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लाइव: देश के कई राज्यों में मानसून का कहर, बारिश से 10 से अधिक मौतें; हिमाचल के सिरमौर में स्कूल बंद — 10 जुलाई 2026लाइव
10 जुल॰ 2026, 9:20 am (45 दिन पहले)· 2

लाइव: देश के कई राज्यों में मानसून का कहर, बारिश से 10 से अधिक मौतें; हिमाचल के सिरमौर में स्कूल बंद — 10 जुलाई 2026

इस सप्ताह भीषण मानसून ने देश के बड़े हिस्से को तहस-नहस कर दिया है और बारिश से जुड़ी घटनाओं में 10 से अधिक लोगों की जान चली गई है। महाराष्ट्र के वसई-विरार से लेकर त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश तक, मूसलाधार बारिश ने हजारों लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और प्रशासन के सामने राहत-बचाव की भारी चुनौती खड़ी हो गई है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में गुरुवार से जारी तेज मानसूनी बारिश ने आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर पानी भरने, पेड़ उखड़ने, मकान गिरने और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी से बहुत भारी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है, जिसके बाद प्रशासन जगह-जगह हालात सामान्य करने में जुटा है। कई शहरों की रिहायशी कॉलोनियों में लोगों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, वहीं मुख्य सड़कों और हाईवे पर वाहनों की कतारें लंबी होती जा रही हैं। अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बाढ़ और भूस्खलन की ताजा घटनाएं सामने आई हैं, हिमाचल के किन्नौर में तो नदी का पानी बढ़ने से 100 फुट लंबा एक लोहे का पुल पूरी तरह डूब गया।

दिल्ली में सड़कें डूबीं, लेकिन हवा हुई साफ

राजधानी दिल्ली में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई इलाकों की सड़कों को तालाब बना दिया, दर्जनों पेड़ उखड़ गए और अलग-अलग जगहों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। दिलचस्प बात यह रही कि इसी भारी बारिश की वजह से दिल्ली को सितंबर 2023 के बाद पहली बार इतनी साफ हवा मिली। शहर के कुछ हिस्सों में तो 160 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। शुक्रवार सुबह भी आसमान बादलों से घिरा रहा और मौसम विभाग ने आंधी-तूफान व बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया। पिछले 24 घंटों में शहर में मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज हुई, जिसमें मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला पर सुबह 8:30 बजे तक 33.6 मिलीमीटर पानी बरसा। इसी दौरान लोधी रोड पर 33.7 मिलीमीटर, रिज पर 25.9 मिलीमीटर, आयानगर में 4.2 मिलीमीटर और पालम में 1.8 मिलीमीटर बारिश मापी गई। बारिश की इसी मार का असर हवा की गुणवत्ता पर भी पड़ा और शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स गिरकर सिर्फ 54 पर आ गया, जो दिल्लीवासियों के लिए राहत की बात है।

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उत्तर प्रदेश में बारिश ने ली 7 जानें, पश्चिमी जिलों में रेड अलर्ट

उत्तर प्रदेश में मानसून पूरी रफ्तार पकड़ चुका है और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने गुरुवार को राज्य के पश्चिमी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए अगले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इस बीच राज्य में बारिश से जुड़े हादसों में कम से कम सात लोगों की जान जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक ये मौतें संत कबीर नगर, कुशीनगर, बुलंदशहर, शामली और गाजियाबाद में अलग-अलग घटनाओं में हुईं।

संत कबीर नगर में खेतों में काम कर रही दो महिलाओं की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई। उपजिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मेहदावल तहसील के कत्या गांव की 17 साल की चांदनी और प्रतापपुर गांव की 60 साल की वार्षणा उस वक्त बिजली की चपेट में आईं, जब वे खेत में काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि घटना की रिपोर्ट मांगी गई है और दोनों पीड़ित परिवारों को सरकारी मुआवजा दिया जाएगा।

