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दीवाली पूजन में जटा वाले सूखे नारियल का विधान, सुख और बरकत के लिए तिजोरी तक ऐसे पहुंचाएंजीवनशैली
5 नव॰ 2026, 10:33 am (2 दिन पहले)· 0

दीवाली पूजन में जटा वाले सूखे नारियल का विधान, सुख और बरकत के लिए तिजोरी तक ऐसे पहुंचाएं

दीपावली के अवसर पर सूखे नारियल और पंचोपचार विधि से किए जाने वाले विशेष पूजन के नियम सामने आए हैं। जानिए इसे सुरक्षित रखने और गोपाल सहस्रनाम पाठ का महत्व।

दीपावली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी की कृपा और घर में संपन्नता बनाए रखने के लिए जटा वाले सूखे नारियल का एक पारंपरिक अनुष्ठान विशेष फलदायी माना गया है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने इस संबंध में विस्तार से विधान साझा किया है, जिसके अनुसार विधिपूर्वक पूजन और नारियल की स्थापना से परिवार में सुख और समृद्धि का स्थायी वास होता है। इस पूरे अनुष्ठान को समयबद्ध और नियमों के साथ पूरा करने पर बल दिया गया है।

त्योहार से एक दिन पहले तैयारी और संकल्प

इस धार्मिक विधि की शुरुआत दीपावली से ठीक एक दिन पहले हो जाती है। सबसे पहले एक साबुत जटा वाला सूखा नारियल लाकर उसे घर के किसी अत्यंत स्वच्छ, पवित्र और सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। नारियल रखते समय मन ही मन देवी लक्ष्मी का ध्यान करना अनिवार्य है। इसके साथ ही पूरे मनोयोग से संकल्प लेने का नियम है, ताकि पूजा का उद्देश्य सिद्ध हो सके और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहे।

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दीपावली की शाम लाल कपड़े में लपेटने का नियम

इसके अगले चरण में दीपावली के दिन सूर्यास्त के समय की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। सूर्यास्त होते ही एक नया लाल सूती कपड़ा लेकर उस नारियल को वहां से आदरपूर्वक लाया जाता है। इसके पश्चात प्रथम पूज्य भगवान गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए नारियल को उस नए लाल कपड़े में अच्छी तरह लपेटा जाता है।

पंचोपचार विधि से पूजन और तिजोरी में स्थापना

नारियल को मुख्य पूजन स्थल पर लाने के बाद, भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की प्रतिमा के निकट दीपक प्रज्वलित कर इसे स्थापित किया जाता है। इसके उपरांत पंचोपचार पद्धति से अनुष्ठान आगे बढ़ता है, जिसमें धूप, दीप, पुष्प, सुगंध और नैवेद्य अर्पित कर नारियल का आदरपूर्वक पूजन किया जाता है। इस क्रम के बाद घर में धन संचय के मुख्य स्थान, जैसे तिजोरी अथवा अलमारी में भी श्रद्धा भाव से पूजा की जाती है। अंत में लाल कपड़े में बंधे उसी नारियल को तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर ससम्मान रख दिया जाता है।

गोपाल सहस्रनाम के 108 पाठ का महत्व

पंडित कल्कि राम के अनुसार, दीपावली की शाम को मंत्र और स्तोत्र साधना का भी विशेष महत्व होता है। शाम की पूजा के दौरान गोपाल सहस्रनाम अथवा संतान गोपाल सहस्रनाम का 108 बार पाठ करना अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि इस समग्र अनुष्ठान और पाठ से घर में आर्थिक बरकत टिकती है तथा सभी सदस्यों के जीवन में शांति और खुशहाली बनी रहती है।

सवाल-जवाब

दीपावली पर किस प्रकार के नारियल का उपयोग करने का विधान है?
इस उपाय के लिए जटा वाले सूखे नारियल का उपयोग किया जाता है।
नारियल को सुरक्षित स्थान पर कब रखना चाहिए?
दीपावली से ठीक एक दिन पहले नारियल को साफ और सुरक्षित स्थान पर रखकर मां लक्ष्मी का ध्यान व संकल्प लिया जाता है।
दीपावली के दिन नारियल को किस समय और कैसे लाया जाता है?
दीपावली की शाम सूर्यास्त के समय नए लाल सूती कपड़े की मदद से नारियल को वापस लाया जाता है।
घर लाने के बाद नारियल का पूजन किस विधि से किया जाता है?
गणेश जी और लक्ष्मी जी की मूर्ति के पास दीपक जलाकर धूप, दीप, फूल, सुगंध और नैवेद्य से पंचोपचार पूजन किया जाता है।
पूजा संपन्न होने के बाद नारियल को कहां स्थापित किया जाता है?
लाल कपड़े में लिपटे हुए नारियल को घर की तिजोरी या अलमारी जैसे धन रखने के स्थान पर रखा जाता है।
दीपावली की शाम को किस पाठ को 108 बार करने का उल्लेख है?
दीपावली की शाम गोपाल सहस्रनाम या संतान गोपाल सहस्रनाम का 108 बार पाठ करना शुभ माना गया है।
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