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लाइव: तेहरान में अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार कल, विश्व नेताओं का जमावड़ा — 3 जुलाई 2026लाइव
3 जुल॰ 2026, 7:36 am (45 दिन पहले)· 6

लाइव: तेहरान में अली खामेनेई का राजकीय अंतिम संस्कार कल, विश्व नेताओं का जमावड़ा — 3 जुलाई 2026

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है और उनका दफ़न 6 जुलाई को होना है। भारत का एक प्रतिनिधिमंडल उन्हें श्रद्धांजलि देने तेहरान पहुँचा है। सप्ताह भर चलने वाले अंतिम संस्कार समारोह के मद्देनज़र सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं।

ईरान की राजधानी तेहरान में इस समय एक अभूतपूर्व कूटनीतिक और सैन्य सुरक्षा व्यवस्था देखी जा रही है, जहाँ देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए दुनिया भर से राजनयिकों और राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। हालांकि, इस ऐतिहासिक राजकीय शोक सभा के बीच एक अत्यंत संवेदनशील और अप्रत्याशित सुरक्षा संकट भी सामने आया है। ईरान के नव-नियुक्त सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा ख़ामेनेई अपने दिवंगत पिता के अंतिम संस्कार में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होंगे। इस बात की आधिकारिक पुष्टि भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह हाकिम इलाही ने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था और गंभीर खतरों के आकलन के बाद ही यह कड़ा निर्णय लिया गया है।

ईरानी प्रशासनिक और सुरक्षा हलकों में इस समय तनाव चरम पर है। आयतुल्लाह हाकिम इलाही ने बताया कि इज़राइल की ओर से लगातार मिल रही प्रत्यक्ष धमकियों और अत्याधुनिक हवाई निगरानी प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण मुज्तबा ख़ामेनेई की जान को गंभीर खतरा है। ऐसे में उनका किसी सार्वजनिक और विशाल जनसमूह वाले स्थल पर उपस्थित होना अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है। यह चिंता निराधार नहीं है, क्योंकि हाल ही में इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि मुज्तबा ख़ामेनेई को उनकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने सीधे निशाने पर ले रखा है। इस बयान के बाद ईरान और इज़राइल के बीच तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है।

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इज़राइली धमकियों के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी और कूटनीतिक तकरार

इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी तीखे बयानों का आदान-प्रदान जारी है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए एक बेहद तीखी चेतावनी जारी की थी। ईरानी विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन से कहा था कि वह इज़राइल पर हर हाल में लगाम लगाए, जिसे उन्होंने अमेरिका का एक पालतू देश करार दिया था। यह बयान ठीक उस समय आया जब इज़राइल की ओर से नवनियुक्त ईरानी सर्वोच्च नेता को निशाना बनाने की बातें कही जा रही थीं। अमेरिकी प्रशासन और तेहरान के बीच चल रही परोक्ष वार्ताओं के बीच इस तरह के तीखे बयानों ने शांति प्रयासों को और अधिक पेचीदा बना दिया है।

शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को तेहरान के विभिन्न हिस्सों में अंतिम संस्कार की तैयारियां अपनी पूरी रफ्तार से चलती दिखाई दीं। शनिवार, 4 जुलाई 2026 को होने वाले इस मुख्य राजकीय समारोह में लाखों की संख्या में आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जो अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए देश के विभिन्न कोनों से राजधानी की ओर कूच कर रहे हैं। इस समारोह में न केवल घरेलू जनता, बल्कि कई मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्ष और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंच रहे हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र बन गया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और वैश्विक प्रतिनिधियों की भागीदारी

पश्चिम एशिया में जारी इस भयंकर युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत में पाकिस्तान इस समय एक मुख्य और बेहद महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ शनिवार को तेहरान में होने वाले इस राजकीय अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, चीन, अफ़गानिस्तान और काकेशस क्षेत्र में स्थित ईरान के पड़ोसी देशों ने भी घोषणा की है कि वे इस दुखद अवसर पर अपने विशेष राजनयिक और उच्च पदस्थ प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेज रहे हैं ताकि द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता को दर्शाया जा सके।

इस महाद्वीपीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया और बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वर्तमान में चल रही व्यापक राजनयिक वार्ताओं के दौरान ईरान ने वॉशिंगटन द्वारा रखी गई लगभग सभी प्रमुख और कड़ी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट रूप से मानना है कि इन वार्ताओं का एकमात्र और प्राथमिक उद्देश्य तेहरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। एक प्रमुख अमेरिकी व्यापारिक टेलीविजन चैनल को दिए गए विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश अब एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब आ चुके हैं, जो पूरे क्षेत्र के भविष्य को बदल सकता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरानी कूटनीतिक दल ने उन तमाम मांगों पर अपनी सहमति दे दी है जिसकी आवश्यकता अमेरिका को इस समझौते को मूर्त रूप देने के लिए थी। इस बीच, अमेरिकी और इज़रायली संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के विशाल और पावन धार्मिक स्थल इमाम खोमैनी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है। देश की सरकारी मीडिया और आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बात की पुष्टि करते हुए लिखा कि इस्लामिक क्रांति के महान शहीद नेता का पार्थिव शरीर अब इमाम खोमैनी ग्रैंड मोसल्ला में जनता और गणमान्य अतिथियों के दर्शन के लिए पूरी तरह से तैयार है।