वहीं कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तड़ीभर गांव में 14 साल के राहुल कुमार की जान बिजली गिरने से चली गई। हादसे के वक्त वह खेत की मेढ़ पर खड़ा था और उसकी मां खेत से तोड़ी हुई सब्जियां उसे पकड़ा रही थीं। पुलिस के अनुसार परिजनों ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।

बारिश की मार सिर्फ खुले खेतों तक सीमित नहीं रही, मुजफ्फरनगर में तो कच्चे मकान ही बारिश का बोझ नहीं झेल पाए। मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खामपुर गांव में शुक्रवार तड़के भारी बारिश के दौरान एक कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। थानाध्यक्ष विपिन त्यागी ने बताया कि हादसे के वक्त 60 वर्षीय सरोज और उनके पति कृष्ण कुमार घर के अंदर सो रहे थे। सरोज की मौके पर ही मौत हो गई और उनका शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जबकि कृष्ण कुमार का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

गुजरात: सूरत में बाढ़ की समीक्षा, समुद्री पानी रोकने को 500 करोड़ रुपये की परियोजना

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को सूरत पहुंचकर बाढ़ के हालात की समीक्षा की। इस बैठक में उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय विधायक भी मौजूद रहे। बैठक के बाद संघवी ने संकट के दौरान एकजुट होकर काम करने के लिए सूरत के नागरिकों और राहत एजेंसियों की तारीफ की। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि 7 जुलाई को हुई भीषण बारिश शहर के इतिहास की अब तक की सबसे भारी बारिश थी, जिसकी वजह से सूरत के कई इलाके पानी में डूब गए थे। उन्होंने कहा कि करीब 7 से 8 इलाकों में बेहद ज्यादा जलभराव हुआ, लेकिन शहर के लोगों ने एक टीम की तरह काम करते हुए जहां भी मुमकिन हुआ, सरकारी एजेंसियों की मदद की। NDRF, SDRF और अन्य राहत दलों ने लोगों को सुरक्षित निकालकर दूसरी जगह पहुंचाने के लिए दिन-रात मेहनत की। मुख्यमंत्री ने बैठक में शहर के भीतर खाड़ी का पानी घुसने से रोकने वाली एक परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये की घोषणा भी की, ताकि भविष्य में सूरत को ऐसी बाढ़ से बचाया जा सके।

हिमाचल प्रदेश: सिरमौर और सोलन में स्कूल-आंगनवाड़ी बंद, नदियां उफान पर

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में पिछले 36 घंटों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरा जनजीवन थाम दिया है। हालात को देखते हुए पोंटा प्रशासन ने शुक्रवार को जिले के सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी का ऐलान कर दिया। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक जिले के ग्रामीण इलाकों में कई जगह भूस्खलन हुआ है। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी इंसान की जान जाने की खबर नहीं है, हालांकि गुरुवार देर शाम शिलाई के पास एक गहरी खाई में गिरने से एक बैल की मौत हो गई। जिले की प्रमुख नदियां, टोंस, यमुना, बाटा, गिरि और मारकंडा, दर्जनों छोटे नालों के साथ पूरे उफान पर हैं और प्रशासन ने लोगों से इन जल स्रोतों के आसपास न जाने की अपील की है। भारी बारिश और आंधी-तूफान की चेतावनी के बाद पोंटा के उपमंडलाधिकारी द्विज गोयल ने पोंटा उपमंडल के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने का आदेश जारी किया।

इसी तरह सिरमौर के साथ-साथ सोलन जिले में भी शुक्रवार को सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए। सिरमौर की उपायुक्त प्रियंका वर्मा और सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कहा कि लगातार बारिश से ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही मुश्किल हो गई है, भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और खासकर पहाड़ी व ग्रामीण इलाकों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दोनों उपायुक्तों ने कहा कि इस तरह के खराब मौसम में स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है, इसलिए एहतियातन यह फैसला लिया गया।

