ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए तेहरान में लाखों लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा है। इस विशाल अंतिम संस्कार समारोह के शुरू होने के साथ ही देश की सरकार इसे अपने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय विरोधियों के सामने राष्ट्रीय एकजुटता और सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत कर रही है। ईरानी अधिकारियों के आकलनों के अनुसार, तीन दिनों की इस श्रद्धांजलि अवधि के दौरान केवल देश की राजधानी तेहरान में ही डेढ़ करोड़ से लेकर दो करोड़ लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। यह ऐतिहासिक और भावभीनी विदाई उस कद्दावर नेता को दी जा रही है जिन्होंने लगभग साढ़े तीन दशकों तक ईरान की बागडोर संभाली और उसे एक विशिष्ट दिशा दी।
अली ख़ामेनेई की स्मृति में पूरे ईरान में कुल छह दिनों के राष्ट्रीय शोक समारोह का भव्य आयोजन किया गया है। वे वर्ष 1989 से इस इस्लामी गणराज्य के सबसे शक्तिशाली और शीर्ष पद पर आसीन थे। 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त सैन्य अभियान के बिल्कुल शुरुआती दिन, 86 वर्ष की आयु में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस अप्रत्याशित घटना के बाद से ही पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य सरगर्मियां बेहद तेज़ हो गई हैं, और इस जनाजे को ईरान अपनी संप्रभुता के प्रतीक के रूप में प्रदर्शित कर रहा है।
संसद अध्यक्ष ग़ालीबाफ़ का बयान और अमेरिका को संदेश
इस बड़े घटनाक्रम के बीच ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाग़िर ग़ालीबाफ़ ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक में देश की भावी आर्थिक और रणनीतिक नीतियों का संकेत दिया है। उज़्बेकिस्तान के संसद अध्यक्ष के साथ हुई एक द्विपक्षीय बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच हुए भीषण सैन्य टकराव के बाद अब जो नए क्षेत्रीय समीकरण बने हैं, उन्हें अमेरिका को जमीनी हकीकत मानकर स्वीकार करना होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि युद्ध के बाद की परिस्थितियों ने वाशिंगटन को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया है और वर्तमान हालात पहले की तुलना में कहीं अधिक स्थिर और बेहतर हुए हैं।
मोहम्मद बाग़िर ग़ालीबाफ़ ने कहा कि इस नए कूटनीतिक माहौल में दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक संबंधों को एक बार फिर से और अधिक विस्तार दिया जा सकता है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि इस बदलते परिदृश्य में ईरान पर लगे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने के लिए एक ठोस जमीन तैयार होगी। इसके साथ ही उन्होंने पारगमन और वाणिज्यिक सहयोग के नए रास्ते खुलने की बात की। उनके अनुसार, फ़ारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान के साझा प्रबंधन और इस संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिकी दखलंदाज़ी में आने वाली कमी से व्यापारिक पारगमन सहयोग को बढ़ाने के बेहतरीन अवसर उपलब्ध होंगे।
अंतिम संस्कार की भव्य शुरुआत और ग्रैंड मोसल्ला का दृश्य
आधिकारिक कार्यक्रम के शुरू होने से पहले ही तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में हजारों की संख्या में शोकाकुल नागरिकों का आगमन शुरू हो गया था। इस विशाल परिसर का मुख्य प्रांगण पूरी तरह से लोगों से भर गया, जिसके चलते प्रशासन को पूरी राजधानी में सख्त यातायात प्रतिबंध लागू करने पड़े। बड़ी संख्या में लोग इस श्रद्धांजलि सभा में शामिल होने के लिए कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके पहुंचे। शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को पूरे देश से जुटे लोगों ने अपने सर्वोच्च नेता को अंतिम विदाई दी। इस एक सप्ताह लंबे चलने वाले अंत्येष्टि कार्यक्रमों की शुरुआत के अवसर पर न केवल ईरान के वरिष्ठ सरकारी और सैन्य अधिकारी उपस्थित थे, बल्कि दुनिया के कई देशों के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधियों ने भी तेहरान पहुंचकर दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर के दर्शन किए।
अली ख़ामेनेई के ताबूत को ईरान के राष्ट्रीय ध्वज से पूरी तरह ढका गया था और उनकी पहचान मानी जाने वाली पारंपरिक काली पगड़ी को ताबूत के ऊपर रखा गया था। शनिवार, 4 जुलाई को इस धार्मिक परिसर में राष्ट्रगान की धुन, शोक गीतों और पवित्र कुरान की आयतों के पाठ के साथ आधिकारिक अंतिम संस्कार शुरू हुआ। इस मुख्य ताबूत को उनके परिवार के उन चार अन्य सदस्यों के ताबूतों के साथ एक विशाल काले मंच पर स्थापित किया गया था, जो मक्का में स्थित इस्लाम के पवित्र स्थल काबा की आकृति जैसा बनाया गया था। इस ऐतिहासिक विदाई के दौरान उपस्थित लाखों लोग अपने हाथों में दिवंगत नेता की तस्वीरें और राष्ट्रीय झंडे लिए हुए थे।
