ईरान की राजधानी तेहरान में इस समय एक अभूतपूर्व कूटनीतिक और सैन्य सुरक्षा व्यवस्था देखी जा रही है, जहाँ देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए दुनिया भर से राजनयिकों और राष्ट्राध्यक्षों का जमावड़ा शुरू हो चुका है। हालांकि, इस ऐतिहासिक राजकीय शोक सभा के बीच एक अत्यंत संवेदनशील और अप्रत्याशित सुरक्षा संकट भी सामने आया है। ईरान के नव-नियुक्त सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा ख़ामेनेई अपने दिवंगत पिता के अंतिम संस्कार में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होंगे। इस बात की आधिकारिक पुष्टि भारत में सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि आयतुल्लाह हाकिम इलाही ने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था और गंभीर खतरों के आकलन के बाद ही यह कड़ा निर्णय लिया गया है।
ईरानी प्रशासनिक और सुरक्षा हलकों में इस समय तनाव चरम पर है। आयतुल्लाह हाकिम इलाही ने बताया कि इज़राइल की ओर से लगातार मिल रही प्रत्यक्ष धमकियों और अत्याधुनिक हवाई निगरानी प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण मुज्तबा ख़ामेनेई की जान को गंभीर खतरा है। ऐसे में उनका किसी सार्वजनिक और विशाल जनसमूह वाले स्थल पर उपस्थित होना अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है। यह चिंता निराधार नहीं है, क्योंकि हाल ही में इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि मुज्तबा ख़ामेनेई को उनकी सुरक्षा एजेंसियों ने अपने सीधे निशाने पर ले रखा है। इस बयान के बाद ईरान और इज़राइल के बीच तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है।
इज़राइली धमकियों के बाद ईरान की कड़ी चेतावनी और कूटनीतिक तकरार
इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर भी तीखे बयानों का आदान-प्रदान जारी है। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे तौर पर संबोधित करते हुए एक बेहद तीखी चेतावनी जारी की थी। ईरानी विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन से कहा था कि वह इज़राइल पर हर हाल में लगाम लगाए, जिसे उन्होंने अमेरिका का एक पालतू देश करार दिया था। यह बयान ठीक उस समय आया जब इज़राइल की ओर से नवनियुक्त ईरानी सर्वोच्च नेता को निशाना बनाने की बातें कही जा रही थीं। अमेरिकी प्रशासन और तेहरान के बीच चल रही परोक्ष वार्ताओं के बीच इस तरह के तीखे बयानों ने शांति प्रयासों को और अधिक पेचीदा बना दिया है।
शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को तेहरान के विभिन्न हिस्सों में अंतिम संस्कार की तैयारियां अपनी पूरी रफ्तार से चलती दिखाई दीं। शनिवार, 4 जुलाई 2026 को होने वाले इस मुख्य राजकीय समारोह में लाखों की संख्या में आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जो अपने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए देश के विभिन्न कोनों से राजधानी की ओर कूच कर रहे हैं। इस समारोह में न केवल घरेलू जनता, बल्कि कई मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्ष और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंच रहे हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र बन गया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और वैश्विक प्रतिनिधियों की भागीदारी
पश्चिम एशिया में जारी इस भयंकर युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पर्दे के पीछे की बातचीत में पाकिस्तान इस समय एक मुख्य और बेहद महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि देश के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ शनिवार को तेहरान में होने वाले इस राजकीय अंतिम संस्कार में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा, चीन, अफ़गानिस्तान और काकेशस क्षेत्र में स्थित ईरान के पड़ोसी देशों ने भी घोषणा की है कि वे इस दुखद अवसर पर अपने विशेष राजनयिक और उच्च पदस्थ प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेज रहे हैं ताकि द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता को दर्शाया जा सके।
