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प्रशिक्षण और मातृत्व: उर्वशी सेंगर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाबमध्य प्रदेश
2 घंटे पहले· 2

प्रशिक्षण और मातृत्व: उर्वशी सेंगर मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश कैडर की आईपीएस उर्वशी सेंगर ने डिलीवरी के बाद भी प्रशिक्षण न मिलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अदालत ने सरकार से सवाल किया है कि शारीरिक रूप से फिट होने के बावजूद किसी महिला अधिकारी को ट्रेनिंग से क्यों रोका जा रहा है।

राजेश कुमारराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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नई दिल्ली में एक अहम कानूनी बहस छिड़ गई है कि क्या मातृत्व को किसी महिला आईपीएस अधिकारी के करियर की बाधा माना जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर मेडिकल रूप से फिट होने वाली महिला अधिकारियों को प्रोबेशनरी ट्रेनिंग पूरी करने से वंचित क्यों रखा जा रहा है। यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी उर्वशी सेंगर की याचिका के इर्द-गिर्द घूमता है।

मामले की पृष्ठभूमि और उर्वशी सेंगर का संघर्ष

उर्वशी सेंगर ने यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास कर आईपीएस अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया था। हालांकि, उनकी ट्रेनिंग के दौरान एक तकनीकी समस्या खड़ी हो गई। सितंबर 2025 में उनकी डिलीवरी हुई थी। मौजूदा नियमों के तहत, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को घुड़सवारी, लंबी दौड़ और कॉम्बैट ट्रेनिंग जैसी शारीरिक गतिविधियों से दूर रखा जाता है। व्यवस्था यह है कि ऐसी स्थिति में उन्हें उस बैच से हटाकर अगले बैच में शिफ्ट कर दिया जाता है। उर्वशी सेंगर की स्थिति में समस्या तब आई जब डिलीवरी के बाद वे पूरी तरह स्वस्थ थीं और मेडिकल बोर्ड ने भी उन्हें फिट घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्रशिक्षण पर लौटने की अनुमति नहीं दी गई। इस प्रशासनिक अड़चन को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लैंगिक समानता पर गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से सीधा प्रश्न किया कि यदि एक महिला अधिकारी डिलीवरी के बाद शारीरिक रूप से सक्षम है और प्रशिक्षण का सामना करने के लिए तैयार है, तो उसे प्रशिक्षण से क्यों रोका जा रहा है? न्यायाधीशों का मानना है कि मातृत्व किसी भी महिला अधिकारी के पेशेवर विकास में रुकावट नहीं बनना चाहिए, विशेषकर तब जब वह चिकित्सा के दृष्टिकोण से पूर्णतः फिट हो। कोर्ट ने सरकार से इस नीति के पीछे के तार्किक कारणों और औचित्य को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

प्रशिक्षण नियमों में बदलाव की संभावना

वर्तमान कानूनी प्रक्रिया में केंद्र सरकार को कोर्ट के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करना है। इस मामले ने भारतीय प्रशासनिक सेवाओं के भीतर चल रहे पुराने नियमों पर एक व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। जानकारों का सुझाव है कि आईपीएस प्रशिक्षण केवल शारीरिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, इसमें इनडोर कक्षाएं, कानून का अध्ययन और प्रशासनिक कौशल का विकास भी शामिल है। सुझाव यह भी दिया जा रहा है कि पूरी ट्रेनिंग को रोकने के बजाय उन महिला अधिकारियों को थ्योरी क्लासेस में बैठने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि उनकी सीनियरिटी और भविष्य की पदोन्नति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। आज की सुनवाई पर न केवल उर्वशी सेंगर की नजरें टिकी हैं, बल्कि देश भर की लाखों कामकाजी महिलाओं की उम्मीदें भी इस बात पर निर्भर करती हैं कि अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है।

इसका आप पर असर

भारत में: यह निर्णय भविष्य में मातृत्व के कारण करियर में रुकावट का सामना करने वाली कामकाजी महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत हो सकता है।

मध्य प्रदेश में: राज्य की प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत महिला अधिकारियों के लिए यह ट्रेनिंग संबंधी नियमों के सरलीकरण का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

सवाल-जवाब

उर्वशी सेंगर कौन हैं?
उर्वशी सेंगर मध्य प्रदेश कैडर की 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं जिन्होंने अपने प्रशिक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
उन्हें ट्रेनिंग से क्यों रोका गया?
मौजूदा नियमों के तहत गर्भावस्था के दौरान उन्हें शारीरिक गतिविधियों में शामिल होने से रोका गया था और डिलीवरी के बाद भी उन्हें वापस लौटने की अनुमति नहीं मिली।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने सरकार से पूछा है कि मेडिकल रूप से फिट होने के बाद भी महिला अधिकारियों को ट्रेनिंग पूरी करने से क्यों वंचित रखा जा रहा है।
आईपीएस ट्रेनिंग में क्या शामिल होता है?
आईपीएस ट्रेनिंग में फिजिकल टास्क के साथ-साथ इनडोर क्लासेस और कानून की पढ़ाई जैसे शैक्षणिक विषय भी शामिल होते हैं।
राजेश कुमार
लेखक के बारे मेंराजेश कुमारवरिष्ठ संवाददाता उतार प्रदेश
विशेषज्ञताभारत समाचार, राजनीति, सरकारी नीति, अर्थव्यवस्था, ब्रेकिंग न्यूज़, संसद, चुनाव, सामाजिक मुद्दे, बुनियादी ढाँचा, राष्ट्रीय मामले

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो पूरे भारत की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़ी घटनाओं को कवर करते हैं। वे राष्ट्रीय मामलों पर समय पर और भरोसेमंद रिपोर्टिंग देते हैं।

राजेश कुमार एक वरिष्ठ संवाददाता हैं जो भारत की राष्ट्रीय ख़बरों — राजनीति, शासन, अर्थव्यवस्था, सामाजिक मुद्दों और देशभर की बड़ी घटनाओं — में विशेषज्ञता रखते हैं। वे भारत के राजनीतिक परिदृश्य, नीतिगत फ़ैसलों, आर्थिक विकास, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक बदलावों को आकार देने वाली प्रमुख घटनाओं पर रिपोर्ट करते हैं। सटीकता, गहराई और संतुलित रिपोर्टिंग पर ज़ोर देते हुए राजेश अहम राष्ट्रीय मुद्दों और नागरिकों पर उनके असर का गहन विश्लेषण देते हैं। उनकी कवरेज में सरकारी योजनाएँ, संसदीय मामले, चुनाव, क्षेत्रीय घटनाक्रम और भारत के महत्वपूर्ण सामाजिक-आर्थिक रुझान शामिल हैं।

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