संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जाने-माने पर्यावरणविद और कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर स्थित विरोध प्रदर्शन स्थल से हटा दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सोमवार से शुरू होने वाले संसद सत्र के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने पुलिस को यह निर्देश दिया था। इस कार्रवाई के बाद से जंतर-मंतर पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है, जहां NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था और संसद मार्च की तैयारियां
संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'चलो संसद' मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। पुलिस को अंदेशा है कि संसद भवन के आसपास भारी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी पृष्ठभूमि में नई दिल्ली जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रमुख प्रवेश मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग को मजबूत कर हर आने-जाने वाले वाहन की बारीकी से जांच की जा रही है।
नई दिल्ली के DCP ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने पर पूरी तरह से रोक है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि CJP द्वारा प्रस्तावित इस विरोध मार्च के लिए न तो कोई अनुमति मांगी गई है और न ही प्रशासन द्वारा ऐसी कोई अनुमति दी गई है। फिर भी, CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने समर्थकों से अपील की है कि वे किसी भी पुलिसिया कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहें और बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पर जुटें।
सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक का उपचार और उनकी सेहत का ब्यौरा
लगातार 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति नाजुक बनी हुई है। उन्हें जबरन सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद चिकित्सा प्रशासन उनकी सेहत की लगातार निगरानी कर रहा है। अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चारु बम्बा ने मीडिया को बताया कि लंबे समय से अनशन पर रहने के कारण वांगचुक के शरीर में पानी की बेहद कमी हो गई है, जिससे उनके स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट और जटिलताएं आ सकती हैं। हालांकि, उन्होंने पुष्टि की कि वांगचुक अभी पूरी तरह होश में हैं और उनके पल्स, ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन संतृप्ति के आंकड़े सामान्य सीमा के भीतर हैं।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गंभीर शारीरिक जटिलताओं से बचने के लिए उन्हें मुंह के जरिए या नसों के माध्यम से यानी IV फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट थेरेपी देना बेहद जरूरी है। इसके विपरीत, वांगचुक और उनके परिवार ने इस उपचार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर सुरनजीत चटर्जी ने इस बात की चेतावनी दी है कि प्रयोगशाला जांच के नतीजे 'कंपनसेटेड मेटाबॉलिक एसिडोसिस' की ओर इशारा करते हैं, जो एक समय के बाद मरीज के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकता है।
अस्पताल स्थानांतरण पर कोर्ट की सुनवाई और परिवार के आरोप
सोनम वांगचुक को सरकारी अस्पताल से किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। याचिका में उन्होंने सफदरजंग अस्पताल के प्रबंधन पर भरोसा न होने की बात कही थी और वांगचुक को मेदांता या किसी अन्य निजी अस्पताल में भेजने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर कोई भी निर्देश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अगर कार्यकर्ता चाहें तो वे डॉक्टरों के साथ सहयोग कर सकते हैं। अतिरिक्त सॉलिटियर जनरल शर्मा ने दलील दी कि सरकारी अस्पताल में वांगचुक की पूरी देखभाल की जा रही है और उनके इलाज में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही है।
कोर्ट की सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए गीतांजलि आंग्मो ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी अस्पताल के वार्डों में घूम रहे हैं और उन्होंने वांगचुक का निजी सामान और उनका टैबलेट तक जब्त कर लिया है। गीतांजलि ने सवाल उठाया कि एक स्वतंत्र देश में उनके निजी डॉक्टर को भी उनसे मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि वाकई वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया था, तो इसकी पुष्टि के लिए अन्य लैब से जांच कराने के हमारे अनुरोध पर रिपोर्ट देने में दस घंटे की देरी क्यों की गई।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तीखी बयानबाजी
इस पूरे घटनाक्रम पर देश के सियासी गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ पहले ही सख्त कार्रवाई की जा चुकी है। उन्होंने सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने का भी आग्रह किया। इसके विपरीत, विपक्ष के कई बड़े नेता प्रदर्शनकारियों के समर्थन में उतर आए हैं।
बीजू जनता दल के प्रमुख और ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि जिस देश की परीक्षा प्रणाली खतरे में हो, उसका भविष्य संकट में पड़ जाता है। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे को संसद के मानसून सत्र में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शिवसेना के उद्धव ठाकरे ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो सरकार युवाओं के भविष्य के प्रति जवाबदेह नहीं है, उसे सत्ता से बेदखल करने की लड़ाई अब शुरू होनी चाहिए। वहीं, कांग्रेस नेता सचिन पायलट और महाराष्ट्र कांग्रेस के विधायक नाना पटोले ने पुलिस कार्रवाई को तानाशाही करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है।
दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अपना जनाधार खोने के बाद अब सोनम वांगचुक को एक राजनीतिक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका कहना था कि जब हर कोई उनके गिरते स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है, तब विपक्ष उन्हें अनशन पर बने रहने के लिए उकसा रहा है।
आंदोलन का विस्तार और छात्र संगठनों का संकल्प
भले ही सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया गया हो, लेकिन जंतर-मंतर पर छात्रों का हौसला कम नहीं हुआ है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA के तीन छात्र नेहा, अमीन अमितोज और मनीष कुमार अभी भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। पूर्व अध्यक्ष एन. साई बालाजी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस इन छात्रों को भी जबरन हटाने की कोशिश कर रही है, लेकिन समर्थकों ने उनके चारों ओर एक मानव दीवार बना दी है ताकि सुरक्षाकर्मी उन तक न पहुंच सकें।
यह आंदोलन अब दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहा है। त्रिपुरा में CPI(M) की राज्य समिति ने घोषणा की है कि वे CJP के संसद मार्च के समर्थन में राज्य भर में रैलियां करेंगे। बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में भी CJP के बैनर तले एक हजार से अधिक नागरिक और छात्र एकत्र हुए, जहां उन्होंने लोकतांत्रिक जवाबदेही और NEET परीक्षा में सुधार की मांग की। दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया भी जंतर-मंतर पहुंचे और आंदोलनकारियों को 'शिक्षा क्रांति का सैनिक' बताते हुए उनके इस संघर्ष की सराहना की। इस बीच, राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद के आगामी मानसून सत्र में कामकाज को निलंबित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए नियम 267 के तहत नोटिस दिया है।
'दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन' और भविष्य की रूपरेखा
अस्पताल के बिस्तर से अपनी पत्नी गीतांजलि के जरिए भेजे गए एक हस्तलिखित संदेश में सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन को भारत का 'दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन' करार दिया है। उन्होंने अपने समर्थकों से अपील की है कि वे इस लड़ाई को 'अन्याय से आजादी' और 'डर से आजादी' के रूप में देखें। गीतांजलि आंग्मो ने घोषणा की है कि वांगचुक की अनुपस्थिति में वह खुद सोमवार को होने वाले संसद मार्च का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे देश की सबसे मजबूत बुनियाद है और इसे बचाने के लिए देश के युवाओं को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
इसके साथ ही दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सोमवार को होने वाले इस प्रदर्शन के मद्देनजर व्यापक ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। यात्रियों को रफी मार्ग, मोतीलाल नेहरू मार्ग, मौलाना आजाद रोड और विजय चौक जैसे व्यस्त गोलचक्करों से बचने की सलाह दी गई है ताकि उन्हें यात्रा के दौरान किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।



















