उज्जैन के महाकाल थाना क्षेत्र में गुरुवार को उस समय माहौल गरमा गया जब जयसिंहपुरा स्थित होटल पीताम्बरा रेसिडेंसी पर नगर निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची। टीम के साथ भारी पुलिस बल भी मौजूद था और शुरुआत में मौके पर बुलडोजर भी मंगवाया गया था, लेकिन बाद में अधिकारियों ने होटल को तोड़ने के बजाय सील करने का फैसला किया। कार्रवाई शुरू होते ही होटल संचालक के परिवार की महिलाएं सड़क पर उतर आईं और नगर निगम पर बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए विरोध जताने लगीं। करीब डेढ़ घंटे तक मौके पर तनाव और हंगामे का माहौल बना रहा।
विवाद की जड़ में फायर अधिकारी से मारपीट
होटल संचालक के परिवार का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई एक पुराने विवाद का बदला है। परिवार के मुताबिक कुछ समय पहले फायर सेफ्टी जांच के दौरान एक अधिकारी ने उनसे अभद्र व्यवहार किया था, जिसके बाद गुस्से में आकर परिवार के बेटे विकास अरोनया की उस अधिकारी से मारपीट हो गई थी। परिवार का दावा है कि वे आदिवासी समुदाय से आते हैं और नगर निगम ने इसी रंजिश में न सिर्फ होटल बल्कि उनके रहने वाले मकान को भी सील कर दिया, जबकि उस समय घर के अंदर छोटे-छोटे बच्चे मौजूद थे। परिवार के इस आरोप ने कार्रवाई को और विवादित बना दिया और मौके पर मौजूद महिलाएं लगातार निगम अधिकारियों से उलझती रहीं।
पुलिस ने संभाला मोर्चा, महिलाओं को थाने ले जाया गया
जैसे-जैसे विरोध बढ़ता गया, हालात बिगड़ते देख पुलिस को बीच में आना पड़ा। पुलिसकर्मियों ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे किसी भी तरह मानने को तैयार नहीं हुईं, तो पुलिस ने उन्हें मौके से हटाकर थाने ले जाया। इसके बाद नगर निगम की टीम ने बिना किसी और रुकावट के होटल को सील करने की कार्रवाई पूरी की। पूरे इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जिससे यह इलाका करीब छावनी जैसा नजर आने लगा।
मुख्य आरोपी विकास गिरफ्तार, कोर्ट में पेश
महाकाल थाना प्रभारी गगन बादल ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि फायर सेफ्टी निरीक्षण के दौरान ही अधिकारी के साथ मारपीट की घटना हुई थी। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी विकास अरोनया को गिरफ्तार कर लिया है और उसे कोर्ट में पेश भी किया जा चुका है। गगन बादल के मुताबिक मामले की जांच अभी जारी है।
अवैध निर्माण को लेकर पहले ही जारी हो चुका था नोटिस
दूसरी ओर नगर निगम के अधीक्षण यंत्री प्रमोद मालवीय ने बताया कि होटल पीताम्बरा रेसिडेंसी के अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम पहले ही नोटिस जारी कर चुका था। उनके मुताबिक प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि भवन तय बिल्डिंग लाइन से आगे बढ़कर बनाया गया है, यानी निर्माण नियमों का उल्लंघन करते हुए किया गया है। फिलहाल भवन को सील कर दिया गया है और आगे की जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होगा कि इस पर तोड़फोड़ जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
इस तरह एक तरफ फायर अधिकारी से मारपीट के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम ने भी सख्त रुख अपना लिया है। अब जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि होटल पीताम्बरा रेसिडेंसी पर आगे क्या कार्रवाई होती है और परिवार के आरोपों में कितनी सच्चाई है।











