सर्दियों के महीनों में भारतीय पारंपरिक परिधानों, विशेषकर साड़ी के साथ सही गर्म कपड़ों का चुनाव करना अक्सर एक बड़ी चुनौती बन जाता है। महिलाओं के सामने यह उलझन रहती है कि कड़ाके की ठंड से अपना बचाव कैसे करें और साथ ही साड़ी का मूल सौंदर्य भी न दबे। सामान्य दिनों में पहने जाने वाले आम पफर जैकेट्स, भारी-भरकम स्वेटर या अनगढ़ शॉल कई बार साड़ी के नफासत भरे और सुरुचिपूर्ण अंदाज को छिपा देते हैं। इसका एक बेहतरीन और बेहद सुंदर समाधान भारत के अलग-अलग पर्वतीय क्षेत्रों के स्थानीय बाजारों में मौजूद है। वहां के पारंपरिक हस्तशिल्प और बुनकरों द्वारा तैयार की गई वूलन जैकेट्स न केवल हाड़ कंपाने वाली ठंड से राहत देती हैं, बल्कि पारंपरिक साड़ियों के साथ मिलकर एक विशिष्ट और राजसी पहनावा तैयार करती हैं। यदि इस मौसम में किसी हिल स्टेशन की यात्रा की योजना बन रही है, तो वहां के प्रसिद्ध बाजारों से इन पांच प्रामाणिक पहाड़ी जैकेट्स की खरीदारी अवश्य की जा सकती है।
1. हिमाचली पट्टू और कुल्लवी नेहरू जैकेट (मनाली और कुल्लू)
हिमाचल प्रदेश का कुल्लू और मनाली क्षेत्र अपनी समृद्ध बुनाई परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां के मॉल रोड और स्थानीय हैंडलूम एम्पोरियम में पारंपरिक कुल्लवी ज्यामितीय डिजाइनों वाले वूलन जैकेट्स आसानी से मिल जाते हैं। ये परिधान हाफ स्लीव और फुल स्लीव दोनों विकल्पों में उपलब्ध होते हैं, जिन पर बने विशिष्ट बॉर्डर दूर से ही आकर्षित करते हैं।
इन कुल्लवी और पट्टू शैली के जैकेट्स को सादे सिल्क अथवा कॉटन की साड़ी के साथ पहनना सबसे अधिक फबता है। स्टाइलिंग के समय साड़ी के पल्लू को करीने से व्यवस्थित कर जैकेट के भीतर रखकर पिनअप किया जा सकता है। ऐसा करने से जैकेट पर उकेरा गया ज्यामितीय बॉर्डर पूरी तरह से उभरकर सामने आता है और साड़ी की सादगी में चार चांद लगा देता है। यह संयोजन किसी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा, पारिवारिक उत्सव या शाम की सैर के अवसर पर पहनने के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है।
2. कश्मीरी आरी वर्क और फेरन शैली की जैकेट (श्रीनगर)
कश्मीर घाटी की बारीक दस्तकारी और कढ़ाई की ख्याति वैश्विक स्तर पर है। श्रीनगर के प्रमुख बाजारों जैसे लाल चौक, डल लेक बुलेवर्ड मार्केट तथा रेजीडेंसी रोड पर कश्मीरी आरी कढ़ाई से सजी शानदार वूलन जैकेट्स व्यापक रूप से मिलती हैं। आरी की महीन सुई से ऊन पर उकेरे गए प्राकृतिक और पारंपरिक रूपांकन अपनी नफासत के लिए जाने जाते हैं।
गहरे और समृद्ध रंगों, जैसे मैरून, नेवी ब्लू अथवा बॉटल ग्रीन शेड वाली आरी वर्क जैकेट को हल्के रंगों की शिफॉन या जॉर्जेट साड़ियों के साथ पहनना एक अनूठा कंट्रास्ट पैदा करता है। भारी ऊनी कढ़ाई और पारदर्शी, हल्के फैब्रिक का यह मेल परिधान को एक राजसी रूप देता है, जो किसी भी शाम के आयोजन या उत्सव में आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
3. लद्दाखी गोंचा से प्रेरित वेलवेट जैकेट (लेह-लद्दाख)