अरुणाचल प्रदेश: केंद्रीय टीम का दौरा, सैटेलाइट तस्वीरों से होगा नुकसान का आकलन

अरुणाचल प्रदेश में हाल ही में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव निष्ठा तिवारी के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची। टीम ने राज्य सरकार को भरोसा दिलाया कि केंद्र की ओर से हर संभव मदद दी जाएगी, हालांकि लगातार हो रही बारिश के चलते कई इलाके अब भी बाकी दुनिया से कटे हुए हैं। आठ सदस्यों वाले इस उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने निचला सियांग जिले समेत प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर नुकसान की सीमा समझने की कोशिश की। हालांकि खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों की वजह से टीम सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ इलाकों तक पहुंच ही नहीं पाई। ऐसे दुर्गम क्षेत्रों में जहां जमीनी सर्वे संभव नहीं हो सका, वहां नुकसान का आकलन करने में सैटेलाइट तस्वीरों की मदद ली जाएगी।

उत्तराखंड के खटीमा में जलभराव, अगले दो दिन भारी बारिश की चेतावनी

उत्तराखंड के खटीमा में भी लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। शुक्रवार सुबह यहां घने बादल छाए रहे और सड़कों पर पानी भर गया, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को दिक्कत झेलनी पड़ी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक इस इलाके में आने वाले दिनों में भी सामान्य रूप से बादल छाए रहने के साथ बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिजली चमकने के साथ आंधी-तूफान और भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है, जिससे स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रहना पड़ रहा है और लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

पश्चिम बंगाल: कूचबिहार में सबसे ज्यादा बारिश, कोलकाता में जलभराव

पश्चिम बंगाल के बड़े हिस्से में भारी मानसूनी बारिश हुई है। राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित कूचबिहार में शुक्रवार सुबह तक बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा 143 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी में भी सुबह के बाद तक बारिश थमने का नाम नहीं ले रही थी, जिससे स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वालों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ी। शहर के कई हिस्सों में पानी भर गया, जिसमें साल्ट लेक इलाके का जाना-माना आईटी हब सेक्टर वी भी शामिल है, और वाहनों की रफ्तार बुरी तरह धीमी पड़ गई। मौसम कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण बंगाल में सबसे ज्यादा 96 मिलीमीटर बारिश दमदम में दर्ज हुई, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है।

त्रिपुरा: तीन जिले बाढ़ की चपेट में, 11,000 लोग राहत शिविरों में

त्रिपुरा में लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने तीन जिलों को बाढ़ की चपेट में ले लिया है, जिसके चलते करीब 11,000 लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी। कांग्रेस नेता बिराजित सिन्हा ने राज्य के जल संसाधन विभाग पर आरोप लगाया कि स्लुइस गेट की मरम्मत समय पर नहीं की गई, जिसकी वजह से उनाकोटी, धलाई और खोवाई जिलों के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस बाढ़ में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि बारिश की रफ्तार कम होने के बाद उफनाई मनुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है, जिससे स्थानीय प्रशासन को कुछ राहत मिली है।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सड़क मार्ग से पहुंचे मुर्शिदाबाद

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी शुक्रवार को पद संभालने के बाद पहली बार मुर्शिदाबाद जिले के दौरे पर पहुंचे, लेकिन अनवरत मानसूनी बारिश की वजह से उनकी हवाई यात्रा रद्द करनी पड़ी और आखिरकार उन्हें सड़क के रास्ते ही वहां पहुंचना पड़ा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि खराब मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री का यात्रा कार्यक्रम बदला गया और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही सड़क मार्ग से यात्रा की अनुमति दी गई।