जनरल अहमद वहीदी की अप्रत्याशित सार्वजनिक वापसी और सैन्य रणनीति

ईरान के भीतर चल रही कई दिनों की उथल-पुथल और भारी सुरक्षा बैठकों के बीच देश के सबसे शक्तिशाली अर्धसैनिक बल, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख जनरल अहमद वहीदी अंततः सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। मध्य-पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से वे पूरी तरह से सार्वजनिक परिदृश्य से ओझल थे और कयास लगाए जा रहे थे कि वे भी इज़राइली खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हो सकते हैं। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई तस्वीरों और वीडियो दृश्यों में जनरल अहमद वहीदी को 86 वर्षीय दिवंगत अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की रणनीतिक योजना तैयार करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेते देखा गया। इसके बाद वे गुरुवार, 2 जुलाई 2026 की रात को दिवंगत नेता के पूर्व आवास के समीप आयोजित एक बेहद निजी शोक सभा में उनके ताबूत के पास बैठे नजर आए।

अंतरराष्ट्रीय सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनरल अहमद वहीदी अमेरिका के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ईरान की बेहद सख्त और अडिग नीति का निर्धारण करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। वे ईरान के उस अत्यंत प्रभावशाली और चुनिंदा आंतरिक रणनीतिक गुट का हिस्सा हैं जो सीधे तौर पर नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा ख़ामेनेई के संपर्क में है। गौरतलब है कि मुज्तबा ख़ामेनेई भी 28 फरवरी को हुए उसी इज़रायली हवाई हमले में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता अली ख़ामेनेई की मृत्यु हो गई थी, और तब से वे भी सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं।

हफ्तेभर चलने वाला शोक कार्यक्रम और तेहरान में उमड़ा जनसैलाब

शुक्रवार को तेहरान की सभी मुख्य सड़कों पर काले वस्त्र पहने लाखों शोकाकुल नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह राजकीय विदाई समारोह 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक कुल छह दिनों तक विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाएगा। राजधानी तेहरान में इकट्ठा हुए लोग हाथों में ईरानी राष्ट्रध्वज और अपने दिवंगत नेता की तस्वीरें थामे पारंपरिक शोक गीत गाते और विलाप करते नजर आए। दिवंगत नेता के ताबूत की पहली तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिसमें उसे ईरान के राष्ट्रीय तिरंगे रंगों से सुसज्जित एक विशेष कक्ष में सुरक्षित रखा गया है।

इस ताबूत के ऊपर इमाम हुसैन की पावन दरगाह से लाया गया एक अत्यंत पवित्र लाल ध्वज ओढ़ाया गया है, जिस पर सफेद रंग के अक्षरों में धार्मिक इबारत अंकित है। ईरानी सरकार और धार्मिक संस्थाओं ने इस ऐतिहासिक लाल ध्वज को अन्याय के खिलाफ निरंतर जारी रहने वाले प्रतिरोध, महान बलिदान और शाश्वत सत्य के प्रति अटूट निष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक घोषित किया है।

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति और आर्थिक मोर्चे पर असर

अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस की लंबी छुट्टी से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बाजार में भी मामूली तेजी दर्ज की गई। मध्य-पूर्व में छिड़े इस भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता को लेकर बाजार में निवेशकों और वैश्विक व्यापारियों के बीच एक बेहद सतर्क आशावाद का माहौल देखा जा रहा है। 0407 GMT पर ब्रेंट क्रूड वायदा में 46 सेंट यानी लगभग 0.64 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसकी कीमत 72.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इसी प्रकार, वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 32 सेंट यानी लगभग 0.47 प्रतिशत की मजबूती के साथ 69.01 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ।

शनिवार को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश होने के कारण शुक्रवार को अमेरिका के तमाम प्रमुख वित्तीय और शेयर बाजार बंद रहेंगे। ऐसे में वैश्विक व्यापारियों की नजरें पूरी तरह से तेहरान में हो रही राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यहाँ से निकलने वाला कोई भी संकेत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल की श्रद्धांजलि और कूटनीतिक संदेश

ईरानी दूतावास द्वारा जारी किए गए आधिकारिक वीडियो और तस्वीरों में भारत सरकार की ओर से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को दिवंगत नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष खड़े होकर श्रद्धासुमन अर्पित करते देखा गया। इस प्रतिनिधिमंडल में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा और बिहार के माननीय राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल थे, जिन्होंने तेहरान पहुंचकर भारतीय जनता और सरकार की ओर से अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के वीडियो फुटेज साझा किए, जिसमें भारतीय प्रतिनिधियों को दिवंगत अयातुल्ला के समक्ष नमन करते देखा जा सकता है। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि माननीय राज्यपाल और उन्होंने संयुक्त रूप से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दिवंगत नेता को नमन किया है। इसके साथ ही बिहार लोक भवन के आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया कि राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने हालिया संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले तमाम निर्दोष लोगों के परिवारों के प्रति भी गहरी संवेदना प्रकट की है।

संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ की अमेरिका और इज़रायल को सख्त चेतावनी

ईरानी संसद के अध्यक्ष और इस समय देश के मुख्य परमाणु वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका और इज़रायल को आगाह किया है। उन्होंने ईरानी समाचार एजेंसियों से बात करते हुए कहा कि यदि अमेरिका और उसका सहयोगी इज़रायल चल रही राजनयिक वार्ताओं में किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं से पीछे हटते हैं, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए पुनः आवश्यक और कड़े कदम उठाने से तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान अपनी घरेलू राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को इस बड़े संकट के समय में एकजुट रखने का प्रयास कर रहा है।

तेहरान के इस विशाल धार्मिक सभागार में शुक्रवार को आम जनता और विदेशी दूतों के दर्शन के लिए रखे गए पार्थिव शरीर को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। 37 वर्षों तक ईरान की सत्ता पर निर्विवाद रूप से काबिज रहने वाले अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के बाद शिया संप्रदाय के अत्यंत पवित्र धार्मिक केंद्रों कोम (ईरान), नजफ और करबला (इराक) ले जाया जाएगा। इसके उपरांत, गुरुवार को मशहद शहर में स्थित ईरान के सबसे पवित्र और मुख्य तीर्थस्थल पर उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप की नीतियों पर माथापच्ची

अगले सप्ताह तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में भी ईरान का मुद्दा बेहद गरमाने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों के प्रमुख नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान और ग्रीनलैंड के मुद्दों पर पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। साथ ही यूरोपीय देश इस बात का भी संकेत देना चाहते हैं कि वे अपनी क्षेत्रीय रक्षा और सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, खासकर ऐसे समय में जब वॉशिंगटन इस रक्षा गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं और वित्तीय योगदान को लगातार कम करने के संकेत दे रहा है।

इस अहम शिखर बैठक के दौरान नाटो के तमाम सदस्य देशों से अपने रक्षा बजट और खर्च को बढ़ाने के साथ-साथ यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा को आंतरिक रूप से अधिक मजबूत करने की प्रतिज्ञा दोहराए जाने की पूरी उम्मीद है, ताकि अमेरिकी नीतियों में आने वाले बदलावों से उनके अपने हितों पर कोई सीधा आंच न आए।

राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और ईरानी कैबिनेट की उपस्थिति

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शुक्रवार को तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के ताबूत के समीप पहुंचकर विशेष प्रार्थना और नमाज़ अदा की। इस दौरान उनके साथ देश के शीर्ष राजनयिक दल के सदस्यों सहित कैबिनेट के कई मंत्री भी मौजूद थे। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किए गए फुटेज में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान को भावुक मुद्रा में नमाज़ पढ़ते देखा गया। ताबूत के ऊपर एक पारंपरिक काली पगड़ी रखी हुई थी, जो शिया शरिया परंपरा के अनुसार केवल उन्हीं प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं को पहनाई जाती है जो सीधे तौर पर पैगंबर मोहम्मद के वंशज माने जाते हैं।

3 जुलाई 2026 को आयोजित इस मुख्य शोक सभा में देश के शीर्ष सैन्य और नागरिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने ईरान की इस्लामिक क्रांति के पहले नेता रूहुल्लाह ख़ुमैनी के पोते हसन ख़ुमैनी से भी गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान मंच पर सैन्य कमांडर मोहसेन रेज़ाई, विदेश मंत्री अब्बास अराकची, देश के मुख्य न्यायाधीश ग़ुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़ जैसी तमाम बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं, जो देश की आंतरिक कूटनीतिक एकजुटता को प्रदर्शित कर रही थीं।

पाकिस्तानी सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की उपस्थिति और व्यापक प्रभाव

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और उनके शक्तिशाली सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर शुक्रवार को एक विशेष विमान से तेहरान पहुंचे। फरवरी माह में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए आए इस प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान के कई उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज़ सादिक़, उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इसहाक़ डार, सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी और सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह भी शामिल थे।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पाकिस्तान इस गंभीर संकट के समय में अपने भाई समान पड़ोसी देश ईरान के साथ पूर्ण रूप से खड़ा है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने ताबूत पर हाथ रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो दोनों देशों के बीच इस नाजुक समय में प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।

तालिबान प्रशासन और सऊदी अरब के दूतों का आगमन

अफ़गानिस्तान के तालिबान प्रशासन में विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी भी शुक्रवार को तेहरान पहुंचे और दिवंगत सर्वोच्च नेता के ताबूत के समक्ष खड़े होकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। दिलचस्प बात यह है कि मुत्तक़ी का यह दौरा ठीक उसी समय हुआ जब उनके सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी अहमद मसूद ने भी वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी, जिनके दिवंगत पिता को 1990 के दशक में ईरान का पूर्ण समर्थन प्राप्त था। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री वलीद अल-ख़रेजी ने भी अपने विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचकर अपनी संवेदना व्यक्त की।