पश्चिमी प्रभुत्व का क्षरण और नया वैश्विक परिदृश्य
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यानी वर्ष 1945 से ही वैश्विक मामलों पर अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के देशों की पकड़ को एक अकाट्य सच माना जाता रहा है। यह व्यवस्था उनकी भारी सैन्य क्षमता, तकनीकी श्रेष्ठता और आर्थिक प्रभाव की मजबूत बुनियाद पर खड़ी थी, जो लंबे समय तक निर्विवाद रही। हालांकि, हाल के वर्षों में चीन के अभूतपूर्व आर्थिक और सैन्य उभार के साथ-साथ कई मध्यम शक्तियों की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं ने अमेरिका की इस अजेय छवि को काफी प्रभावित किया है। संघर्षों की मार झेल रहे ईरान के संदर्भ में इस शक्ति संतुलन का संदेश बहुत गहरा है, और दुनिया की कोई भी महाशक्ति इस जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि
दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए तेहरान में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों और राजनीतिक नेताओं का तांता लगा हुआ है। भारत से एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती भी तेहरान पहुंचीं। उन्होंने अयातुल्लाह अली ख़ामेनेई को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस क्षण को बेहद हृदयविदारक लेकिन अपने लिए एक सम्मान की बात बताया। उन्होंने दिवंगत नेता को याद करते हुए कहा कि वे एक ऐसे सम्मानित व्यक्तित्व थे जिन्होंने हमेशा स्थापित धाराओं के विपरीत खड़े होने और दुनिया के दबे-कुचले लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने का अद्भुत साहस दिखाया। महबूबा मुफ़्ती ने उस ऐतिहासिक हुसैनियाह जमारान स्थल का भी दौरा किया, जहां माना जाता है कि अली ख़ामेनेई ने शहादत प्राप्त की थी।
इसी क्रम में, शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में एक बेहद उच्च-स्तरीय राजनयिक दल तेहरान पहुंचा। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में शहबाज़ शरीफ़ ने इस्लाम के प्रचार-प्रसार और मुस्लिम जगत के उत्थान में अली ख़ामेनेई के महान योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अयातुल्लाह ख़ामेनेई ने असाधारण प्रज्ञा, अद्वितीय बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के साथ कई दशकों तक ईरानी राष्ट्र का कुशल मार्गदर्शन किया और उनका यह गहरा प्रभाव आने वाली पीढ़ियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा।
लेबनान और पाकिस्तान की अमेरिका से कूटनीतिक बातचीत
मध्य पूर्व के संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास भी समानांतर रूप से चल रहे हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने अमेरिका से अपील की है कि वह बेरूत के साथ अपनी प्रतिबद्धताओं पर अडिग रहे। यह अपील अमेरिका की मध्यस्थता से तैयार हुए उस ऐतिहासिक ढांचागत समझौते के बाद आई है, जिसका उद्देश्य इज़राइल और हिज़बुल्लाह के बीच चल रहे युद्ध को स्थायी रूप से रोकना है। वॉशिंगटन में तय इस समझौते के नियमों के तहत ईरान समर्थित सशस्त्र संगठन हिज़बुल्लाह के निरस्त्रीकरण, दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी और वहां लेबनानी सेना की तैनाती की योजना शामिल है, जिसकी शुरुआत दो पायलट क्षेत्रों से होनी है। हालांकि, हिज़बुल्लाह ने इस समझौते को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि इसमें इज़राइली सैनिकों की वापसी की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है। अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बधाई देते हुए जोसेफ़ औन ने अनुरोध किया कि अमेरिका हमेशा लेबनान के न्यायसंगत मुद्दों, वहां की सेना और जनता के साथ खड़ा रहे।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक पत्र लिखा है। शनिवार, 4 जुलाई को जारी जानकारी के अनुसार, इस पत्र में उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग और आतंकवाद के खात्मे जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच एक व्यवस्थित और दीर्घकालिक सहभागिता का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ की बधाई देते हुए आसिफ़ अली ज़रदारी ने ईरान के साथ चल रही जटिल वार्ता प्रक्रिया में पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका सौंपने पर अमेरिका के विश्वास का आभार जताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया के इस बड़े संकट का एकमात्र समाधान केवल कूटनीति, सार्थक संवाद और आपसी तनाव को कम करने से ही मुमकिन है।