ऊंचाई पर बसे लद्दाख की कठोर जलवायु में शरीर को गर्म रखने के लिए वहां का पारंपरिक परिधान गोंचा अत्यंत कारगर सिद्ध होता है। इसी पहनावे के आधार पर तैयार की जाने वाली आधुनिक वेलवेट जैकेट्स में भीतर रेशमी या सिल्क लाइनिंग दी जाती है और इनका गला प्रायः हाई-नेक शैली में बना होता है। लेह के मेन बाजार और तिब्बती हस्तशिल्प बाजार में इस प्रकार के परिधान प्रमुखता से उपलब्ध होते हैं।
कांजीवरम अथवा बनारसी जैसी सघन जरी और रेशम वाली भारी साड़ियों के साथ यह लद्दाखी शॉर्ट वेलवेट जैकेट बेहतरीन तालमेल बनाती है। यह जैकेट तीव्र ठंडी हवाओं से गर्दन और सीने को सुरक्षित रखने में सक्षम है, साथ ही भारी साड़ियों की भव्यता को ढकने के बजाय उनके साथ मिलकर पूरे व्यक्तित्व को संवारती है।
4. गढ़वाली बुनाई वाले शॉर्ट वूलन कोट (मसूरी और उत्तरकाशी)
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में स्थानीय ऊन से हाथ द्वारा बुने जाने वाले छोटे ऊनी कोट और जैकेट्स अपनी गर्माहट और हल्के वजन के लिए पहचाने जाते हैं। मसूरी के मॉल रोड, कुलड़ी बाजार तथा देहरादून के बाजारों में इन पारंपरिक गढ़वाली परिधानों का अच्छा संग्रह देखने को मिलता है।
ये जैकेट्स बहुत अधिक भारी नहीं होतीं, इसलिए इन्हें रोजमर्रा या सामान्य कैजुअल प्रिंटेड साड़ियों के साथ बेहद सहजता से पहना जा सकता है। स्टाइलिंग के लिए साड़ी के पल्लू को कंधे पर एक साइड स्कार्फ की तरह लपेटा जा सकता है और ऊपर से यह शॉर्ट कोट धारण किया जा सकता है। यह पहनावा न केवल आरामदायक रहता है, बल्कि यात्रा के दौरान घूमने-फिरने और दर्शनीय स्थलों को देखने के समय एक स्मार्ट और व्यावहारिक लुक भी प्रदान करता है।
5. सिक्किमी बक्कू शैली का वेस्टकोट (गंगटोक)
सिक्किम की समृद्ध लोक संस्कृति में पारंपरिक पोशाक बक्कू का महत्वपूर्ण स्थान है। इसी परिधान की भव्यता से प्रेरणा लेकर तैयार किए जाने वाले एथनिक स्लीवलेस वेस्टकोट आधुनिक महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। गंगटोक के एमजी मार्ग और प्रसिद्ध लाल बाजार में रंग-बिरंगे ब्रोकेड कपड़ों से बने ऐसे आकर्षक वेस्टकोट प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।
चमकीले और नक्काशीदार ब्रोकेड फैब्रिक वाले इन स्लीवलेस जैकेट्स को किसी भी सादे रंग की अथवा सुंदर बॉर्डर वाली साड़ी के साथ सुगमता से मैच किया जा सकता है। इस पहनावे को पूरा करने के लिए पारंपरिक चांदी के आभूषण या आधुनिक बोहो स्टाइल ज्वेलरी का इस्तेमाल किया जा सकता है। पारंपरिक बुनाई और समकालीन आभूषणों का यह अनूठा संगम एक शानदार फ्यूजन लुक देता है।
पहाड़ी बाजारों में खरीदारी के लिए उपयोगी सुझाव
पर्वतीय शहरों के बाजारों से पारंपरिक ऊनी परिधान खरीदते समय स्थानीय हैंडलूम एम्पोरियम या महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित दुकानों को प्राथमिकता देना हमेशा बेहतर रहता है। इन स्थानों पर सीधे स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार किया गया असली और टिकाऊ माल उचित दरों पर उपलब्ध हो जाता है, जिससे स्थानीय शिल्पकारों को भी सीधा प्रोत्साहन मिलता है।


















