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बालाघाट में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आधा-अधूरा ड्रेनेज प्रोजेक्ट बना जी का जंजालमध्य प्रदेश
10 जुल॰ 2026, 11:50 am (45 दिन पहले)· 2

बालाघाट में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आधा-अधूरा ड्रेनेज प्रोजेक्ट बना जी का जंजाल

बालाघाट में मानसून की पहली बारिश ने ड्रेनेज प्रोजेक्ट की पोल खोल दी है, जिससे 3.20 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत होने के बाद भी जनता जलभराव की समस्या से जूझ रही है।

बालाघाट में मानसून की पहली बारिश ने ही प्रशासनिक दावों की पूरी तरह से पोल खोल दी है। गर्मी के दिनों में जो विकास कार्य कागजों पर चमक रहे थे, वे पहली ही बरसात के पानी में बह गए। नगर पालिका, स्थानीय प्रशासन और नेताओं की ओर से किए जा रहे विकास के तमाम दावे अब पानी-पानी हो चुके हैं। बालाघाट के जिन संवेदनशील इलाकों में हर साल भीषण जलभराव होता था, वहां इस बार भी हालात जरा भी नहीं बदले हैं। इस समस्या का स्थाई समाधान निकालने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने लाखों-करोड़ों का बजट स्वीकृत किया था, लेकिन धरातल पर उसका कोई असर नहीं दिख रहा है। नतीजा यह है कि शहर के बड़े कारोबारी से लेकर आम नागरिक तक, हर कोई इस अव्यवस्था के कारण भारी मुश्किलों का सामना कर रहा है।

करोड़ों की जल निकासी परियोजना अधूरी रहने की कहानी

प्रशासन के पास मानसून आने से पहले करीब नौ महीनों का लंबा समय था। इस अवधि में जल निकासी की सुचारू व्यवस्था के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जा सकती थी। शहर के मुख्य मार्गों और संवेदनशील इलाकों से पानी निकालने के लिए नालियों के निर्माण का काम शुरू किया गया था। इस ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए नगर पालिका ने करीब 3 करोड़ 20 लाख रुपये का एक भारी-भरकम बजट तैयार किया था। इस काम का टेंडर रीवा की कंपनी एचएमएस कंसलटेंट एंड कंपनी को दिया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत बारिश का मौसम आने से ठीक दो महीने पहले की गई। समय कम होने के साथ-साथ निर्माण कार्य की गति भी बेहद धीमी रही, जो अब स्थानीय निवासियों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। अधूरी और बेतरतीब खुदाई ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

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पेटी कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम और संसाधनों की भारी कमी

इस पूरे मामले में नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब 3 करोड़ 20 लाख रुपये जैसी बड़ी राशि का टेंडर जारी किया गया, तो क्या ठेका लेने वाली कंपनी के पिछले रिकॉर्ड की गहन जांच की गई थी? क्या यह देखा गया था कि संबंधित कंपनी के पास इस तरह के बड़े निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त मशीनरी और तकनीकी संसाधन उपलब्ध हैं या नहीं? दरअसल, बड़ी निर्माण कंपनियां अक्सर टेंडर हासिल करने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ करके जमीनी काम छोटी कंपनियों को सौंप देती हैं, जिसे पेटी सिस्टम कहा जाता है। इस पेटी कॉन्ट्रैक्टिंग के कारण काम की गुणवत्ता पर तो विपरीत असर पड़ता ही है, साथ ही काम पूरा होने में भी अत्यधिक देरी होती है। इस परियोजना के साथ भी ऐसा ही हुआ, जिससे पूरा शहर परेशान है।

सड़कों पर खुदे आधे-अधूरे नाले दे रहे हादसों को न्योता

नियमों के मुताबिक, बारिश शुरू होने से पहले ही जल निकासी का सारा काम पूरा हो जाना चाहिए था। लेकिन संबंधित एजेंसी के पास पर्याप्त मानव संसाधन और उपकरणों की कमी के कारण काम कभी चालू रहता था तो कभी पूरी तरह बंद हो जाता था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से निर्माण स्थल पर कोई काम नहीं हुआ है, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई है। मानसून के इस मौसम में लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। मिट्टी के धंसने और लोहे की सलाखों में गिरकर घायल होने का खतरा लगातार बना हुआ है। शहर के प्रमुख हनुमान चौक सहित कई अन्य व्यस्ततम चौराहों पर सड़कों के बीचोबीच गहरे नाले खोदकर उन्हें खुला और अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे हर पल गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

विधायक की चेतावनी और नगर पालिका की कार्रवाई

इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय विधायक अनुभा मुंजारे ने नगर पालिका के इस पूरे ड्रेनेज प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस परियोजना में न केवल लेटलतीफी की जा रही है, बल्कि भ्रष्टाचार की बू भी आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय निवासियों को इस नारकीय स्थिति से जल्द ही मुक्ति नहीं मिली, तो वह जनता के साथ मिलकर उग्र धरना-प्रदर्शन करेंगी। इसके अलावा, उन्होंने ठेकेदारों की इस तरह की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सख्त से सख्त नियम बनाने की मांग की है। वह इस पूरे भ्रष्टाचार और लापरवाही के मामले की शिकायत भोपाल में नगरीय प्रशासन मंत्री से भी करने जा रही हैं। दूसरी तरफ, नगर पालिका के सीएमओ सूर्य प्रकाश उके ने सफाई देते हुए कहा है कि निर्माण कंपनी की इस सुस्ती और लेटलतीफी को देखते हुए उस पर जुर्माना लगाया गया है, और जल्द से जल्द इस अधूरे काम को पूरा करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

सवाल-जवाब

बालाघाट में ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त करने के लिए कितना बजट स्वीकृत किया गया था?
बालाघाट नगर पालिका ने शहर में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 3 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया था।
इस ड्रेनेज प्रोजेक्ट का काम किस निर्माण कंपनी को सौंपा गया था?
इस महत्वपूर्ण जल निकासी परियोजना के निर्माण का ठेका रीवा की कंपनी एचएमएस कंसलटेंट एंड कंपनी को दिया गया था।
स्थानीय लोगों को मानसून के मौसम में किस बात का डर सता रहा है?
सड़कों पर करीब 15 दिनों से काम बंद होने के कारण आधे-अधूरे नाले खुले पड़े हैं, जिससे मिट्टी धंसने और दुर्घटनाएं होने का डर बना हुआ है।
इस सुस्ती और लेटलतीफी पर नगर पालिका ने निर्माण कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
नगर पालिका के सीएमओ सूर्य प्रकाश उके के अनुसार, देरी के लिए जिम्मेदार कंस्ट्रक्शन कंपनी पर जुर्माना लगाया गया है और काम जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय विधायक अनुभा मुंजारे ने इस मामले में क्या कदम उठाने की बात कही है?
विधायक ने काम में देरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भोपाल में नगरीय प्रशासन मंत्री से शिकायत करने और मांगें न पूरी होने पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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