कमरे को नया रूप देने की बात जब भी आती है, तो अधिकतर लोग दीवारों के नए पेंट, आधुनिक फर्नीचर या सजावटी कलाकृतियों पर ही सबसे ज्यादा समय और पैसा खर्च करते हैं। अक्सर घर के इस मेकओवर में खिड़कियों के पर्दों पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है, जबकि इंटीरियर डिजाइनिंग में इनका असर तुरंत नजर आता है। खिड़कियों पर टंगे पर्दे केवल बाहर से आने वाली तेज धूप को रोकने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे कमरे की रोशनी, तापमान और एकांत को संतुलित करते हुए पूरे माहौल को बड़ा और व्यवस्थित बना सकते हैं।
कपड़े की बनावट और रोशनी का संतुलन
पर्दे के लिए सही कपड़े का चयन यह तय करता है कि कमरे के अंदर का माहौल कैसा महसूस होगा। यदि कमरे को हल्का, खुला और हवादार रूप देना चाहते हैं, तो लिनेन का कपड़ा सबसे बेहतरीन विकल्प साबित होता है। दूसरी ओर, सूती यानी कॉटन का कपड़ा हर आम और खास तरह के इंटीरियर के साथ सहजता से घुलमिल जाता है और इसकी देखरेख भी काफी आसान रहती है। कमरे में अगर शाही और भव्य अहसास जोड़ना हो, तो मखमली यानी वेलवेट के भारी पर्दे चुने जा सकते हैं, जो बनावट में काफी मुलायम और मोटे होते हैं। वहीं जिन कमरों में धूप बहुत चुभती है या जहां बाहर की नजरों से पूरा बचाव चाहिए, वहां ब्लैकआउट पर्दे काम आते हैं। अगर दिन के समय कमरे में हल्की छनकर आती प्राकृतिक रोशनी चाहिए और साथ ही निजता भी बनी रहे, तो महीन और पारदर्शी शीयर पर्दे लगाना सबसे मुफीद रहता है।
दोहरी परत वाली स्टाइलिंग से बनाएं बात
खिड़कियों को एक आधुनिक और व्यावहारिक अंदाज देने के लिए दो तरह के पर्दों का मेल यानी डबल लेयर स्टाइलिंग बहुत कारगर साबित होती है। इसके तहत खिड़की के ठीक पास वाले हिस्से पर हल्के पारदर्शी शीयर पर्दे टांगे जाते हैं, जबकि उनके आगे की तरफ मोटे कपड़े वाले पर्दे लगाए जाते हैं। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि दिन के समय भारी पर्दों को दोनों तरफ समेटकर कमरे में दिन के उजाले का पूरा आनंद लिया जा सकता है, और महीन पर्दों की वजह से बाहर से कोई अंदर झांक भी नहीं पाता। वहीं रात होते ही मोटे पर्दों को बंद करके कमरे की पूरी प्राइवेसी सुरक्षित की जा सकती है।
रॉड की ऊंचाई और फैलाव से बड़ा दिखेगा कमरा
यदि कमरा आकार में छोटा है या उसकी छत की ऊंचाई कम महसूस होती है, तो पर्दे टांगने का सही तरीका इसे काफी हद तक बदल सकता है। इसके लिए कर्टेन रॉड को खिड़की के ठीक ऊपर लगाने के बजाय दीवार में छत के जितना मुमकिन हो पास लगाना चाहिए, और पर्दों की लंबाई फर्श को छूती हुई होनी चाहिए। इससे देखने वाले की नजर ऊपर से नीचे तक जाती है, जिससे छत ऊंची और कमरा खुला-खुला प्रतीत होता है। इसके साथ ही, पर्दे की रॉड को खिड़की की चौड़ाई से दोनों तरफ कुछ इंच बाहर निकालना चाहिए। ऐसा करने से पर्दे पूरी तरह खोलने पर शीशे का कोई हिस्सा ढका नहीं रहता, जिससे रोशनी पूरी तरह अंदर आती है और खिड़की का फैलाव भी बड़ा दिखाई पड़ता है।
प्रिंट, रंग और दीवारों के साथ सामंजस्य
पर्दों के रंग और डिजाइन का चुनाव करते समय कमरे में पहले से मौजूद कालीन, सोफा कवर और कुशन की बनावट पर गौर करना बेहद जरूरी है। अगर कमरे में बैठने का फर्नीचर और फर्श पहले से ही भारी प्रिंट वाले हैं, तो खिड़कियों के लिए एकरंगी और सादे पर्दे चुनना ही समझदारी भरा कदम है। इसके उलट, यदि दीवारें हल्के रंग की हैं और बाकी फर्नीचर बिल्कुल सीधा-सादा है, तो फ्लोरल, बोल्ड या ज्यामितीय प्रिंट वाले पर्दे लगाकर पूरे कमरे को एक जीवंत केंद्र बिंदु दिया जा सकता है। रंगों के तालमेल के लिए पर्दों का रंग दीवारों से एक-दो शेड हल्का या गहरा रखा जा सकता है। अगर एक से ज्यादा रंगों का कंट्रास्ट बनाना पसंद हो, तो परस्पर पूरक रंगों का इस्तेमाल करें, जैसे मस्टर्ड रंग के इंटीरियर के साथ गहरा नीला पर्दा कमरे को काफी आकर्षक रूप देता है।
कम बजट में कैसे दें डिजाइनर टच
खिड़कियों को सुंदर रूप देने के लिए बहुत महंगे डिजाइनर पर्दे खरीदना कतई अनिवार्य नहीं है। कम बजट में भी सामान्य सूती या लिनेन ब्लेंड के किफायती पर्दे लेकर उन्हें सही ऊंचाई और सही तरीके से टांगकर कमरे का रूप निखारा जा सकता है। ऐसे सामान्य पर्दों को आकर्षक बनाने के लिए उनके सिरों या किनारों पर कंट्रास्ट रंग की आकर्षक लेस, बॉर्डर या गोटा पट्टी जोड़कर उन्हें घर पर ही कस्टमाइज किया जा सकता है। इससे बेहद सामान्य कपड़े के पर्दे भी किसी महंगे डिजाइनर कलेक्शन जैसे लगने लगते हैं।


