इस महाद्वीपीय तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया और बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वर्तमान में चल रही व्यापक राजनयिक वार्ताओं के दौरान ईरान ने वॉशिंगटन द्वारा रखी गई लगभग सभी प्रमुख और कड़ी शर्तों को स्वीकार कर लिया है। अमेरिकी प्रशासन का स्पष्ट रूप से मानना है कि इन वार्ताओं का एकमात्र और प्राथमिक उद्देश्य तेहरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। एक प्रमुख अमेरिकी व्यापारिक टेलीविजन चैनल को दिए गए विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्ण विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों देश अब एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब आ चुके हैं, जो पूरे क्षेत्र के भविष्य को बदल सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने साक्षात्कार के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि ईरानी कूटनीतिक दल ने उन तमाम मांगों पर अपनी सहमति दे दी है जिसकी आवश्यकता अमेरिका को इस समझौते को मूर्त रूप देने के लिए थी। इस बीच, अमेरिकी और इज़रायली संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के विशाल और पावन धार्मिक स्थल इमाम खोमैनी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया है। देश की सरकारी मीडिया और आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस बात की पुष्टि करते हुए लिखा कि इस्लामिक क्रांति के महान शहीद नेता का पार्थिव शरीर अब इमाम खोमैनी ग्रैंड मोसल्ला में जनता और गणमान्य अतिथियों के दर्शन के लिए पूरी तरह से तैयार है।
जनरल अहमद वहीदी की अप्रत्याशित सार्वजनिक वापसी और सैन्य रणनीति
ईरान के भीतर चल रही कई दिनों की उथल-पुथल और भारी सुरक्षा बैठकों के बीच देश के सबसे शक्तिशाली अर्धसैनिक बल, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रमुख जनरल अहमद वहीदी अंततः सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। मध्य-पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से वे पूरी तरह से सार्वजनिक परिदृश्य से ओझल थे और कयास लगाए जा रहे थे कि वे भी इज़राइली खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हो सकते हैं। ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा जारी की गई तस्वीरों और वीडियो दृश्यों में जनरल अहमद वहीदी को 86 वर्षीय दिवंगत अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार की रणनीतिक योजना तैयार करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेते देखा गया। इसके बाद वे गुरुवार, 2 जुलाई 2026 की रात को दिवंगत नेता के पूर्व आवास के समीप आयोजित एक बेहद निजी शोक सभा में उनके ताबूत के पास बैठे नजर आए।
अंतरराष्ट्रीय सैन्य और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनरल अहमद वहीदी अमेरिका के साथ जारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ईरान की बेहद सख्त और अडिग नीति का निर्धारण करने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। वे ईरान के उस अत्यंत प्रभावशाली और चुनिंदा आंतरिक रणनीतिक गुट का हिस्सा हैं जो सीधे तौर पर नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा ख़ामेनेई के संपर्क में है। गौरतलब है कि मुज्तबा ख़ामेनेई भी 28 फरवरी को हुए उसी इज़रायली हवाई हमले में घायल हो गए थे जिसमें उनके पिता अली ख़ामेनेई की मृत्यु हो गई थी, और तब से वे भी सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं।
हफ्तेभर चलने वाला शोक कार्यक्रम और तेहरान में उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार को तेहरान की सभी मुख्य सड़कों पर काले वस्त्र पहने लाखों शोकाकुल नागरिकों का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह राजकीय विदाई समारोह 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक कुल छह दिनों तक विभिन्न चरणों में आयोजित किया जाएगा। राजधानी तेहरान में इकट्ठा हुए लोग हाथों में ईरानी राष्ट्रध्वज और अपने दिवंगत नेता की तस्वीरें थामे पारंपरिक शोक गीत गाते और विलाप करते नजर आए। दिवंगत नेता के ताबूत की पहली तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिसमें उसे ईरान के राष्ट्रीय तिरंगे रंगों से सुसज्जित एक विशेष कक्ष में सुरक्षित रखा गया है।
इस ताबूत के ऊपर इमाम हुसैन की पावन दरगाह से लाया गया एक अत्यंत पवित्र लाल ध्वज ओढ़ाया गया है, जिस पर सफेद रंग के अक्षरों में धार्मिक इबारत अंकित है। ईरानी सरकार और धार्मिक संस्थाओं ने इस ऐतिहासिक लाल ध्वज को अन्याय के खिलाफ निरंतर जारी रहने वाले प्रतिरोध, महान बलिदान और शाश्वत सत्य के प्रति अटूट निष्ठा का सबसे बड़ा प्रतीक घोषित किया है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति और आर्थिक मोर्चे पर असर
अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस की लंबी छुट्टी से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के बाजार में भी मामूली तेजी दर्ज की गई। मध्य-पूर्व में छिड़े इस भीषण संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता को लेकर बाजार में निवेशकों और वैश्विक व्यापारियों के बीच एक बेहद सतर्क आशावाद का माहौल देखा जा रहा है। 0407 GMT पर ब्रेंट क्रूड वायदा में 46 सेंट यानी लगभग 0.64 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसके बाद इसकी कीमत 72.26 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। इसी प्रकार, वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) भी 32 सेंट यानी लगभग 0.47 प्रतिशत की मजबूती के साथ 69.01 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ।
शनिवार को अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश होने के कारण शुक्रवार को अमेरिका के तमाम प्रमुख वित्तीय और शेयर बाजार बंद रहेंगे। ऐसे में वैश्विक व्यापारियों की नजरें पूरी तरह से तेहरान में हो रही राजनीतिक और सैन्य गतिविधियों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यहाँ से निकलने वाला कोई भी संकेत वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल की श्रद्धांजलि और कूटनीतिक संदेश
ईरानी दूतावास द्वारा जारी किए गए आधिकारिक वीडियो और तस्वीरों में भारत सरकार की ओर से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को दिवंगत नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष खड़े होकर श्रद्धासुमन अर्पित करते देखा गया। इस प्रतिनिधिमंडल में भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा और बिहार के माननीय राज्यपाल सैयद अता हसनैन शामिल थे, जिन्होंने तेहरान पहुंचकर भारतीय जनता और सरकार की ओर से अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री मेहबूबा मुफ़्ती ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के वीडियो फुटेज साझा किए, जिसमें भारतीय प्रतिनिधियों को दिवंगत अयातुल्ला के समक्ष नमन करते देखा जा सकता है। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्घेरिटा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि माननीय राज्यपाल और उन्होंने संयुक्त रूप से भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए दिवंगत नेता को नमन किया है। इसके साथ ही बिहार लोक भवन के आधिकारिक वक्तव्य में बताया गया कि राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने हालिया संघर्ष में अपनी जान गंवाने वाले तमाम निर्दोष लोगों के परिवारों के प्रति भी गहरी संवेदना प्रकट की है।
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ की अमेरिका और इज़रायल को सख्त चेतावनी
ईरानी संसद के अध्यक्ष और इस समय देश के मुख्य परमाणु वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका और इज़रायल को आगाह किया है। उन्होंने ईरानी समाचार एजेंसियों से बात करते हुए कहा कि यदि अमेरिका और उसका सहयोगी इज़रायल चल रही राजनयिक वार्ताओं में किए गए वादों और प्रतिबद्धताओं से पीछे हटते हैं, तो ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए पुनः आवश्यक और कड़े कदम उठाने से तनिक भी नहीं हिचकिचाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान अपनी घरेलू राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को इस बड़े संकट के समय में एकजुट रखने का प्रयास कर रहा है।
तेहरान के इस विशाल धार्मिक सभागार में शुक्रवार को आम जनता और विदेशी दूतों के दर्शन के लिए रखे गए पार्थिव शरीर को लेकर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। 37 वर्षों तक ईरान की सत्ता पर निर्विवाद रूप से काबिज रहने वाले अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर को तेहरान के बाद शिया संप्रदाय के अत्यंत पवित्र धार्मिक केंद्रों कोम (ईरान), नजफ और करबला (इराक) ले जाया जाएगा। इसके उपरांत, गुरुवार को मशहद शहर में स्थित ईरान के सबसे पवित्र और मुख्य तीर्थस्थल पर उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप की नीतियों पर माथापच्ची
