घरों में नियमित रूप से प्रयुक्त होने वाले तांबे के लोटे अथवा गिलास समय बीतने के साथ अपनी स्वाभाविक चमक खो देते हैं। वातावरण की हवा और नमी के संपर्क से उन पर गहरे काले रंग की सख्त मैली परत चढ़ जाती है, जिसे देखकर अक्सर लोग मान बैठते हैं कि इसे पहले जैसा चमकाना बेहद कठिन काम होगा। बाजार में मिलने वाले महंगे रसायनों अथवा क्लीनर्स पर पैसे लुटाने की कतई आवश्यकता नहीं होती। रामपुर के नवाबी काल से पहचान रखने वाले पारंपरिक बर्तन बाजार के कारोबारी अम्बरीश कुमार अग्रवाल के अनुसार, रसोई और घर में आसानी से उपलब्ध होने वाली मात्र दो साधारण चीजें तांबे के बर्तनों की खोई हुई रंगत वापस ला सकती हैं।
स्वास्थ्य लाभ और समय के साथ बढ़ती मैल की चुनौती
अम्बरीश कुमार अग्रवाल बताते हैं कि तांबे के पात्रों की मांग आज भी घरों में काफी मजबूत बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग रात भर तांबे के लोटे में पानी भरकर रखते हैं और चिकित्सक भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस धातु के बर्तनों के इस्तेमाल का सुझाव देते हैं। इसके बावजूद तांबे का एक स्वाभाविक गुण यह भी है कि हवा में कुछ दिन खुला रहने पर धातु की बाहरी सतह काली पड़ने लगती है। इस परेशानी का हल निकालने के लिए उन्होंने नींबू के रस और बारीक राख के मिश्रण को सबसे असरदार घरेलू उपाय बताया है।
शहरी रसोई में आसानी से तैयार करें उपले की राख
पारंपरिक मिट्टी का चूल्हा न होने की स्थिति में यदि घर पर तत्काल राख उपलब्ध न हो, तो भी चिंता करने की कोई बात नहीं है। गाय के गोबर से बने सूखे उपले का एक छोटा सा टुकड़ा लेकर उसे रसोई गैस के बर्नर पर सावधानीपूर्वक जलाया जा सकता है। इसे जलाते समय सुरक्षा का पूरा ध्यान रखना चाहिए और जब वह पूरी तरह जलकर शांत हो जाए, तब उसे पूरी तरह ठंडा होने देना आवश्यक है। गर्म राख का उपयोग करने से बचना चाहिए। जब यह उपला पूरी तरह ठंडा हो जाए, तब उसकी भुरभुरी राख को किसी साफ प्लेट में निकाल कर रख लें।
सफाई की सही विधि और रगड़ने का तरीका
काले पड़ चुके तांबे के पात्र को साफ करने के लिए ताजे नींबू का एक फांक काटें। इसके बाद नींबू के कटे हुए हिस्से को प्लेट में रखी राख में अच्छी तरह दबाकर लगाएं। अब राख लगे इस नींबू को तांबे की काली सतह पर हल्के दबाव के साथ गोलाई में रगड़ना शुरू करें। जिन कोनों या तली के हिस्सों में मैल की परत ज्यादा मोटी अथवा गहरी हो, वहां थोड़ा अतिरिक्त समय देकर नींबू और राख से घिसाई करें। अम्लीय रस और राख के बारीक कणों के संपर्क में आते ही काली मैल घुलने लगेगी और कुछ ही क्षणों में तांबे की मूल सुनहरी लाल चमक निखर कर सामने आ जाएगी।
धोने और सुखाने की सावधानी
साधारण बर्तनों की तरह तांबे को भी सामान्य दबाव से रगड़कर साफ किया जा सकता है। मैल छूट जाने के बाद पात्र को स्वच्छ ताजे पानी से अच्छी तरह धो लें। धुलाई के फौरन बाद किसी सूखे, साफ और मुलायम सूती कपड़े से बर्तन की एक-एक बूंद पोंछना अनिवार्य है। तांबे के बर्तन को गीला छोड़ना नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि पानी की बूंदें सूखने पर उस पर बदरंग धब्बे छोड़ देती हैं। इसके अलावा खुरदरे तार वाले स्क्रबर या अत्यधिक बल का प्रयोग न करें, अन्यथा धातु पर खरोंचें पड़ सकती हैं। समय-समय पर सफाई करने से बर्तन पर भारी मैल जमने का अवसर ही नहीं मिलता।
