महाराष्ट्र: वसई-विरार बाढ़ की असली वजह अनियोजित शहरीकरण, गणेश नाईक

महाराष्ट्र के वन एवं पालक मंत्री गणेश नाईक ने कहा है कि पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में हाल ही में आई बाढ़ के पीछे सिर्फ ज्यादा बारिश जिम्मेदार नहीं है, बल्कि इसकी असली वजह बेतरतीब शहरी विस्तार और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर हुआ अतिक्रमण है। उन्होंने बताया कि उपग्रह और ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर अगले 15 से 20 दिनों के भीतर बाढ़ से निपटने की एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी। गणेश नाईक गुरुवार को बुरी तरह प्रभावित इलाकों, नालासोपारा, नायगांव, सासुनवघर और सफाले, का दौरा करने पहुंचे, जहां उन्होंने स्थानीय निवासियों से सीधे बातचीत कर नुकसान का जायजा लिया।

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  1. वसई-विरार बाढ़ की असली वजह अनियोजित शहरीकरण और नालों पर अतिक्रमण: गणेश नाईक

    महाराष्ट्र के वन एवं पालक मंत्री गणेश नाईक ने कहा है कि पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में हाल ही में जो बाढ़ आई, उसका मुख्य कारण अत्यधिक वर्षा नहीं, बल्कि बेतरतीब शहरी विस्तार और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर हुए अतिक्रमण हैं। मंत्री ने बताया कि उपग्रह एवं ड्रोन सर्वेक्षण के आधार पर 15 से 20 दिनों के भीतर बाढ़ से निपटने की एक विस्तृत कार्य योजना तैयार की जाएगी। गणेश नाईक ने गुरुवार (9 जुलाई) को बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों — नालासोपारा, नायगांव, सासुनवघर और सफाले — का दौरा कर वहां के निवासियों से सीधे बातचीत की और नुकसान का जायजा लिया।
  2. लगातार बारिश ने रोकी उड़ान, पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी सड़क मार्ग से पहुंचे मुर्शिदाबाद

    पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (10 जुलाई) को पद संभालने के बाद पहली बार मुर्शिदाबाद जिले का दौरा किया, लेकिन अनवरत मानसूनी बारिश के कारण उनकी हवाई यात्रा रद्द करनी पड़ी और वे सड़क के रास्ते वहां पहुंचे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। राज्य के बड़े भूभाग पर भारी मानसूनी बौछारें पड़ीं, जिनमें उत्तरी बंगाल का कूच बिहार सबसे अधिक प्रभावित रहा — शुक्रवार (10 जुलाई) की सुबह तक बीते 24 घंटों में वहां सर्वाधिक 143 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अधिकारी ने बताया कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के मद्देनजर मुख्यमंत्री का यात्रा कार्यक्रम संशोधित किया गया और पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही सड़क यात्रा की अनुमति दी गई।
  3. त्रिपुरा के तीन जिले बाढ़ में डूबे, करीब 11,000 लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर

    लगातार कई दिनों की मूसलाधार बारिश से त्रिपुरा के तीन जिलों में बाढ़ के हालात बन गए हैं, जिससे करीब 11,000 लोगों को राहत शिविरों में आश्रय लेना पड़ा है। शुक्रवार (10 जुलाई) को एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। कांग्रेस नेता बिराजित सिन्हा ने राज्य के जल संसाधन विभाग पर आरोप लगाया कि उसने स्लुइस गेट की मरम्मत समय पर नहीं कराई, जिसके चलते उनाकोटी, धलाई और खोवाई जिलों के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई। हालांकि, अब तक किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि बारिश की रफ्तार थमने के बाद उफनाई मनुन नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे घटने लगा है।
  4. हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश का कहर, सिरमौर और सोलन में सभी शिक्षण संस्थान बंद

    अधिकारियों ने जानकारी दी है कि हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और सोलन जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते शुक्रवार (10 जुलाई) को सभी सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। सिरमौर की उपायुक्त (DC) प्रियंका वर्मा और सोलन के उपायुक्त (DC) मनमोहन शर्मा द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों में कहा गया है कि लगातार बारिश के कारण ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही बाधित हो रही है, भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है और विशेष रूप से ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस तरह के खराब मौसम से जिलों में स्कूलों के आने-जाने वाले छात्रों के जीवन और सुरक्षा को खतरा होने की आशंका है।
  5. दिल्ली में बारिश और आंधी-तूफान को लेकर IMD का येलो अलर्ट, सुधरी हवा की सेहत; AQI गिरकर 54 पर पहुंचा

