मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और रणनीतिक जलमार्गों पर मंडराते खतरों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, क्योंकि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदु होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों का आवागमन काफी हद तक बाधित हुआ है। ईरान और ओमान के बीच जलमार्ग को फिर से सुरक्षित रूप से खोलने के लिए बातचीत जारी है, लेकिन ईरान द्वारा मित्रवत न समझे जाने वाले जहाजों पर कड़े प्रतिबंध लगाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने के प्रस्तावों से कमोडिटी बाजारों में चिंताएं बढ़ गई हैं।
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा 99 सेंट यानी 1.2 प्रतिशत बढ़कर 83.48 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा में 85 सेंट यानी 1.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 78.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इससे पहले गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को भी तेल की वायदा कीमतों में 3 डॉलर प्रति बैरल से अधिक का उछाल आया था। बाजार में यह घबराहट उस समय फैली जब ईरान की संसद में एक नए कानून पर विचार किया जाने लगा, जिसका उद्देश्य अमेरिका और इजराइल से जुड़े पोतों के इस मार्ग से गुजरने पर पूरी तरह से रोक लगाना है। ऐतिहासिक रूप से, फरवरी 2026 के अंत में युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था।
होर्मुज़ में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
समुद्री जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाली डेटा एजेंसी केपलर के आंकड़ों से पता चलता है कि होर्मुज़ जलमार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की संख्या में नाटकीय कमी आई है। सोमवार, 3 अगस्त से गुरुवार, 6 अगस्त 2026 के बीच इस मार्ग से केवल 33 वाणिज्यिक जहाज गुजरे, जबकि पिछले सप्ताह की इसी अवधि में यह आंकड़ा 50 जहाजों का था। इस गिरावट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर डाला है, क्योंकि दुनिया भर के ऊर्जा व्यापारी इस जलमार्ग के भविष्य को लेकर ईरान और ओमान के बीच हो रही चर्चाओं के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
केपलर के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को स्थिति और भी अधिक नाजुक हो गई जब पूरे दिन में मात्र चार जहाजों ने इस संकरे जलमार्ग को पार किया। इन चार जहाजों में इराक के बसरा बंदरगाह से लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर जा रहा एक विशाल टैंकर निसोस की भी शामिल था। इसके अलावा केवल दो तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) टैंकर और एक छोटा बल्क कैरियर ही इस मार्ग से सुरक्षित निकल सके। जहाजों की इस सीमित आवाजाही से साफ है कि अधिकांश शिपिंग कंपनियां जोखिम लेने से बच रही हैं।
यमन में हिंसा का भयावह दौर और 58 सैनिकों की मौत
होर्मुज़ में पैदा हुए गतिरोध के साथ-साथ यमन के गृहयुद्ध में भी हिंसा का सबसे भयावह दौर देखा जा रहा है। सैन्य सूत्रों के अनुसार, गुरुवार को ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों ने यमनी सरकारी सेना के ठिकानों पर सिलसिलेवार मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिसमें कम से कम 58 सरकारी सैनिकों की मौत हो गई। पिछले चार वर्षों के दौरान यमन के गृहयुद्ध में एक ही दिन में सैनिकों के मारे जाने की यह सबसे बड़ी घटना है। ये हमले उस समय हुए हैं जब यमन का यह आंतरिक संघर्ष तेजी से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील होता जा रहा है।
हूथी विद्रोहियों ने पड़ोसी देश सऊदी अरब से लगती सीमा के आसपास और यमन के आंतरिक हिस्सों में भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। सऊदी अरब की सेना के बयानों के अनुसार, यमन सीमा से सटे दक्षिणी क्षेत्र नजरान में हुए हूथी मिसाइल हमलों में 4 साल के बच्चे समेत 11 नागरिक घायल हो गए। इन हमलों से कुछ घंटे पहले विद्रोहियों ने मध्य और पूर्वी यमन में अन्य अभियानों की जिम्मेदारी ली थी, जहां 30 से अधिक सरकारी सैनिक मारे गए थे और 50 से अधिक जख्मी हुए थे। हूथी सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने एक बयान में कहा कि यह कार्रवाई सऊदी अरब द्वारा संचालित सैन्य गतिविधियों का सीधा जवाब थी।
वाशिंगटन के सामने रणनीतिक दुविधा
यमन में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आंशिक रूप से बंद होने से वाशिंगटन की कूटनीतिक चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं। अमेरिकी प्रशासन और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए इस संकट का समाधान खोजना एक कठिन काम साबित हो रहा है। पांच महीने से भी अधिक समय पहले इजराइल के साथ मिलकर शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप को अब अपनी गिरती लोकप्रियता, घरेलू अर्थव्यवस्था की सुस्ती और अमेरिकी सैन्य हथियारों के घटते भंडार जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, भले ही वे सार्वजनिक रूप से इन चिंताओं को खारिज करते रहे हों।
होर्मुज़ जलमार्ग को फिर से खुलवाने और व्यापार बहाल करने के लिए ईरान के साथ किसी भी समझौते पर पहुंचने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को अपने सख्त रुख में रियायतें देनी पड़ सकती हैं। जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के दौरान विदेश विभाग के सलाहकार रहे एलियट कोहेन ने इस राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा, "वह दुनिया को विजेताओं और हारने वालों में बांटते हैं, और यह कदम उन्हें हारने वाले के रूप में दिखाएगा।" जानकारों का मानना है कि क्षेत्रीय व्यापार को सुचारू करने के लिए कूटनीतिक समझौतों की राह अपनाना ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट को शांत करने का एकमात्र विकल्प बचा है।



















