देश के कई राज्यों में मानसून की बारिश तबाही मचा रही है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन ने सैकड़ों सड़कों को बंद कर दिया है, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने से कई होटल और घर पानी में डूब गए, वहीं मेघालय में 32 गांवों में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। मुंबई के मरीन ड्राइव पर ऊंची लहरें उठती दिखीं तो भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले कई दिनों तक देश के उत्तर, पूर्वोत्तर और पूर्वी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने की चेतावनी दी है। उत्तराखंड की पहाड़ियों से लेकर कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर के मेघालय तक, बचाव दल और जिला प्रशासन पूरे सप्ताहांत फंसे हुए लोगों और यात्रियों को सुरक्षित निकालने में जुटे रहे।
उत्तराखंड में भूस्खलन से यातायात ठप, सड़कों की संख्या 120 से बढ़कर 126 पहुंची
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ी इलाकों की सड़क व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन से शुरुआत में तीन राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 120 सड़कें बंद हो गई थीं। पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड की खड़ी ढलानें और कच्ची मिट्टी मानसून के दौरान भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं, और इस बार लगातार हुई बारिश ने एक बार फिर इस कमजोरी को उजागर कर दिया। इसी बीच यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा बह जाने से यह मार्ग पूरी तरह बंद हो गया था और दो दिनों तक इस पर आवाजाही ठप रही। इस दौरान करीब 100 तीर्थयात्री रास्ते में फंस गए, जिन्हें बाद में सुरक्षित बाहर निकाला गया।
राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के मुताबिक, गुरुवार को हुई लगातार बारिश के चलते उत्तरकाशी जिले के स्यानाचट्टी में भूस्खलन हुआ, जिसमें सड़क का करीब 100 मीटर हिस्सा पूरी तरह बह गया। भारी मलबा जमा होने से राजमार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। बचाव दल ने वैकल्पिक रास्ते पर रस्सी बांधकर फंसे हुए यात्रियों को एक-एक करके सावधानीपूर्वक सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।
हालात यहीं नहीं थमे। बारिश का सिलसिला जारी रहने से बंद सड़कों की संख्या और बढ़ गई। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत कुल 126 सड़कें पूरी तरह बंद हैं। देहरादून में एक दीवार गिरने की घटना में एक महिला घायल हो गई, जिसके बाद एहतियात के तौर पर सात परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) ने बताया कि पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद आए भूस्खलनों ने पूरे राज्य में सड़क कनेक्टिविटी को बाधित कर दिया है। स्यानाचट्टी में भूस्खलन से बंद पड़े यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को फिर से खोलने के लिए मरम्मत का काम अब भी जारी है।
पहलगाम में बादल फटा, होटल और घर डूबे लेकिन कोई हताहत नहीं
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में शनिवार, 12 जुलाई 2026 को बादल फटने के बाद स्थिति अचानक बिगड़ गई। एक नाले में अचानक आई बाढ़ के कारण इलाके के कई होटल और मकान जलमग्न हो गए। बादल फटने की घटना का मतलब है बेहद कम समय में किसी छोटे इलाके पर असामान्य रूप से तेज बारिश का बरसना, और हिमालयी क्षेत्र के संकरे नालों में ऐसी घटनाएं अक्सर अचानक बाढ़ का कारण बनती हैं। अधिकारियों के मुताबिक, दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित पहलगाम के आवूरा और देहवाथू के वन क्षेत्रों में अचानक मूसलाधार बारिश हुई, जो संभवतः किसी स्थानीय बादल फटने की घटना से जुड़ी थी। भारी बारिश के चलते इलाके में अचानक बाढ़ आ गई, जिसने होटल और घरों को अपनी चपेट में ले लिया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।
मेघालय में 32 गांवों में भूस्खलन, मुख्यमंत्री ने खुद संभाला मोर्चा