    राष्ट्रीय राजधानी में एक दिन पहले हुई भारी बारिश के बाद शुक्रवार सुबह दिल्ली में आसमान बादलों से घिरा रहा। इस बीच IMD ने शहर में आंधी-तूफान और बारिश के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में पिछले 24 घंटों में मध्यम बारिश दर्ज की गई है। शहर के मुख्य मौसम केंद्र सफदरजंग वेधशाला ने सुबह 8:30 बजे तक 33.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की। इसी अवधि के दौरान लोधी रोड में 33.7 मिलीमीटर, रिज में 25.9 मिलीमीटर, आयानगर में 4.2 मिलीमीटर और पालम में 1.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
  6. पश्चिम बंगाल में मूसलाधार बारिश का दौर जारी, IMD ने आने वाले दिनों में और बारिश होने की जताई आशंका

    पश्चिम बंगाल के एक बड़े हिस्से में भारी मानसूनी बारिश हुई है, जिसमें राज्य के उत्तरी हिस्से में स्थित कूचबिहार में शुक्रवार (10 जुलाई) सुबह तक पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 143 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश से सराबोर राज्य की राजधानी में सुबह के बाद भी बारिश जारी रहने से स्कूली बच्चों और दफ्तर जाने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसकी वजह से शहर के कई हिस्सों, जिनमें साल्ट लेक क्षेत्र का IT हब सेक्टर V भी शामिल है, में जलभराव हो गया और वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। मौसम कार्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण बंगाल में सबसे अधिक 96 मिलीमीटर बारिश दमदम में दर्ज की गई, जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है।
  7. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भारी बारिश के बीच मकान ढहा, महिला की मौत, पति घायल

    मुजफ्फरनगर जिले में शुक्रवार (10 जुलाई) तड़के भारी बारिश के दौरान एक कच्चा मकान गिरने से 60 वर्षीय एक महिला की मौत हो गई और उसका पति घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। थानाध्यक्ष (SHO) विपिन त्यागी ने बताया कि यह घटना मंसूरपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खामपुर गांव में उस समय हुई, जब सरोज (60) और उनके पति कृष्ण कुमार अपने घर के अंदर सो रहे थे। उन्होंने बताया कि सरोज के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि कृष्ण कुमार का एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
  8. उत्तराखंड के खटीमा में भारी बारिश से सड़कों पर भरा पानी, मौसम विभाग ने और बारिश की जताई संभावना

    खटीमा में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है, जहां शुक्रवार (10 जुलाई) की सुबह घने बादल छाए रहे। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, इस क्षेत्र में सामान्य रूप से बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के दौरान बिजली चमकने के साथ आंधी-तूफान आने और भारी से बहुत भारी बारिश होने की भी चेतावनी दी है।
  9. उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से हाहाकार, कम से कम 7 लोगों की मौत; पश्चिमी जिलों के लिए IMD का रेड अलर्ट

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने गुरुवार (9 जुलाई) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया, जिसमें अगले 24 घंटों में भारी से बहुत भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। इस बीच, तेज हुई मानसूनी गतिविधियों के कारण राज्य भर में कम से कम सात लोगों की जान चली गई और भारी तबाही हुई है। अधिकारियों ने बताया कि ये मौतें संत कबीर नगर, कुशीनगर, बुलंदशहर, शामली और गाजियाबाद में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में हुईं। संत कबीर नगर में अलग-अलग गांवों में बिजली गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। उप-जिलाधिकारी (SDM) अरुण कुमार ने बताया कि मेहदावल तहसील में खेतों में काम करने के दौरान कत्या गांव की चांदनी (17) और प्रतापपुर गांव की वरसाना (60) की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी।
  10. अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम ने बाढ़ प्रभावित अरुणाचल प्रदेश का किया दौरा; दुर्गम क्षेत्रों के नुकसान का आकलन करने में सैटेलाइट तस्वीरों से मिलेगी मदद

