देश के अलग-अलग हिस्सों में गुरुवार से जारी तेज मानसूनी बारिश ने आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर पानी भरने, पेड़ उखड़ने, मकान गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है, जिसके बाद प्रशासन जगह-जगह हालात सामान्य करने में जुटा है। कई शहरों की रिहायशी कॉलोनियों में लोगों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, वहीं मुख्य सड़कों और हाईवे पर वाहनों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बाढ़ और भूस्खलन की ताजा घटनाएं सामने आई हैं, हिमाचल के किन्नौर में तो नदी का पानी बढ़ने से 100 फुट लंबा एक लोहे का पुल पूरी तरह डूब गया।
दिल्ली में सड़कें डूबीं, लेकिन हवा हुई साफ
राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई इलाकों की सड़कों को तालाब बना दिया, दर्जनों पेड़ उखड़ गए और अलग-अलग जगहों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। दिलचस्प बात यह रही कि इसी भारी बारिश की वजह से दिल्ली को सितंबर 2023 के बाद पहली बार इतनी साफ हवा मिली। शहर के कुछ हिस्सों में तो 160 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह भी आसमान बादलों से घिरा रहा और मौसम विभाग ने आंधी-तूफान व बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया। पिछले 24 घंटों में शहर में मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज हुई, जिसमें मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला पर सुबह 8:30 बजे तक 33.6 मिलीमीटर पानी बरसा। इसी दौरान लोधी रोड पर 33.7 मिलीमीटर, रिज पर 25.9 मिलीमीटर, आयानगर में 4.2 मिलीमीटर और पालम में 1.8 मिलीमीटर बारिश मापी गई। बारिश की इसी मार का असर हवा की गुणवत्ता पर भी पड़ा और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स गिरकर सिर्फ 54 पर आ गया, जो दिल्लीवासियों के लिए राहत की बात है।
उत्तर प्रदेश में बारिश ने ली 7 जानें, पश्चिमी जिलों में रेड अलर्ट
उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार पकड़ चुका है और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को राज्य के पश्चिमी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए अगले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इस बीच राज्य में बारिश से जुड़े हादसों में कम से कम सात लोगों की जान जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक ये मौतें संत कबीर नगर, कुशीनगर, बुलंदशहर, शामली और गाजियाबाद में अलग-अलग घटनाओं में हुईं।
संत कबीर नगर में खेतों में काम कर रही दो महिलाओं की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। उपजिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मेहदावल तहसील के कत्या गांव की 17 साल की चांदनी और प्रतापपुर गांव की 60 साल की वार्षणा उस वक्त बिजली की चपेट में आईं, जब वे खेत में काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि घटना की रिपोर्ट मांगी गई है और दोनों पीड़ित परिवारों को सरकारी मुआवजा दिया जाएगा।
वहीं कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तड़ीभर गांव में 14 साल के राहुल कुमार की जान बिजली गिरने से चली गई। हादसे के वक्त वह खेत की मेढ़ पर खड़ा था और उसकी मां खेत से तोड़ी हुई सब्जियां उसे पकड़ा रही थीं। पुलिस के अनुसार परिजनों ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
बारिश की मार सिर्फ खुले खेतों तक सीमित नहीं रही, मुजफ्फरनगर में तो कच्चे मकान ही बारिश का बोझ नहीं झेल पाए। मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खामपुर गांव में शुक्रवार तड़के भारी बारिश के दौरान एक कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। थानाध्यक्ष विपिन त्यागी ने बताया कि हादसे के वक्त 60 वर्षीय सरोज और उनके पति कृष्ण कुमार घर के अंदर सो रहे थे। सरोज की मौके पर ही मौत हो गई और उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जबकि कृष्ण कुमार का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
गुजरात: सूरत में बाढ़ की समीक्षा, समुद्री पानी रोकने को 500 करोड़ रुपये की परियोजना
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को सूरत पहुंचकर बाढ़ के हालात की समीक्षा की। इस बैठक में उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय विधायक भी मौजूद रहे। बैठक के बाद संघवी ने संकट के दौरान एकजुट होकर काम करने के लिए सूरत के नागरिकों और राहत एजेंसियों की तारीफ की। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि 7 जुलाई को हुई भीषण बारिश शहर के इतिहास की अब तक की सबसे भारी बारिश थी, जिसकी वजह से सूरत के कई इलाके पानी में डूब गए थे। उन्होंने कहा कि करीब 7 से 8 इलाकों में बेहद ज्यादा जलभराव हुआ, लेकिन शहर के लोगों ने एक टीम की तरह काम करते हुए जहां भी मुमकिन हुआ, सरकारी एजेंसियों की मदद की। NDRF, SDRF और अन्य राहत दलों ने लोगों को सुरक्षित निकालकर दूसरी जगह पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत की। मुख्यमंत्री ने बैठक में शहर के भीतर खाड़ी का पानी घुसने से रोकने वाली एक परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये की घोषणा भी की, ताकि भविष्य में सूरत को ऐसी बाढ़ से बचाया जा सके।
हिमाचल प्रदेश: सिरमौर और सोलन में स्कूल-आंगनवाड़ी बंद, नदियां उफान पर
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पिछले 36 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरा जनजीवन थाम दिया है। हालात को देखते हुए पोंटा प्रशासन ने शुक्रवार को जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी का ऐलान कर दिया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिले के ग्रामीण इलाकों में कई जगह भूस्खलन हुआ है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी इंसान की जान जाने की खबर नहीं है, हालांकि गुरुवार देर शाम शिलाई के पास एक गहरी खाई में गिरने से एक बैल की मौत हो गई। जिले की प्रमुख नदियां, टोंस, यमुना, बाटा, गिरि और मारकंडा, दर्जनों छोटे नालों के साथ पूरे उफान पर हैं और प्रशासन ने लोगों से इन जल स्रोतों के आसपास न जाने की अपील की है। भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी के बाद पोंटा के उपमंडलाधिकारी द्विज गोयल ने पोंटा उपमंडल के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने का आदेश जारी किया।