अगले सप्ताह तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में भी ईरान का मुद्दा बेहद गरमाने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों के प्रमुख नेता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ईरान और ग्रीनलैंड के मुद्दों पर पैदा हुए मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे। साथ ही यूरोपीय देश इस बात का भी संकेत देना चाहते हैं कि वे अपनी क्षेत्रीय रक्षा और सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी खुद उठाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, खासकर ऐसे समय में जब वॉशिंगटन इस रक्षा गठबंधन के प्रति अपनी प्रतिबद्धताओं और वित्तीय योगदान को लगातार कम करने के संकेत दे रहा है।
इस अहम शिखर बैठक के दौरान नाटो के तमाम सदस्य देशों से अपने रक्षा बजट और खर्च को बढ़ाने के साथ-साथ यूरोपीय महाद्वीप की सुरक्षा को आंतरिक रूप से अधिक मजबूत करने की प्रतिज्ञा दोहराए जाने की पूरी उम्मीद है, ताकि अमेरिकी नीतियों में आने वाले बदलावों से उनके अपने हितों पर कोई सीधा आंच न आए।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और ईरानी कैबिनेट की उपस्थिति
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने शुक्रवार को तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के ताबूत के समीप पहुंचकर विशेष प्रार्थना और नमाज़ अदा की। इस दौरान उनके साथ देश के शीर्ष राजनयिक दल के सदस्यों सहित कैबिनेट के कई मंत्री भी मौजूद थे। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित किए गए फुटेज में राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान को भावुक मुद्रा में नमाज़ पढ़ते देखा गया। ताबूत के ऊपर एक पारंपरिक काली पगड़ी रखी हुई थी, जो शिया शरिया परंपरा के अनुसार केवल उन्हीं प्रतिष्ठित धर्मगुरुओं को पहनाई जाती है जो सीधे तौर पर पैगंबर मोहम्मद के वंशज माने जाते हैं।
3 जुलाई 2026 को आयोजित इस मुख्य शोक सभा में देश के शीर्ष सैन्य और नागरिक अधिकारी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने ईरान की इस्लामिक क्रांति के पहले नेता रूहुल्लाह ख़ुमैनी के पोते हसन ख़ुमैनी से भी गर्मजोशी से मुलाकात की। इस दौरान मंच पर सैन्य कमांडर मोहसेन रेज़ाई, विदेश मंत्री अब्बास अराकची, देश के मुख्य न्यायाधीश ग़ुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालीबाफ़ जैसी तमाम बड़ी हस्तियां उपस्थित थीं, जो देश की आंतरिक कूटनीतिक एकजुटता को प्रदर्शित कर रही थीं।
पाकिस्तानी सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व की उपस्थिति और व्यापक प्रभाव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और उनके शक्तिशाली सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर शुक्रवार को एक विशेष विमान से तेहरान पहुंचे। फरवरी माह में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में मारे गए सर्वोच्च नेता को श्रद्धांजलि देने के लिए आए इस प्रतिनिधिमंडल में पाकिस्तान के कई उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल में नेशनल असेंबली के अध्यक्ष अयाज़ सादिक़, उपप्रधानमंत्री व विदेश मंत्री इसहाक़ डार, सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार, पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी और सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह भी शामिल थे।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, पाकिस्तान इस गंभीर संकट के समय में अपने भाई समान पड़ोसी देश ईरान के साथ पूर्ण रूप से खड़ा है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने ताबूत पर हाथ रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की, जो दोनों देशों के बीच इस नाजुक समय में प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
तालिबान प्रशासन और सऊदी अरब के दूतों का आगमन
अफ़गानिस्तान के तालिबान प्रशासन में विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी भी शुक्रवार को तेहरान पहुंचे और दिवंगत सर्वोच्च नेता के ताबूत के समक्ष खड़े होकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। दिलचस्प बात यह है कि मुत्तक़ी का यह दौरा ठीक उसी समय हुआ जब उनके सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी अहमद मसूद ने भी वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी, जिनके दिवंगत पिता को 1990 के दशक में ईरान का पूर्ण समर्थन प्राप्त था। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री वलीद अल-ख़रेजी ने भी अपने विशेष प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचकर अपनी संवेदना व्यक्त की।
