते को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। नीतिगत बैठक के जारी ब्योरे से स्पष्ट होता है कि शासी बोर्ड के अधिकतर सदस्यों ने वैश्विक परिदृश्य में उच्च भू-राजनीतिक अनिश्चितता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक हालात पेचीदा हो रहे हैं, जिसके कारण आने वाले समय के लिए मुद्रास्फीति का सटीक अनुमान लगाना केंद्रीय बैंक के लिए काफी जटिल हो गया है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और मुद्रास्फीति का परिदृश्य
बैंक्सिको के बोर्ड सदस्यों के बहुमत ने उल्लेख किया कि पिछली मौद्रिक नीति बैठक के बाद से ही दुनिया भर में भू-राजनीतिक संकट लगातार गहराया हुआ है। बोर्ड का मानना है कि पूर्वानुमान अवधि के दौरान मुद्रास्फीति का समग्र संतुलन अभी भी ऊपर की तरफ झुका हुआ है, यानी कीमतों में अचानक उछाल आने की आशंका अधिक बनी हुई है। हालांकि, अधिकांश सदस्यों ने यह सकारात्मक संकेत भी दिया कि वर्ष 2026 के अंत तक के लिए हेडलाइन मुद्रास्फीति की उम्मीदों में कुछ कमी दर्ज की गई है।
इसके विपरीत, बोर्ड के एक सदस्य ने एक अलग दृष्टिकोण साझा करते हुए बताया कि हेडलाइन मुद्रास्फीति अब बैंक के तय लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुकी है। इस सदस्य के विश्लेषण के अनुसार, गैर-कोर श्रेणी के भीतर कीमतों में होने वाले सापेक्ष समायोजन का प्रभाव अब समाप्त हो रहा है। साथ ही कोर मुद्रास्फीति में लगातार गिरावट का सिलसिला देखा जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि बुनियादी मूल्य दबाव धीरे-धीरे शिथिल पड़ रहे हैं।
बैंक्सिको का मूल उद्देश्य और नीतिगत ढांचा
बैंक ऑफ मेक्सिको, जिसे लोकप्रिय रूप से बैंक्सिको के नाम से जाना जाता है, देश की मुद्रा मेक्सिकन पेसो के मूल्य की रक्षा करने और राष्ट्रीय मौद्रिक नीति को दिशा देने के लिए उत्तरदायी है। इस संस्थान का मुख्य लक्ष्य मुद्रास्फीति को एक सीमित और स्थिर दायरे में बनाए रखना है। बैंक ने आधिकारिक तौर पर 3% का मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित किया हुआ है, जिसके चारों ओर 2% से 4% तक का सहनशीलता दायरा तय किया गया है।
मौद्रिक नीति को संचालित करने के लिए बैंक्सिको का प्राथमिक साधन ब्याज दरों का निर्धारण है। जब भी कीमतें अपने तय दायरे से बाहर निकलने लगती हैं, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी का रास्ता अपनाता है। दरें बढ़ने से परिवारों और कारोबारी संस्थानों के लिए कर्ज लेना अधिक महंगा हो जाता है, जिससे समग्र आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होती है और मांग घटने से मुद्रास्फीति पर लगाम लगती है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर मेक्सिकन पेसो के लिए भी मददगार साबित होती हैं क्योंकि यह विदेशी निवेशकों को बेहतर रिटर्न देती हैं। इसके उलट, दरों में कटौती होने पर पेसो के कमजोर होने का अंदेशा बढ़ जाता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के साथ तालमेल और इतिहास
बैंक्सिको की नीतिगत बैठकें साल में आठ बार आयोजित की जाती हैं। मेक्सिको की आर्थिक रणनीति पर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के फैसलों का गहरा प्रभाव पड़ता है। अमेरिकी डॉलर और मेक्सिकन पेसो के बीच ब्याज दरों का अंतर दोनों देशों के पूंजी प्रवाह के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण बैंक्सिको की नीति निर्माण समिति प्रायः फेडरल रिजर्व की बैठक के ठीक एक सप्ताह बाद अपनी बैठक आयोजित करती है ताकि वह अमेरिकी कदमों के अनुरूप अपनी नीति तय कर सके।
इतिहास में कई बार ऐसा भी हुआ है जब बैंक्सिको ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कदमों का केवल अनुसरण करने के बजाय खुद पहले पहल की है। कोविड महामारी के बाद के दौर में जब वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां उभरी थीं, तब अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने से पहले ही बैंक्सिको ने दरों में वृद्धि कर दी थी। इस त्वरित कदम का मुख्य उद्देश्य मेक्सिकन पेसो में भारी गिरावट के जोखिम को टालना और देश से पूंजी के अचानक बहिर्गमन को रोकना था, जिससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को किसी बड़े वित्तीय संकट से बचाया जा सके।
वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजारों की स्थिति
पश्चिम एशिया के बढ़ते संकट का असर केवल मेक्सिको तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के प्रमुख वित्तीय बाजारों पर इसका दबाव साफ दिखाई दे रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.6950 के स्तर के ठीक ऊपर सीमित दायरे में कारोबार करती नजर आई। पेंटागन द्वारा ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए तैयारियों के आदेश संबंधी घटनाक्रमों के बीच व्यापारी भू-राजनीतिक जोखिमों का लगातार आकलन कर रहे हैं। अमेरिकी बांड प्रतिफल के ऊंचे स्तर और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के सख्त रुख वाले ब्योरे ने अमेरिकी डॉलर को व्यापक मजबूती प्रदान की है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर 158.00 के नीचे फिसल गया, जिसका कारण यह अटकलें रहीं कि जापानी अधिकारी येन को संभालने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर सकते हैं। अमेरिकी डॉलर में 18 महीने के उच्च स्तर के करीब मुनाफावसूली दर्ज की गई, जिससे येन के मुकाबले डॉलर की चाल पर कुछ दबाव दिखा। इस बीच कमोडिटी बाजार में सोने ने अपनी रफ्तार फिर हासिल की और 4,150 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब पहुंच गया। सोने की यह बढ़त अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव आने और 10 से 30 वर्ष की अवधि वाले अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में मामूली गिरावट के बाद दर्ज की गई है।



