28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका के इस बड़े सैन्य अभियान के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन तमाम खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया था, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल था। इस भीषण युद्ध में हजारों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें सबसे बड़ा आर्थिक और मानवीय नुकसान स्वयं ईरान और लेबनान के हिज़्बुल्लाह समर्थित क्षेत्रों को उठाना पड़ा है।

दक्षिणी लेबनान में इज़राइल की आक्रामक सैन्य कार्रवाई

इस बीच, जमीनी मोर्चे पर युद्ध की विभीषिका कम होने का नाम नहीं ले रही है। इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि उन्होंने दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात अपने सैनिकों पर हुए हमलों का करारा जवाब देते हुए हिज़्बुल्लाह के लगभग 10 रणनीतिक ठिकानों पर भारी बमबारी की है। इज़राइल के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने एक बार फिर दोहराया है कि जब तक पूरे लेबनान क्षेत्र से हिज़्बुल्लाह का पूर्ण रूप से निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक वे अपनी सेनाओं को वहां से पीछे नहीं हटाएंगे।

इज़रायली सेना के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि उनके लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी के हथियारों ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के कई प्रमुख बुनियादी ढांचों, हथियार भंडारण डिपो और हथियार पहुंचाने के काम में इस्तेमाल होने वाले एक बड़े सैन्य ट्रक को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, जिससे हिज़्बुल्लाह की अग्रिम युद्ध क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

रूस का प्रतिनिधित्व और यमन के हूती विद्रोहियों का अल्टीमेटम

रूस के पूर्व राष्ट्रपति और इस समय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद करीबी और विशेष दूत दिमित्री मेदवेदेव ने शुक्रवार को तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर पर रूस की ओर से आधिकारिक रूप से श्रद्धांजलि दी। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने उनका स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते रक्षा और रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।

दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को एक अत्यंत गंभीर और सीधी चेतावनी जारी की है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेई ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि यदि सऊदी अरब ने उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने या यमन आ रहे किसी भी ईरानी नागरिक विमान को रोकने का प्रयास किया, तो वे सऊदी अरब के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और तेल रिफाइनरियों पर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर देंगे। यह चेतावनी तब आई है जब सऊदी अरब ने कथित तौर पर एक ईरानी विमान को यमन की राजधानी में उतरने से रोक दिया था।

तेहरान में कड़ा सुरक्षा पहरा और आम जनता का सब्र

शुक्रवार की शाम तक तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर को पूरी तरह से एक अभेद्य सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया गया था। चारों ओर दंगा नियंत्रण पुलिस के भारी दस्तों को तैनात किया गया था और कटीले तारों वाले सुरक्षा बैरिकेड खड़े कर दिए गए थे। इसके बावजूद, आम लोगों का हौसला कम नहीं हुआ और लाखों की तादाद में लोग परिसर के द्वार खुलने से लगभग 10 घंटे पहले से ही कड़ाके की ठंड और अनिश्चितता के बीच कतारों में खड़े रहे।

दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर सोमवार, 6 जुलाई 2026 तक आम लोगों के दर्शन के लिए इसी परिसर में रखा जाएगा। शनिवार, 5 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6:00 बजे (0230 GMT) इस पावन परिसर के मुख्य द्वार आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसके बाद इस ऐतिहासिक शोक सभा में जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है।

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  1. खामेनेई के जनाज़े से पहले कड़ी सुरक्षा, रात भर इंतज़ार में डटी रही भीड़

    शुक्रवार शाम (3 जुलाई, 2026) तक ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाज़े के स्थल पर दंगा नियंत्रण पुलिस की बड़ी तैनाती कर दी गई थी और चारों ओर बैरिकेड खड़े कर दिए गए थे, जिससे पूरा परिसर एक सुरक्षित छावनी जैसा दिखने लगा था। फिर भी यह सब देखकर लोग पीछे नहीं हटे — बड़ी तादाद में लोग वहाँ जमा हो गए और परिसर खुलने से करीब 10 घंटे पहले से ही कतारों में खड़े होकर इंतज़ार करते रहे। खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में सोमवार (6 जुलाई) तक दिन-रात आम जनता के दर्शन के लिए रखा जाएगा। शनिवार (5 जुलाई) को सुबह 6 बजे स्थानीय समय पर, यानी 0230 GMT पर, परिसर के द्वार आम लोगों के लिए खोले जाएंगे।
  2. केंद्रीय मंत्री मार्घेरिटा और बिहार राज्यपाल हसनैन ने तेहरान में ख़ामेनई के जनाज़े में भारत का प्रतिनिधित्व किया

    शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनई के अंतिम संस्कार समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन तेहरान पहुंचे और भारत सरकार तथा देश की जनता की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश राज्य मंत्री मार्घेरिटा ने X पर अपनी यात्रा की जानकारी देते हुए लिखा: "Hon'ble @GovernorBihar और मैंने तेहरान में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता ग्रैंड आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनई के जनाज़े में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत सरकार और देश की जनता की ओर से हमने अपनी श्रद्धा अर्पित की। @PMOIndia @MEAIndia।" उन्होंने समारोह की कई तस्वीरें भी पोस्ट कीं। बिहार लोक भवन के आधिकारिक X हैंडल पर जारी एक पोस्ट में बताया गया कि राज्यपाल हसनैन ने पश्चिम एशिया में हाल के संघर्ष में जान गंवाने वाले तमाम लोगों के परिजनों के प्रति भी अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं। भारत में ईरानी दूतावास ने भी X पर एक पोस्ट साझा की जिसमें हसनैन और मार्घेरिटा को उस हॉल में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिखाया गया जहाँ शोक समारोह आयोजित किया गया था।
  3. हूती विद्रोहियों ने ईरानी विमान में कथित हस्तक्षेप पर सऊदी अरब को दी गंभीर चेतावनी

    यमन के हूती आंदोलन ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को सऊदी अरब को खबरदार किया कि अगर रियाद ने उनके हवाई क्षेत्र में दखल दिया या उन पर हमला बोला, तो वे सऊदी हवाई अड्डों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों पर जवाबी कार्रवाई करेंगे। विद्रोही समूह ने आरोप लगाया कि सऊदी अरब ने एक ईरानी विमान को यमन में उतरने से रोकने की कोशिश की थी। यह चेतावनी ऐसे समय में आई जब ईरान समर्थित हूतियों और सऊदी अरब के बीच अपेक्षाकृत शांति का दौर चल रहा था — पश्चिम एशिया के व्यापक युद्ध के दौरान भी विद्रोहियों ने ईरान के तेल-समृद्ध खाड़ी पड़ोसियों को सीधे निशाना नहीं बनाया था। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेई ने एक वीडियो संदेश में कहा, 'हम सऊदी दुश्मन को चेतावनी देते हैं कि वह हमारे हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने या हमारे देश के खिलाफ किसी भी आक्रामकता का प्रयास दोबारा न दोहराए।' उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे किसी कदम का जवाब सऊदी अरब के हवाई अड्डों तथा जमीन और समुद्र पर उसके अहम हितों को निशाना बनाकर व्यापक रूप से दिया जाएगा।
  4. पुतिन के विशेष दूत के रूप में मेदवेदेव ने तेहरान में ख़ामेनेई को दी श्रद्धांजलि: ईरानी सरकारी मीडिया

    रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को तेहरान में ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित की। रूस और ईरान के बीच गहरे द्विपक्षीय संबंध रहे हैं। ईरानी सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने मेदवेदेव को 'रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का विशेष दूत' बताया। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और वरिष्ठ राजनयिक अब्बास अराग़ची ने उनका औपचारिक स्वागत किया।
  5. इज़रायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के करीब 10 ठिकानों पर हमले किए

    इज़रायली सेना ने शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को बताया कि उसने एक दिन पहले दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के कई ठिकानों पर हमले किए — यह उस इलाके में तैनात इज़रायली सैनिकों पर हुए हमलों की प्रतिक्रिया थी। इज़रायल के वरिष्ठ अधिकारियों ने बार-बार दक्षिणी लेबनान से सैनिकों की वापसी की हर संभावना को खारिज किया है। उनका स्पष्ट रुख है कि जब तक पूरे लेबनान में हिज़्बुल्लाह का पूर्ण निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक कोई वापसी नहीं होगी। सेना ने अपने बयान में कहा, 'IDF ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के लगभग 10 बुनियादी ढांचे के ठिकानों और हथियार पहुंचाने में इस्तेमाल होने वाले एक ट्रक को नष्ट किया।'
  6. सऊदी उप विदेश मंत्री ने तेहरान पहुंचकर ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता को दी अंतिम श्रद्धांजलि

    सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री वलीद अल-ख़रेजी अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे और ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। ईरानी मीडिया ने यह जानकारी दी। ख़ामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका के संयुक्त सैन्य अभियान के दौरान हुई थी। इस संघर्ष के जवाब में ईरान ने उन खाड़ी देशों पर हमले किए जहां अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित थे — इनमें सऊदी अरब भी शामिल था। इस युद्ध में हजारों लोगों की जानें गईं, जिनमें सबसे भारी नुकसान मुख्य रूप से ईरान और लेबनान को झेलना पड़ा।
  7. तालिबान सरकार के अफ़गान विदेश मंत्री ने तेहरान में ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि दी

    तालिबान प्रशासन में अफ़गानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी शुक्रवार (3 जुलाई, 2026) को तेहरान पहुंचे और ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के ताबूत के सामने सिर नवाया। ईरानी सरकारी टेलीविज़न ने इस दृश्य का प्रसारण किया। मुत्तक़ी की यह यात्रा उससे महज़ कुछ घंटे बाद हुई जब अहमद मसूद — एक प्रमुख तालिबान-विरोधी संगठन के प्रमुख, जिनके पिता को 1990 के दशक में ईरान का समर्थन प्राप्त था — ने भी ख़ामेनेई को श्रद्धासुमन अर्पित किए थे। — AFP
  8. पाकिस्तानी PM ने ख़ामेनेई की ताबूत पर श्रद्धांजलि दी: ईरान सरकारी TV