    गृह मंत्रालय (MHA) की संयुक्त सचिव निष्ठा तिवारी के नेतृत्व में एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (IMCT) ने हाल ही में आई अचानक बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम ने राज्य को केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया, जबकि लगातार हो रही बारिश के कारण कई इलाके अभी भी कटे हुए हैं। इस आठ सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नुकसान की सीमा का आकलन करने के लिए निचला सियांग जिले सहित प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। हालांकि, खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों के कारण यह टीम सबसे गंभीर रूप से प्रभावित कुछ स्थानों तक नहीं पहुंच सकी।
  11. हिमाचल के सिरमौर में भारी बारिश; पोंटा में स्कूल बंद करने का आदेश

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कई इलाकों में पिछले 36 घंटों से हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसे देखते हुए पोंटा प्रशासन ने शुक्रवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जिले के ग्रामीण इलाकों में कई जगहों पर भूस्खलन हुआ है। हालांकि, अब तक किसी इंसान की जान जाने की खबर नहीं है, लेकिन गुरुवार देर शाम शिलाई के पास एक गहरी खाई में गिरने से एक बैल की मौत हो गई। सिरमौर की प्रमुख नदियां, जिनमें टोंस, यमुना, बाटा, गिरि और मारकंडा शामिल हैं, दर्जनों नालों के साथ उफान पर हैं। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों को इन जल स्रोतों से दूर रहने की हिदायत दी है। IMD द्वारा भारी बारिश और आंधी-तूफान को लेकर जारी की गई चेतावनी के बाद, पोंटा के उपमंडलाधिकारी द्विज गोयल ने हिमाचल के सिरमौर जिले के पोंटा उपमंडल के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने का निर्देश दिया है।
  12. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत में बाढ़ के हालातों की समीक्षा की

    गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में सूरत में प्रशासन के अधिकारियों और विधायकों के साथ बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के बाद गुजरात के उप मुख्यमंत्री ने बाढ़ के संकट के दौरान एकजुट होकर काम करने के लिए सूरत के नागरिकों और राहत एजेंसियों की सराहना की। पत्रकारों से बात करते हुए संघवी ने कहा कि 7 जुलाई को हुई भीषण बारिश के कारण सूरत के कई क्षेत्रों को बाढ़ का सामना करना पड़ा। शहर के इतिहास में यह अब तक की सबसे भारी बारिश थी। सूरत के लोगों ने इस विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए एक टीम की तरह काम किया और जहां भी संभव हुआ, सरकारी एजेंसियों की मदद की। उन्होंने बताया कि यह एक कठिन समय था और करीब 7-8 इलाकों में भारी जलभराव हुआ था। NDRF, SDRF और अन्य राहत एजेंसियों ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और दूसरी जगह भेजने के लिए कड़ी मेहनत की। मुख्यमंत्री ने आज सूरत में समीक्षा बैठक की और शहर में खाड़ी का पानी घुसने से रोकने वाली एक परियोजना के लिए ₹500 करोड़ की घोषणा की है।
  13. उत्तर प्रदेश में भारी बारिश का कहर, कम से कम 7 लोगों की मौत; पश्चिमी जिलों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी

