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असम के विधायक अखिल गोगोई ने वांगचुक की रिहाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठाई मांगराजनीति
19 जुल॰ 2026, 3:00 pm (45 दिन पहले)· 1

असम के विधायक अखिल गोगोई ने वांगचुक की रिहाई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठाई मांग

रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल ले जाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए उनकी तुरंत रिहाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

असम के विधायक और रायजोर दल प्रमुख अखिल गोगोई ने शनिवार को जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल स्थल से जबरन उठाकर अस्पताल भेजे जाने की दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है और इसे मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया है।

गोगोई की मांग, वांगचुक को रिहा करो, प्रधान इस्तीफा दें

गोगोई ने कहा कि भूख हड़ताल पर बैठे किसी व्यक्ति को जबरन अस्पताल भेजना बेहद चिंताजनक है और इससे मौलिक व संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। उन्होंने कहा, "असम और पूर्वोत्तर की जनता के प्रतिनिधि के तौर पर मैं सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा करने की मांग करता हूं।"

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विधायक ने आगे कहा कि वांगचुक की लड़ाई सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश के भविष्य पर पड़ता है। उनका मानना है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग स्वीकार की जानी चाहिए, क्योंकि वांगचुक आम लोगों और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह लड़ाई लड़ रहे हैं। गोगोई ने देशभर के लोगों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।

कैसे अस्पताल पहुंचे वांगचुक

शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस सोनम वांगचुक को जंतर मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल से सफदरजंग अस्पताल ले गई। वांगचुक कई दिनों से अन्न त्याग कर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप है कि देशभर की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों, जिनमें नीट पेपर लीक विवाद भी शामिल है, के लिए शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। उनकी भूख हड़ताल को छात्रों को प्रभावित करने वाली परीक्षा प्रणाली की खामियों के खिलाफ एक प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था, और इसने देशभर में काफी ध्यान खींचा।

कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च पर संकट

वांगचुक के अस्पताल जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य जंतर मंतर पर धरना जारी रखे हुए हैं और सोमवार, यानी मानसून सत्र के पहले दिन, संसद तक मार्च निकालने की तैयारी में हैं। यह मार्च खुद वांगचुक ने पहले घोषित किया था, इससे पहले कि उन्हें शनिवार सुबह अस्पताल भेजा गया।

संगठन ने अब तक इस मार्च के लिए दिल्ली पुलिस से औपचारिक अनुमति नहीं मांगी है। संसद सत्र के दौरान जिस तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था आमतौर पर रहती है, उसे देखते हुए अब आवेदन करने पर भी अनुमति मिलने की संभावना बहुत कम है। दिल्ली पुलिस संसद सत्र के दौरान नई दिल्ली जिले में, खासकर संसद भवन और इंडिया गेट के आसपास, BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करती है, जो पहले धारा 144 हुआ करती थी। मानसून सत्र के दौरान भी ये पाबंदियां सख्ती से लागू रहने की उम्मीद है।

विपक्ष का समर्थन वांगचुक के साथ

वांगचुक की भूख हड़ताल के दौरान पुलिस की इस कार्रवाई पर विपक्ष के कई नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता पवन खेड़ा ने इस कार्रवाई की आलोचना की, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी इसकी निंदा की। इससे सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया है।

सवाल-जवाब

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?
वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर थे, शनिवार को दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई।
अखिल गोगोई ने क्या मांग की है?
उन्होंने सोनम वांगचुक की तुरंत रिहाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।
वांगचुक की भूख हड़ताल किस मुद्दे को लेकर थी?
वे देशभर की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों, जिनमें नीट पेपर लीक विवाद भी शामिल है, को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे।
कॉकरोच जनता पार्टी अब क्या करने वाली है?
पार्टी सोमवार को मानसून सत्र के पहले दिन संसद तक मार्च निकालने की योजना बना रही है, हालांकि उसने अभी दिल्ली पुलिस से इसकी अनुमति नहीं मांगी है।
क्या इस मार्च को अनुमति मिलने की संभावना है?
संसद सत्र के दौरान लागू सख्त सुरक्षा नियमों को देखते हुए अनुमति मिलने की संभावना बहुत कम है।
किन विपक्षी नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पवन खेड़ा, अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इसकी आलोचना की।
नई दिल्ली जिले में किस कानून के तहत पाबंदियां लागू हैं?
दिल्ली पुलिस BNSS की धारा 163, जो पहले धारा 144 थी, के तहत संसद भवन और इंडिया गेट के आसपास निषेधाज्ञा लागू करती है।
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