28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका के इस बड़े सैन्य अभियान के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उन तमाम खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया था, जिनमें सऊदी अरब भी शामिल था। इस भीषण युद्ध में हजारों निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है, जिसमें सबसे बड़ा आर्थिक और मानवीय नुकसान स्वयं ईरान और लेबनान के हिज़्बुल्लाह समर्थित क्षेत्रों को उठाना पड़ा है।
दक्षिणी लेबनान में इज़राइल की आक्रामक सैन्य कार्रवाई
इस बीच, जमीनी मोर्चे पर युद्ध की विभीषिका कम होने का नाम नहीं ले रही है। इज़रायली रक्षा बलों (IDF) ने शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि उन्होंने दक्षिणी लेबनान के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात अपने सैनिकों पर हुए हमलों का करारा जवाब देते हुए हिज़्बुल्लाह के लगभग 10 रणनीतिक ठिकानों पर भारी बमबारी की है। इज़राइल के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने एक बार फिर दोहराया है कि जब तक पूरे लेबनान क्षेत्र से हिज़्बुल्लाह का पूर्ण रूप से निरस्त्रीकरण नहीं हो जाता, तब तक वे अपनी सेनाओं को वहां से पीछे नहीं हटाएंगे।
इज़रायली सेना के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि उनके लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी के हथियारों ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के कई प्रमुख बुनियादी ढांचों, हथियार भंडारण डिपो और हथियार पहुंचाने के काम में इस्तेमाल होने वाले एक बड़े सैन्य ट्रक को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, जिससे हिज़्बुल्लाह की अग्रिम युद्ध क्षमताओं को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
रूस का प्रतिनिधित्व और यमन के हूती विद्रोहियों का अल्टीमेटम
रूस के पूर्व राष्ट्रपति और इस समय राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद करीबी और विशेष दूत दिमित्री मेदवेदेव ने शुक्रवार को तेहरान में दिवंगत सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के पार्थिव शरीर पर रूस की ओर से आधिकारिक रूप से श्रद्धांजलि दी। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने उनका स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच गहरे होते रक्षा और रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
दूसरी ओर, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को एक अत्यंत गंभीर और सीधी चेतावनी जारी की है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारेई ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से कहा कि यदि सऊदी अरब ने उनके हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने या यमन आ रहे किसी भी ईरानी नागरिक विमान को रोकने का प्रयास किया, तो वे सऊदी अरब के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और तेल रिफाइनरियों पर व्यापक मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर देंगे। यह चेतावनी तब आई है जब सऊदी अरब ने कथित तौर पर एक ईरानी विमान को यमन की राजधानी में उतरने से रोक दिया था।
तेहरान में कड़ा सुरक्षा पहरा और आम जनता का सब्र
शुक्रवार की शाम तक तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर को पूरी तरह से एक अभेद्य सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया गया था। चारों ओर दंगा नियंत्रण पुलिस के भारी दस्तों को तैनात किया गया था और कटीले तारों वाले सुरक्षा बैरिकेड खड़े कर दिए गए थे। इसके बावजूद, आम लोगों का हौसला कम नहीं हुआ और लाखों की तादाद में लोग परिसर के द्वार खुलने से लगभग 10 घंटे पहले से ही कड़ाके की ठंड और अनिश्चितता के बीच कतारों में खड़े रहे।
दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर सोमवार, 6 जुलाई 2026 तक आम लोगों के दर्शन के लिए इसी परिसर में रखा जाएगा। शनिवार, 5 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6:00 बजे (0230 GMT) इस पावन परिसर के मुख्य द्वार आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसके बाद इस ऐतिहासिक शोक सभा में जनसैलाब उमड़ने की पूरी संभावना है।



















