असम के विधायक और रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने शनिवार को जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल स्थल से जबरन उठाकर अस्पताल भेजे जाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है।
गोगोई की मांग, वांगचुक को रिहा करो, प्रधान इस्तीफा दें
गोगोई ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे किसी व्यक्ति को जबरन अस्पताल भेजना बेहद चिंताजनक है और इससे मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उन्होंने कहा, "असम और पूर्वोत्तर की जनता के प्रतिनिधि के तौर पर मैं सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करने की मांग करता हूं।"
विधायक ने आगे कहा कि वांगचुक की लड़ाई सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ता है। उनका मानना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग स्वीकार की जानी चाहिए, क्योंकि वांगचुक आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। गोगोई ने देशभर के लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।
कैसे अस्पताल पहुंचे वांगचुक
शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सफदरजंग अस्पताल ले गई। वांगचुक कई दिनों से अन्न त्याग कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि देशभर की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों, जिनमें नीट पेपर लीक विवाद भी शामिल है, के लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। उनकी भूख हड़ताल को छात्रों को प्रभावित करने वाली परीक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ एक प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था, और इसने देशभर में काफी ध्यान खींचा।
कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च पर संकट
वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य जंतर मंतर पर धरना जारी रखे हुए हैं और सोमवार, यानी मानसून सत्र के पहले दिन, संसद तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। यह मार्च खुद वांगचुक ने पहले घोषित किया था, इससे पहले कि उन्हें शनिवार सुबह अस्पताल भेजा गया।
संगठन ने अब तक इस मार्च के लिए दिल्ली पुलिस से औपचारिक अनुमति नहीं मांगी है। संसद सत्र के दौरान जिस तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर रहती है, उसे देखते हुए अब आवेदन करने पर भी अनुमति मिलने की संभावना बहुत कम है। दिल्ली पुलिस संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली जिले में, खासकर संसद भवन और इंडिया गेट के आसपास, BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करती है, जो पहले धारा 144 हुआ करती थी। मानसून सत्र के दौरान भी ये पाबंदियां सख्ती से लागू रहने की उम्मीद है।
विपक्ष का समर्थन वांगचुक के साथ
वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान पुलिस की इस कार्रवाई पर विपक्ष के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता पवन खेड़ा ने इस कार्रवाई की आलोचना की, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इसकी निंदा की। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।


