    ईरानी सरकारी टेलीविज़न पर प्रसारित फुटेज में शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को दिवंगत ईरानी सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की ताबूत के सामने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देखा गया। शरीफ के साथ सेना प्रमुख असीम मुनीर और प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच उनके आपसी संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
  9. पाकिस्तान PM शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए तेहरान पहुँचे

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शिरकत के लिए तेहरान पहुँचे। ख़ामेनेई की हत्या फरवरी में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई थी। प्रधानमंत्री शरीफ के साथ आए प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष अयाज़ सादिक़, उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक़ डार, सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार, PPP अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी और सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह शामिल थे। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहले ही बताया था कि शरीफ ईरानी नेतृत्व और शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करेंगे और इस दुःख की घड़ी में भाईचारे वाले ईरानी राष्ट्र के साथ पाकिस्तान की पूर्ण एकजुटता की पुष्टि करेंगे।
  10. ईरानी नेताओं ने ख़ामेनेई की विदाई समारोह में भाग लिया

    3 जुलाई 2026 को तेहरान में आयोजित दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की विदाई समारोह में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने ईरान के पहले सर्वोच्च नेता रूहुल्लाह ख़ुमैनी के पोते हसन ख़ुमैनी का गर्मजोशी से अभिवादन किया। इस समारोह में सैन्य कमांडर मोहसेन रेज़ाई, विदेश मंत्री अब्बास अराकची, मुख्य न्यायाधीश ग़ुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़ समेत कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारी भी मौजूद रहे।
  11. ईरानी राष्ट्रपति ने ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर पर नमाज़ अदा की: सरकारी TV

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शुक्रवार को देश के मारे गए सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के समीप जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ देश के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाक़ेर ग़ालिबाफ़ सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे। सरकारी टेलीविज़न पर प्रसारित दृश्यों में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ख़ामेनेई की ताबूत के पास नमाज़ अदा करते दिखे। ताबूत पर एक काली पगड़ी रखी हुई थी — इस्लामी परंपरा में यह उन धर्मगुरुओं द्वारा पहनी जाती है जो पैगंबर मोहम्मद के वंशज होते हैं।
  12. NATO नेता अंकारा में जमा होंगे, ट्रंप के साथ तनाव सुलझाने की कोशिश

    अगले हफ्ते अंकारा में होने वाले NATO शिखर सम्मेलन में यूरोपीय देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान और ग्रीनलैंड के मुद्दों पर पैदा हुई खटास को दूर करने की कोशिश करेंगे। साथ ही यह संदेश देने की भी कोशिश होगी कि वे यूरोप की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए तैयार हैं — और यह ऐसे वक्त में है जब वॉशिंगटन इस गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धताएँ कम कर रहा है। इस बैठक में NATO सदस्य देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने और यूरोपीय सुरक्षा को और मज़बूत करने की प्रतिज्ञा दोहराने की उम्मीद है।
  13. श्रद्धांजलि: आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई — वह धर्मगुरु जिन्होंने इस्लामी ईरान का चेहरा बदल दिया

    पिछले पाँच दशकों में ईरान की सर्वाधिक प्रभावशाली शख्सियतों में शुमार, ख़ामेनेई ने एक ऐसी धर्माधारित शासन-व्यवस्था खड़ी की जो सदैव उनके प्रति निष्ठावान बनी रही — यह मूल्यांकन स्टैनली जॉनी के आलेख में प्रस्तुत किया गया है। इस श्रद्धांजलि लेख में आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की जीवन-यात्रा और उनके दीर्घकालिक प्रभाव की विस्तृत पड़ताल की गई है — किस प्रकार उन्होंने आधुनिक इस्लामी ईरान की वैचारिक बुनियाद तैयार की और देश की उथल-पुथल भरी राजनीति को अपनी दिशा दी।
  14. तेहरान में दर्शन के लिए रखा गया ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर, हफ्तेभर चलेंगे शोक समारोह

    ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई, जिन्होंने 37 वर्षों तक देश की बागडोर संभाली, का पार्थिव शरीर शुक्रवार को तेहरान के एक विशाल सभागार में दर्शन के लिए रखा गया। धर्मगुरुओं, सरकारी अधिकारियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और आम श्रद्धालुओं ने वहां पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। तेहरान के बाद ख़ामेनेई का पार्थिव शरीर शिया इस्लाम के प्रमुख केंद्रों — ईरान के कोम और इराक के नजफ व करबला — ले जाया जाएगा। इसके बाद गुरुवार को मशहद में अंतिम दफन होगा, जहां ईरान का सबसे पावन तीर्थस्थल स्थित है।
  15. ईरान की चेतावनी: अमेरिका-इज़रायल ने प्रतिबद्धताएं नहीं निभाईं तो उठाए जाएंगे 'उचित कदम'

    ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका और इज़रायल ने अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं कीं, तो ईरान 'उचित कदम' उठाना फिर से शुरू कर देगा। यह बयान ईरानी समाचार एजेंसी ISNA ने जारी किया है।
  16. भारतीय धर्मगुरुओं ने आयतुल्लाह खामेनेई को अर्पित किए श्रद्धासुमन

    ईरानी दूतावास की ओर से जारी किए गए दृश्यों में भारत के धर्मगुरुओं और धार्मिक नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता दिखाई दिया।
  17. ईरान में खामेनेई का अंतिम संस्कार: समारोह में कौन-कौन हो रहे हैं शामिल?