    उत्तर प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां तेज होने के बीच IMD ने गुरुवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए 'रेड अलर्ट' जारी किया है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका जताई है। राज्य में बारिश जनित हादसों में कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि संत कबीर नगर, कुशीनगर, बुलंदशहर, शामली और गाजियाबाद में अलग-अलग हादसों में ये मौतें दर्ज की गई हैं। संत कबीर नगर में अलग-अलग गांवों में बिजली गिरने से दो महिलाओं की मौत हो गई। उपजिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि मेहदावल तहसील के कत्या गांव की चांदनी (17) और प्रतापपुर गांव की वार्षणा (60) की उस समय मौत हो गई जब वे खेतों में काम कर रही थीं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है और पीड़ित परिवारों को सरकारी सहायता मुहैया कराई जाएगी। वहीं, कुशीनगर के विशुनपुरा थाना क्षेत्र के तड़ीभर गांव में खेत की मेढ़ पर खड़े राहुल कुमार (14) की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई, जब उसकी मां खेत से तोड़ी गई सब्जियां उसे पकड़ा रही थीं। पुलिस के मुताबिक, परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
  14. देश भर में मानसूनी बारिश का कहर, विभिन्न हादसों में 10 से अधिक लोगों की मौत

    देश के कई हिस्सों में गुरुवार को भारी मानसूनी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव, पेड़ों के गिरने, संपत्ति को नुकसान पहुंचने और सामान्य जनजीवन प्रभावित होने के चलते देश भर में बारिश से जुड़े हादसों में 10 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। मौसम विभाग द्वारा और अधिक बारिश के अनुमान के बीच प्रशासन सामान्य स्थिति बहाल करने में जुटा हुआ है। कई शहरों के रिहायशी इलाकों में लोग घुटनों तक पानी में चलने को मजबूर हैं और मुख्य सड़कों व राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार थम गई है। अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से बाढ़ और भूस्खलन की नई घटनाएं सामने आई हैं, जहां किन्नौर में नदी का जलस्तर बढ़ने से 100 फुट लंबा लोहे का पुल पानी में डूब गया। दिल्ली में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने सड़कों को जलमग्न कर दिया, पेड़ उखड़ गए और जगह-जगह लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालांकि, इस भारी बारिश की वजह से राजधानी को सितंबर 2023 के बाद से सबसे साफ हवा मिली है, जहां शहर के कुछ हिस्सों में 160 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई।

सवाल-जवाब

देशभर में मानसूनी बारिश से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
देश के अलग-अलग राज्यों में बारिश से जुड़े हादसों में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से कम से कम सात मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई हैं।
उत्तर प्रदेश में रेड अलर्ट क्यों जारी किया गया है?
IMD ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले 24 घंटों में अत्यधिक भारी बारिश की आशंका के चलते रेड अलर्ट जारी किया है, क्योंकि राज्य में बारिश जनित हादसों में पहले ही सात लोगों की जान जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और सोलन में स्कूल क्यों बंद किए गए?
लगातार मूसलाधार बारिश से भूस्खलन का खतरा बढ़ने और ग्रामीण सड़कों पर आवाजाही मुश्किल होने के चलते बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए दोनों जिलों में सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं।
सूरत के लिए गुजरात सरकार ने क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सूरत शहर में खाड़ी का पानी घुसने से रोकने वाली परियोजना के लिए 500 करोड़ रुपये की घोषणा की है।
त्रिपुरा में बाढ़ से कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
त्रिपुरा के तीन जिलों, उनाकोटी, धलाई और खोवाई में बाढ़ के हालात बने हैं, जिसकी वजह से करीब 11,000 लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
वसई-विरार में बाढ़ की असली वजह क्या बताई गई है?
महाराष्ट्र के मंत्री गणेश नाईक के मुताबिक इसकी वजह सिर्फ भारी बारिश नहीं, बल्कि अनियोजित शहरीकरण और जल निकासी मार्गों पर हुआ अतिक्रमण है।
भारी बारिश के बावजूद दिल्ली की हवा कैसे साफ हुई?
लगातार हुई मानसूनी बारिश ने प्रदूषण को धो डाला, जिससे दिल्ली का AQI गिरकर 54 पर आ गया, जो सितंबर 2023 के बाद सबसे साफ हवा है।
अरुणाचल प्रदेश में केंद्रीय टीम को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ा?
खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों के चलते आठ सदस्यीय टीम कुछ सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाई, इसलिए वहां सैटेलाइट तस्वीरों से नुकसान का आकलन किया जाएगा।
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