वैश्विक वित्तीय बाजारों में तेजी का सिलसिला जारी है, हालांकि हफ्ता बंद होने के दौरान अमेरिकी बाजारों समेत कई बड़े सूचकांकों में कुछ नरमी जरूर देखने को मिली। डैंसके बैंक की रिसर्च टीम की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को इक्विटी सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। विश्लेषकों का कहना है कि इसके बावजूद कई वैश्विक बाजारों में साप्ताहिक आधार पर गिरावट दर्ज की गई, जिसमें अमेरिका का प्रदर्शन विशेष रूप से कमजोर रहा। इसके विपरीत, नॉर्डिक क्षेत्र के बाजारों ने पिछले हफ्ते सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में अपनी जगह बनाई।
बाजार को सहारा देने वाले चार मुख्य कारक
मौजूदा समय में वैश्विक शेयर बाजारों की दिशा तय करने वाले चार प्रमुख स्तंभों में कोई खास बदलाव नहीं आया है। पहली बड़ी ताकत होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास चल रहा तेल का संकट है, जबकि दूसरी ताकत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुनियादी ढांचे यानी एआई कैपेंक्स के विस्तार की लंबी अवधि की क्षमता है। इसके अलावा, डॉलर के अवमूल्यन को लेकर हाल ही में उभरी आशंकाएं और सबसे बढ़कर बेहद मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक्स आंकड़े इस फेरबदोथ में शामिल हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि इनमें से सबसे अहम भूमिका मजबूत मैक्रो डेटा की है, जिसने एक बार फिर शुक्रवार के पीएमआई आंकड़ों के जरिए इक्विटी बाजारों को डूबने से बचा लिया है।
सेक्टर लीडरशिप और वोलाटाइल माहौल
बाजार के भीतर डिफेंसिव शेयरों की तरफ कोई झुकाव नजर नहीं आ रहा है, जो इस बात का बड़ा सबूत है कि यूटिलिटीज की तुलना में मैटेरियल्स सेक्टर साफ तौर पर आगे चल रहा है। इसके साथ ही, वीआईएक्स सूचकांक पिछले पूरे हफ्ते के दौरान लगभग 15.5 के आसपास मंडराता रहा और अंत में बिना किसी बड़े बदलाव के बंद हुआ, जो यह दर्शाता है कि बाजार में अस्थिरता अभी सीमित दायरे में है। एशियाई बाजारों में कारोबार की शुरुआत सुस्त रही और दक्षिण कोरियाई बाजार में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी और यूरोपीय इक्विटी फ्यूचर्स भी शुक्रवार के बंद स्तरों के आसपास ही कारोबार करते नजर आए।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और डॉलर पर दबाव
करेंसी मार्केट में, जीबीपी/USD यानी पाउंड-डॉलर की जोड़ी नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत में लगभग 136.50 के आसपास पॉजिटिव बायस के साथ ट्रेड कर रही है। यह जोड़ी पिछले शुक्रवार को छुए गए 11 फरवरी के बाद के अपने सबसे ऊपरी स्तर के बेहद करीब बनी हुई है। इसके अलावा, मौजूदा फंडामेंटल स्थितियां तेजी का समर्थन करने वाले ट्रेडर्स के पक्ष में हैं, जो लगभग एक महीने से चल रहे अपट्रेंड के आगे भी जारी रहने की संभावना को मजबूत करती हैं। दूसरी ओर, EUR/USD यानी यूरो-डॉलर की जोड़ी एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान 1.1680 के आसपास टिकी हुई है और लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत बनी हुई है।
अमेरिकी राजकोषीय कदमों का असर और बॉन्ड यील्ड
अमेरिकी डॉलर पर इस समय नए राजकोषीय उपायों का गहरा दबाव बना हुआ है, जिसके चलते यूरो को यह मजबूती मिल रही है। ट्रेजरी विभाग ने वित्तीय बाजारों को उस वक्त चौंका दिया जब उसने बढ़ते बॉन्ड यील्ड पर काबू पाने के लिए लंबी अवधि के सरकारी कर्ज की अपनी रीपरचेज यानी बायबैक की प्रक्रिया को कम से कम दोगुना करने का बड़ा ऐलान किया। खास तौर पर बुधवार को अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया। जीएमटी समयानुसार दोपहर 12:32 बजे, विभाग ने 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले सेक्टरों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन के आकार को बढ़ाने की घोषणा की। इसके तहत प्रति ऑपरेशन अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से शुरू होकर 4 नवंबर तक लागू रहेगी।
सोने की चमक और कमोडिटी बाजार का हाल
अमेरिकी ट्रेजरी की इस बायबैक योजना और अमेरिका-कनाडा के बीच उभरे नए व्यापारिक तनावों के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल देखा गया है। पीली धातु ने डॉलर की कमजोरी का पूरा फायदा उठाते हुए एशियाई कारोबार के दौरान अपनी शानदार लय को बरकरार रखा और 4,600 डॉलर के स्तर को पार करते हुए तीन महीने के नए उच्च स्तर को छू लिया। विश्लेषकों का कहना है कि व्यापक आर्थिक मोर्चे पर बने ऐसे हालात आने वाले दिनों में बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।



