तुर्किये के राष्ट्रपति की इज़राइल को सख्त चेतावनी
तुर्किये के राष्ट्रपति तैयप एर्दोआन ने इस्तांबुल में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की उपस्थिति में एक साझा प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि इज़राइल को अमेरिका और ईरान के बीच बनी शांति सहमति को किसी भी कीमत पर नष्ट करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय देशों के सक्रिय समर्थन और इच्छाशक्ति के बिना मध्य पूर्व में कोई भी शांति पहल लंबे समय तक टिकी नहीं रह सकती। तैयप एर्दोआन ने कहा कि उनकी सरकार अमेरिका-ईरान समझौते को असफल करने की इज़राइली प्रशासन की हर कोशिश पर पैनी नजर रख रही है और वर्तमान इज़राइली सरकार की युद्धप्रिय नीतियों को इस पूरे भूगोल को बारूद और खून के दलदल में धकेलने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
हिज़बुल्लाह और हमास के प्रतिनिधियों की ईरान के विदेश मंत्री से मुलाकात
अंतिम संस्कार के इस अवसर पर ईरान समर्थित संगठनों हिज़बुल्लाह और हमास के शीर्ष प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंचे। इन प्रतिनिधियों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुलाकात की। हिज़बुल्लाह के शिष्टमंडल का नेतृत्व संगठन के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद फ़नीश कर रहे थे, जिसमें शहीद और घायल लड़ाकों के परिवार भी शामिल थे। वहीं, हमास के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उसके राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख मोहम्मद दरवीश ने की, जिसमें ब्यूरो के वरिष्ठ सदस्य बासेम नईम भी उपस्थित थे। इस बैठक में भविष्य की रणनीतियों और आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की गई।
डोनाल्ड ट्रंप का खुलासा और बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रस्तावित बैठक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विशेष मीडिया इंटरव्यू में बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उनसे व्हाइट हाउस में मुलाकात का विशेष अनुरोध किया है। डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, यह बैठक अगले सप्ताह तुर्की में होने वाले NATO शिखर सम्मेलन के समाप्त होने के तुरंत बाद आयोजित की जा सकती है। उन्होंने दोनों नेताओं के आपसी संबंधों पर बात करते हुए यह भी कहा कि उनके संबंध बहुत अच्छे हैं और बेंजामिन नेतन्याहू को अच्छी तरह से पता है कि असली बॉस कौन है, जिसमें उनका इशारा स्वयं अपनी ओर था। हालांकि, इज़राइल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि 7 और 8 जुलाई को डोनाल्ड ट्रंप की तुर्की यात्रा के कारण यह बैठक उसके अगले सप्ताह में भी हो सकती है।
होर्मुज़ जलमार्ग शुल्क और दक्षिणी लेबनान में ताज़ा सैन्य टकराव
चीन के बीजिंग में आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम में बोलते हुए चीन में नियुक्त ईरान के राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने एक बड़ा नीतिगत फैसला साझा किया। उन्होंने बताया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी व्यावसायिक जहाजों से अब नए सेवा शुल्क वसूले जाएंगे। हालांकि वॉशिंगटन ने ईरान के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है, लेकिन ईरानी राजदूत ने आश्वस्त किया कि ईरान के मित्र देशों को इस शुल्क में विशेष और बड़ी रियायतें दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि उनका देश ओमान के साथ मिलकर इस जलमार्ग के नए प्रबंधन पर काम कर रहा है। चूंकि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का एक बड़ा हिस्सा ईरान के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में आता है, इसलिए वे इस सेवा के लिए वैध शुल्क वसूलेंगे, हालांकि इसे कोई टोल या चुंगी नहीं माना जाना चाहिए।
इन कूटनीतिक हलचलों के बीच सीमा पर तनाव भी चरम पर है। इज़राइली सेना ने आधिकारिक बयान जारी कर दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के मजदल ज़ून क्षेत्र में अपने नियंत्रण वाले सुरक्षा घेरे के भीतर सक्रिय एक हथियारबंद लड़ाके को मार गिराया है। दूसरी तरफ, लेबनान की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक इज़राइली सैन्य हेलीकॉप्टर ने मजदल ज़ून के बाहरी हिस्सों पर तीव्र हवाई हमले किए और गांव की दिशा में पांच घातक मिसाइलें दागीं। इन हमलों में तत्काल किसी के हताहत होने या किसी विशिष्ट लक्ष्य के नष्ट होने की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इससे क्षेत्र में युद्ध की विभीषिका और अधिक गहरी हो गई है।



















