भारतीय खानपान में लहसुन का स्थान बेहद खास माना जाता है, क्योंकि यह दाल, सब्जियों और तरह-तरह की चटनियों का स्वाद बढ़ाने के साथ सेहत के लिहाज से भी काफी गुणकारी होता है। रोजाना के भोजन में इसका नियमित उपयोग करने वाले लोग इसे अपने घर पर ही उगाने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके लिए किसी बड़े खेत या अतिरिक्त खाली जमीन की आवश्यकता बिल्कुल नहीं होती है। घर की बालकनी, खुली छत या फिर एक छोटे से किचन गार्डन में रखे साधारण गमलों में भी लहसुन की शानदार पैदावार ली जा सकती है। गमलों में सही तकनीक और थोड़ी सी सावधानी बरतकर कोई भी व्यक्ति आसानी से भरपूर लहसुन तैयार कर सकता है।
रोपाई के लिए सबसे मुफीद मौसम और बीजों का चुनाव
लहसुन की रोपाई करने के लिए सर्दी का मौसम शुरू होने से कुछ हफ्ते पहले का समय सबसे आदर्श माना जाता है। अक्टूबर के दौरान जब मौसम में हल्की ठंडक घुलने लगती है, तब मिट्टी में दबाए गए लहसुन के जवे जमीन के भीतर बहुत तेजी से अपनी जड़ें जमा लेते हैं। मजबूत जड़ें बनने से आगे चलकर पौधों का विकास काफी तेजी से होता है। घर पर गार्डनिंग की शुरुआत हमेशा उन्नत किस्म के बीजों से करनी चाहिए। इसके लिए आम दुकानों पर बिकने वाले साधारण लहसुन के बजाय किसी प्रमाणित नर्सरी या गार्डन सेंटर से खास बीज वाले लहसुन का प्रबंध करना सबसे बेहतर रहता है, जिससे अंकुरण की दर काफी अच्छी मिलती है।
मिट्टी तैयार करना और रोपाई की सही तकनीक
गमलों में लहसुन उगाने के लिए हमेशा भुरभुरी और बढ़िया जल निकासी क्षमता वाली मिट्टी का चयन करना चाहिए, ताकि पानी जमा होकर जड़ों को नुकसान न पहुंचाए। मिट्टी तैयार करते समय उसमें भरपूर मात्रा में प्राकृतिक कम्पोस्ट या जैविक खाद मिलाना बेहद जरूरी है। इसके बाद लहसुन की पूरी गांठ में से जवों को अलग-अलग कर लें और उनमें से केवल बड़े तथा पूरी तरह स्वस्थ जवों को रोपाई के लिए चुनें। इन जवों को मिट्टी के भीतर लगभग 2 इंच की गहराई में दबाएं और एक जवे से दूसरे जवे के बीच करीब 5 इंच का फासला रखें। रोपाई के दौरान यह ध्यान रखना बेहद महत्वपूर्ण है कि जवे का नुकीला सिरा ऊपर की दिशा में रहे और जड़ वाला हिस्सा नीचे मिट्टी की तरफ होना चाहिए।
मल्चिंग की सुरक्षा और कटाई के बाद सुखाने का तरीका
जवों की रोपाई पूरी हो जाने के बाद मिट्टी की ऊपरी सतह पर सूखे पत्तों, पुआल अथवा किसी अन्य जैविक मल्च की एक मोटी चादर बिछा देनी चाहिए। यह जैविक परत पौधों को आने वाली कड़ाके की ठंड से बचाती है, मिट्टी के भीतर तापमान का संतुलन बनाए रखती है और अनचाहे खरपतवार को पनपने से भी रोकती है। जब पौधों की निचली पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़कर सूखने लगें, तो यह इस बात का संकेत होता है कि फसल पूरी तरह तैयार हो चुकी है। ऐसे में पौधों को मिट्टी से बेहद सावधानीपूर्वक बाहर निकालें और चिपकी हुई अतिरिक्त मिट्टी को झाड़कर साफ कर लें। निकाले गए लहसुन को पानी से धोने के बजाय किसी छायादार तथा खुली हवादार जगह पर 3 से 4 सप्ताह तक सूखने के लिए छोड़ दें। जब बाहरी छिलके पूरी तरह सूख जाएं, तब उसकी सूखी जड़ें और डंठल काटकर लहसुन को लंबे समय के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

