मेघालय में भी मानसून की बारिश ने भारी नुकसान पहुंचाया है। भारी बारिश के चलते राज्य के 32 गांवों में भूस्खलन हुआ, साथ ही कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने राज्य की मानसून तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सभी उपायुक्तों के साथ एक वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की और जारी मानसूनी बारिश से हुए नुकसान का जायजा लिया। बारिश ने खासतौर पर गारो हिल्स और खासी हिल्स के कुछ हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
अधिकारियों के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते से शुरू हुए इस बारिश के दौर ने कई इलाकों में सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। राज्य के 32 गांवों से भूस्खलन, जमीन खिसकने, अचानक बाढ़ और स्थानीय स्तर पर जलभराव की खबरें लगातार आ रही हैं। आईएमडी ने 15 जुलाई तक छिटपुट स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश समेत व्यापक बारिश की भविष्यवाणी की है, जिसे देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है।
मुंबई के मरीन ड्राइव पर ऊंची लहरें, कई राज्यों में भारी बारिश दर्ज
शनिवार को देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई, जिसमें उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल रहे, जहां भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और मेघालय में बहुत भारी बारिश दर्ज हुई, जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मिजोरम, तमिलनाडु और केरल में भारी बारिश दर्ज की गई।
इसी बीच रविवार, 12 जुलाई को मुंबई के मरीन ड्राइव पर समुद्र में ऊंची लहरें उठती देखी गईं। यह नजारा उस वक्त सामने आया जब आईएमडी देश के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी कर चुका था। मौसम विभाग ने 12 जुलाई के लिए असम, मेघालय, बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, पूर्वी उत्तर प्रदेश, गांगेय पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख-गिलगिट-बाल्टिस्तान-मुजफ्फराबाद, झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडिशा, पंजाब और उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में भी भारी बारिश होने की आशंका जताई गई।
अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल और बिहार में भारी बारिश जारी रहने का अनुमान
आईएमडी ने रविवार, 12 जुलाई को बताया कि आने वाले दो से तीन दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत, पश्चिम बंगाल और बिहार में भारी से बहुत भारी बारिश जारी रह सकती है। विभाग के मुताबिक, 12 से 16 जुलाई के दौरान अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। इसके अलावा 12 से 18 जुलाई तक गांगेय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में; 13 से 18 जुलाई के दौरान झारखंड और ओडिशा में; और 13 तथा 14 जुलाई को बिहार में मध्यम से भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है।
मानसून की 25% बारिश हवा में ही बन जाती है भाप, नए शोध में खुलासा
बारिश और बाढ़ की इन खबरों के बीच पुणे के भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) की एक नई रिसर्च सामने आई है, जो मानसून को समझने के नजरिए से बेहद अहम मानी जा रही है। इस अध्ययन के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर-पश्चिमी घाटों पर गिरने वाली बारिश का करीब एक-चौथाई हिस्सा जमीन तक पहुंचने से पहले ही हवा में वाष्पित हो जाता है। खास बात यह है कि यह आंकड़ा देश में किसी प्रयोग के जरिए मापा गया अपनी तरह का पहला आंकड़ा है।
इस खोज से जुड़े एक बयान में बताया गया है कि इससे वैज्ञानिकों को मौसम और जलवायु मॉडल को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी, जिससे मानसून को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा। भारत की खेती और पीने के पानी की आपूर्ति काफी हद तक मानसून के सटीक अनुमान पर निर्भर करती है, इसलिए इस तरह के मापे गए आंकड़े भविष्य के पूर्वानुमानों को बेहतर बनाने में कीमती माने जा रहे हैं। यानी आईआईटीएम के इस अध्ययन से यह साबित हुआ है कि भारत की मानसूनी बारिश का 25% हिस्सा हवा में ही भाप बनकर उड़ जाता है, जो आगे चलकर जलवायु पूर्वानुमान मॉडल की सटीकता बढ़ाने में मददगार साबित होगा।



















