मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शाजापुर जिले के कालापीपल में एक विशाल रोड शो के दौरान जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में किसानों की स्थिति सुधारने और सिंचाई सुविधाओं को व्यापक बनाने के साथ ही एमएसपी (MSP) तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने इस क्षेत्र के विकास के लिए 30.86 करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं की नींव रखी और पूर्ण हो चुके कई कार्यों का लोकार्पण किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पिछली सरकारों की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि दशकों तक जल विवादों को सुलझाने के बजाय किसानों को आपस में उलझाए रखा गया।
विकास की नई सौगात
मोहन यादव ने जानकारी दी कि राज्य में औद्योगिक विकास ने रफ्तार पकड़ी है और अब तक 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रदेश में आया है। उन्होंने विशेष रूप से स्थानीय क्षेत्र में पेप्सिको (PepsiCo) के संयंत्र की स्थापना का जिक्र किया, जो प्रत्यक्ष रूप से किसानों से आलू की खरीद करेगा। शाजापुर जिले के लिए विकास कार्यों की एक विस्तृत श्रृंखला की घोषणा करते हुए, उन्होंने रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और नई सड़कों के जाल को बिछाने का वादा किया, जिससे कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आएगा।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर बड़ा बयान
समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) के विषय पर मुख्यमंत्री ने अपना रुख साफ करते हुए सवाल किया कि आखिर हिंदुओं और मुसलमानों के लिए अलग-अलग कानून की व्यवस्था क्यों रहनी चाहिए? उन्होंने कानून की एकरूपता पर जोर देते हुए कहा कि मुस्लिम महिलाओं के हितों की अनदेखी अब स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार की मंशा स्पष्ट है और वे इस महीने विधानसभा में यूसीसी विधेयक लाने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहे हैं।
जल विवाद और केंद्र का सहयोग
मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध परियोजना के माध्यम से दशकों पुराने जल विवादों के समाधान का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन को दिया। इस परियोजना से मध्य प्रदेश के 13 और राजस्थान के 15 जिलों को लाभ मिलने वाला है, और इसकी 90 फीसदी लागत केंद्र सरकार वहन करेगी। इसके अलावा, उन्होंने केन-बेतवा नदी परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते का उल्लेख किया, जिससे बुंदेलखंड में पानी की समस्या समाप्त होगी। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के साथ जल विवादों को सुलझा लिया गया है। सरदार सरोवर परियोजना के संदर्भ में, उन्होंने राहत की बात कही कि पूर्व में मध्य प्रदेश को 1,500 करोड़ रुपये चुकाने थे, जिसे अब घटाकर मात्र 231 करोड़ रुपये कर दिया गया है।