    ईरान अपने पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई का एक भव्य बहु-दिवसीय अंतिम संस्कार समारोह आयोजित कर रहा है। यह समारोह ऐसे नाज़ुक समय में हो रहा है जब ईरान, इज़रायल और अमेरिका के बीच शत्रुता में एक कमज़ोर ठहराव बना हुआ है, जिसके पश्चिम एशिया पर व्यापक दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं। पूर्व नेता के इस बहु-दिवसीय अंतिम संस्कार पर पूरी दुनिया की पैनी नज़र टिकी है। इस समारोह में कौन-कौन शामिल हो रहे हैं, यह जानने के लिए नीचे क्लिक करें: ईरान में खामेनेई का अंतिम संस्कार: पूर्व आयतुल्लाह के दफन समारोह में कौन हो रहे हैं शामिल?
  18. युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स प्रमुख पहली बार आए नज़र: मीडिया

    ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख अहमद वहीदी शुक्रवार को तेहरान में दिवंगत अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धांजलि अर्पित करते दिखाई दिए। मध्य-पूर्व में युद्ध भड़कने के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक उपस्थिति थी। ईरानी मीडिया ने इसकी वीडियो फुटेज प्रसारित की। युद्ध के आरंभ से ही वहीदी ने बेहद कम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई थी, जिसकी वजह संभवतः यह मानी जाती है कि वे अपने पूर्ववर्ती की तरह हत्या के निशाने पर न आ जाएं। फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी तस्वीर में वे ताबूत पर हाथ रखकर दुआ करते नज़र आए।
  19. देखें: भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को नमन किया

    जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती द्वारा साझा किए गए वीडियो दृश्यों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल को दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को श्रद्धासुमन अर्पित करते देखा जा सकता है।
  20. देखें: विदेशी गणमान्य हस्तियों ने आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को दी अंतिम श्रद्धांजलि

    ईरानी दूतावास द्वारा जारी वीडियो दृश्यों में विभिन्न देशों के गणमान्य प्रतिनिधि दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई को श्रद्धांजलि देते नज़र आए।
  21. अमेरिकी अवकाश से पहले तेल में मामूली उछाल, मध्य-पूर्व शांति प्रयासों का बाज़ार पर असर जारी

    शुक्रवार को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस की लंबी छुट्टी से पहले अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में मामूली तेज़ी आई। मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने की कोशिशों को लेकर बाज़ार में सतर्क आशावाद बरकरार रहा। 0407 GMT पर ब्रेंट क्रूड 46 सेंट यानी 0.64% की बढ़त के साथ 72.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा। वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट भी 32 सेंट अर्थात 0.47% ऊपर चढ़कर 69.01 डॉलर प्रति बैरल हो गया। शनिवार को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण शुक्रवार को अमेरिकी वित्तीय बाज़ार बंद रहेंगे।
  22. तेहरान में खामेनेई की विदाई से पहले शोक की लहर, 4 से 9 जुलाई तक चलेगा अंतिम संस्कार; दुनिया भर के दूत होंगे शामिल

    शुक्रवार को तेहरान की सड़कों पर दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार से पहले भारी भीड़ उमड़ पड़ी। CNN के मुताबिक यह समारोह 4 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित होगा। राजधानी में काले वस्त्र पहने हज़ारों-लाखों नागरिक इकट्ठा हुए, ईरानी झंडे लहराए और पारंपरिक शोक गीत गाए। कई लोगों के हाथों में दिवंगत नेता की तस्वीरें भी थीं। खामेनेई के पार्थिव शरीर को रखे ताबूत की शुरुआती तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें उसे देश के राष्ट्रीय रंगों से सजे एक कक्ष में रखा हुआ दिखाया गया है। ताबूत पर इमाम हुसैन की दरगाह से लाया गया एक पवित्र लाल ध्वज ओढ़ाया गया है, जिस पर सफेद अक्षरों में इबारत है। ईरानी सरकार ने इस ऐतिहासिक झंडे को "प्रतिरोध, बलिदान और सत्य के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक" बताया है।
  23. ईरान में खामेनेई के बहु-दिवसीय जनाज़े की तैयारी के बीच IRGC के शक्तिशाली जनरल वहीदी ने तोड़ी चुप्पी

    ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख जनरल अहमद वहीदी हफ्तों की खामोशी के बाद उस वक्त सामने आए जब देश दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के बहु-दिवसीय अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा है। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा प्रकाशित तस्वीरों में जनरल अहमद वहीदी को 86 वर्षीय खामेनेई के जनाज़े की योजना से जुड़ी एक बैठक में और बाद में उनके ताबूत के निकट बैठे देखा गया। यह निजी समारोह गुरुवार रात (2 जुलाई 2026) को तेहरान के मध्य भाग में सर्वोच्च नेता के पूर्व आवास के पास आयोजित हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि वहीदी अमेरिका के साथ जारी युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की वार्ता में ईरान की कठोर नीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। माना जाता है कि वह उस छोटे आंतरिक गुट का हिस्सा हैं जो ईरान के नवनियुक्त सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मुज्तबा खामेनेई के साथ सीधे संपर्क में है। मुज्तबा खामेनेई 28 फरवरी के इज़रायली हवाई हमलों में कथित तौर पर घायल होने के बाद से सार्वजनिक दृश्य से ओझल हैं — उन्हीं हमलों में उनके पिता, वरिष्ठ खामेनेई, की जान गई थी।
  24. सरकारी मीडिया: अंतिम संस्कार से पूर्व खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में लाया गया

    अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का पार्थिव शरीर उनके अंतिम संस्कार की तैयारी के तहत तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने टेलीग्राम पर लिखा: "इस्लामिक क्रांति के शहीद नेता का पार्थिव शरीर इमाम खोमैनी ग्रैंड मोसल्ला पहुँच गया है।" एजेंसी ने परिसर का उल्लेख उसके आधिकारिक नाम से किया।
  25. ट्रंप का दावा — ईरान ने हमारी लगभग सभी शर्तें मानीं, परमाणु समझौता दहलीज़ पर

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि चल रही राजनयिक बातचीत में ईरान ने वॉशिंगटन की तकरीबन सभी शर्तें स्वीकार कर ली हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन वार्ताओं का केंद्रीय उद्देश्य तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। CNBC को दिए एक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने भरोसे के साथ कहा कि दोनों देश अब एक औपचारिक करार को अंतिम रूप देने के एकदम करीब पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि उन्होंने हमारी ज़रूरत की लगभग हर बात मान ली है।" ANI
  26. अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां जोरों पर, लाखों लोगों और विदेशी गणमान्यों के आने की उम्मीद

    शुक्रवार (3 जुलाई 2026) को ईरान के मारे गए सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी रफ्तार से जारी थीं। शनिवार (4 जुलाई 2026) को होने वाले इस आधिकारिक समारोह में अधिकारियों को लाखों की संख्या में शोकार्त नागरिकों के साथ-साथ अनेक विदेशी गणमान्य हस्तियों के भाग लेने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया के युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में पाकिस्तान एक अहम मध्यस्थ की भूमिका अदा कर रहा है। उसने पुष्टि की है कि उसके प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ शनिवार को तेहरान में आयोजित इस अंतिम संस्कार में उपस्थित रहेंगे। चीन, अफ़गानिस्तान और काकेशस क्षेत्र में ईरान के पड़ोसी देशों ने भी घोषणा की है कि वे इस समारोह में अपने आधिकारिक प्रतिनिधि भेजेंगे।
  27. सुरक्षा कारणों से मुज्तबा खामेनेई पिता अली खामेनेई के जनाज़े में नहीं होंगे शामिल: रिपोर्ट

    ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई अपने पिता एवं पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाज़े में शामिल नहीं होंगे। भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह हाकिम इलाही ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरों को ध्यान में रखकर लिया गया है। इलाही ने स्पष्ट किया कि इज़राइल की ओर से मिल रही धमकियों और निगरानी के जोखिम के कारण मुज्तबा खामेनेई के लिए सार्वजनिक रूप से जनाज़े में उपस्थित होना खतरनाक साबित हो सकता है। इससे पहले बुधवार (1 जुलाई 2026) को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि वे इज़राइल — अपने 'पालतू' — पर लगाम लगाएं। उनका यह बयान इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ के उस वक्तव्य के बाद आया था जिसमें काट्ज़ ने कहा था कि सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई को 'मौत के निशाने' पर रखा गया है।

सवाल-जवाब

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में क्यों शामिल नहीं हो रहे हैं?
सुरक्षा कारणों और इज़राइल से मिल रही प्रत्यक्ष धमकियों तथा निगरानी के जोखिम के कारण मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से अंतिम संस्कार में उपस्थित नहीं हो रहे हैं।
अली खामेनेई की मृत्यु कब और कैसे हुई थी?
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मृत्यु 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल के संयुक्त हवाई हमलों के दौरान हुई थी।
अंतिम संस्कार समारोह कब से कब तक आयोजित किया जाएगा?
यह राजकीय शोक समारोह 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा, जिसके तहत पार्थिव शरीर को तेहरान, कोम, नजफ, करबला ले जाया जाएगा और अंततः मशहद में दफनाया जाएगा।
अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?
भारत सरकार की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने तेहरान पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को क्या चेतावनी दी है?
हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया या यमन आ रहे ईरानी विमानों को रोका, तो वे सऊदी हवाई अड्डों और रणनीतिक स्थलों पर हमले करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

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