इसी तरह सिरमौर के साथ-साथ सोलन जिले में भी शुक्रवार को सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए। सिरमौर की उपायुक्त प्रियंका वर्मा और सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कहा कि लगातार बारिश से ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है, भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और खासकर पहाड़ी व ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दोनों उपायुक्तों ने कहा कि इस तरह के खराब मौसम में स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, इसलिए एहतियातन यह फैसला लिया गया।
अरुणाचल प्रदेश: केंद्रीय टीम का दौरा, सैटेलाइट तस्वीरों से होगा नुकसान का आकलन
अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव निष्ठा तिवारी के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची। टीम ने राज्य सरकार को भरोसा दिलाया कि केंद्र की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी, हालांकि लगातार हो रही बारिश के चलते कई इलाके अब भी बाकी दुनिया से कटे हुए हैं। आठ सदस्यों वाले इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने निचला सियांग जिले समेत प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान की सीमा समझने की कोशिश की। हालांकि खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों की वजह से टीम सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ इलाकों तक पहुंच ही नहीं पाई। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में जहां जमीनी सर्वे संभव नहीं हो सका, वहां नुकसान का आकलन करने में सैटेलाइट तस्वीरों की मदद ली जाएगी।
उत्तराखंड के खटीमा में जलभराव, अगले दो दिन भारी बारिश की चेतावनी
उत्तराखंड के खटीमा में भी लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। शुक्रवार सुबह यहां घने बादल छाए रहे और सड़कों पर पानी भर गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को दिक्कत झेलनी पड़ी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक इस इलाके में आने वाले दिनों में भी सामान्य रूप से बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिजली चमकने के साथ आंधी-तूफान और भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिससे स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहना पड़ रहा है और लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
पश्चिम बंगाल: कूचबिहार में सबसे ज्यादा बारिश, कोलकाता में जलभराव
पश्चिम बंगाल के बड़े हिस्से में भारी मानसूनी बारिश हुई है। राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित कूचबिहार में शुक्रवार सुबह तक बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा 143 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी में भी सुबह के बाद तक बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वालों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ी। शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया, जिसमें साल्ट लेक इलाके का जाना-माना आईटी हब सेक्टर वी भी शामिल है, और वाहनों की रफ्तार बुरी तरह धीमी पड़ गई। मौसम कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण बंगाल में सबसे ज्यादा 96 मिलीमीटर बारिश दमदम में दर्ज हुई, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है।
त्रिपुरा: तीन जिले बाढ़ की चपेट में, 11,000 लोग राहत शिविरों में
त्रिपुरा में लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने तीन जिलों को बाढ़ की चपेट में ले लिया है, जिसके चलते करीब 11,000 लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। कांग्रेस नेता बिराजित सिन्हा ने राज्य के जल संसाधन विभाग पर आरोप लगाया कि स्लुइस गेट की मरम्मत समय पर नहीं की गई, जिसकी वजह से उनाकोटी, धलाई और खोवाई जिलों के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस बाढ़ में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि बारिश की रफ्तार कम होने के बाद उफनाई मनुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है, जिससे स्थानीय प्रशासन को कुछ राहत मिली है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सड़क मार्ग से पहुंचे मुर्शिदाबाद
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शुक्रवार को पद संभालने के बाद पहली बार मुर्शिदाबाद जिले के दौरे पर पहुंचे, लेकिन अनवरत मानसूनी बारिश की वजह से उनकी हवाई यात्रा रद्द करनी पड़ी और आखिरकार उन्हें सड़क के रास्ते ही वहां पहुंचना पड़ा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खराब मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री का यात्रा कार्यक्रम बदला गया और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही सड़क मार्ग से यात्रा की अनुमति दी गई।
महाराष्ट्र: वसई-विरार बाढ़ की असली वजह अनियोजित शहरीकरण, गणेश नाईक
महाराष्ट्र के वन एवं पालक मंत्री गणेश नाईक ने कहा है कि पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में हाल ही में आई बाढ़ के पीछे सिर्फ ज्यादा बारिश जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसकी असली वजह बेतरतीब शहरी विस्तार और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर हुआ अतिक्रमण है। उन्होंने बताया कि उपग्रह और ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर अगले 15 से 20 दिनों के भीतर बाढ़ से निपटने की एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी। गणेश नाईक गुरुवार को बुरी तरह प्रभावित इलाकों, नालासोपारा, नायगांव, सासुनवघर और सफाले, का दौरा करने पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत कर नुकसान का जायजा लिया।



















