बालाघाट का ऐतिहासिक रेंजर्स कॉलेज नहीं जाएगा जबलपुर, 12 साल बाद फिर गूंजेगी नई बैच की रौनकमध्य प्रदेश
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बालाघाट का ऐतिहासिक रेंजर्स कॉलेज नहीं जाएगा जबलपुर, 12 साल बाद फिर गूंजेगी नई बैच की रौनक

मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित सौ साल पुराने रेंजर्स कॉलेज के जबलपुर शिफ्ट होने की अटकलों पर विराम लग गया है, वन विभाग ने पुष्टि की है कि कॉलेज बालाघाट में ही रहेगा और जल्द नई ट्रेनिंग बैच शुरू होगी।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की करीब 53 प्रतिशत जमीन पर घने जंगल फैले हैं। इन जंगलों में पेड़ों की कई प्रजातियां मौजूद हैं और साथ ही अलग-अलग तरह के वन्य प्राणी और पक्षी भी यहां बसते हैं। इतनी समृद्ध जैव विविधता के चलते बालाघाट को दुनियाभर में एक मिसाल के तौर पर देखा जाता है, और यहां का ऐतिहासिक रेंजर्स कॉलेज इसी पहचान का बड़ा हिस्सा रहा है। बीते 12 साल से इस कॉलेज में फॉरेस्टरों की ट्रेनिंग बंद पड़ी थी, जिसके चलते स्थानीय लोगों में यह डर बैठ गया था कि यह संस्थान बालाघाट से जबलपुर शिफ्ट हो सकता है। लेकिन अब वन विभाग के अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि रेंजर्स कॉलेज बालाघाट में ही बना रहेगा और जल्द यहां नई बैचों की ट्रेनिंग भी शुरू होगी।

जैव विविधता से भरपूर बालाघाट में क्यों बना वानिकी का केंद्र

बालाघाट के जंगलों में पेड़ों की कई प्रजातियां मौजूद हैं और इनमें कई तरह के वन्य प्राणी और पक्षी भी बसते हैं। इतनी समृद्ध जैव विविधता की वजह से बालाघाट लंबे समय से प्रकृति के अध्ययन के लिए एक अहम केंद्र माना जाता रहा है। यही कारण था कि ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों ने वानिकी की पढ़ाई और शोध के लिए बालाघाट को चुना और यहीं रेंजर कॉलेज की नींव रखी। आगे चलकर यही रेंजर कॉलेज बालाघाट की दुनियाभर में पहचान बन गया।

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साल 1907 में रखी गई थी रेंजर्स कॉलेज की नींव

ब्रिटिश सरकार ने साल 1907 में भारत की विशाल वन संपदा के बेहतर प्रबंधन के मकसद से बालाघाट में रेंजर्स कॉलेज की स्थापना की थी। उस दौर में ब्रिटिश भारत में वानिकी की शिक्षा देने और वन रक्षकों को ट्रेनिंग देने के लिए खास तौर पर बालाघाट को चुना गया था। इसके कई दशक बाद नवंबर 1979 में भारत सरकार ने इसी संस्थान को औपचारिक रूप से वन रेंजर्स कॉलेज का नाम दिया। उस वक्त इस कॉलेज का पूरा प्रशासन केंद्र सरकार के हाथ में था। फिर 1 अप्रैल 1990 को इसकी जिम्मेदारी मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग को सौंप दी गई। स्थापना के साल से लेकर 2014 तक देशभर से चुने गए परीक्षार्थी ट्रेनिंग के लिए यहां आते रहे।

2014 के बाद खड़ा हुआ अस्तित्व का संकट

साल 2014 के बाद से एक भी नई बैच ट्रेनिंग के लिए बालाघाट के इस रेंजर्स कॉलेज नहीं पहुंची। इतने लंबे समय तक कोई गतिविधि न होने से इस ऐतिहासिक धरोहर के वजूद पर ही सवाल खड़े होने लगे। धीरे-धीरे यह कयास तेज होते गए कि कॉलेज को बालाघाट से हटाकर जबलपुर शिफ्ट कर दिया जाएगा। इन अटकलों ने स्थानीय लोगों के बीच बेचैनी बढ़ा दी थी, क्योंकि यह कॉलेज सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि बालाघाट की सौ साल पुरानी पहचान का हिस्सा है।

अब थम गई शिफ्टिंग की अटकलें, सीसीएफ ने की पुष्टि

अब इन तमाम कयासों पर विराम लग गया है। बालाघाट वन सर्किल के मुख्य संरक्षक गौरव चौधरी ने पुष्टि की है कि रेंजर्स कॉलेज बालाघाट से कहीं और शिफ्ट नहीं होगा और यह यहीं बना रहेगा। इसी बीच सांसद भारती पारधी ने दावा किया कि जुलाई में ही यहां नई बैच शुरू हो जाएगी, हालांकि उनका यह दावा जल्दबाजी में दिया गया बयान निकला।

रेंजर्स कॉलेज की वापसी पर छिड़ी क्रेडिट की सियासत

रेंजर्स कॉलेज के बालाघाट में बने रहने की खबर के बीच स्थानीय राजनीति में इसका श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। करीब दो साल पहले जब कॉलेज के विस्थापन की खबरें मीडिया में आई थीं, तब कई संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी। उस समय सांसद भारती पारधी की चुप्पी और निष्क्रियता पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद उन्होंने भोपाल और दिल्ली के संबंधित विभागों से इस मसले पर लगातार पत्राचार किया। अब जब कॉलेज में नई बैच शुरू करने की कवायद आगे बढ़ी है, तो उन्होंने भी इसका श्रेय लेने में देर नहीं की। वहीं कांग्रेस नेता अनूप सिंह बैंस का कहना है कि विस्थापन की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने खुद केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की थी, और उन्हीं की मुलाकात के बाद यह भरोसा मिला था कि रेंजर्स कॉलेज बालाघाट में ही बना रहेगा। इस तरह अब बालाघाट में कॉलेज को बचाने का श्रेय लेने को लेकर सियासी खींचतान चल रही है।

तो आखिर कब आएगी नई बैच, समझें पूरा गणित

मुख्य संरक्षक गौरव चौधरी ने बताया कि नई बैच शुरू करने की तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। हालांकि इसके लिए डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेस्ट यानी वन विभाग से औपचारिक अनुमति लेनी जरूरी है। इसके लिए भारत सरकार के माध्यम से संबंधित विभाग को पत्र लिखा जाएगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि यहां बैच साल में सिर्फ दो बार ही अलॉट होती है, एक बैच अप्रैल में और दूसरी बैच दिसंबर में आती है। इसका मतलब यह है कि रेंजर्स कॉलेज में ट्रेनिंग के लिए बैच जरूर आएगी, लेकिन यह जुलाई में नहीं आ पाएगी, जैसा कि दावा किया जा रहा था। असल गतिविधि अब अप्रैल या दिसंबर के अलॉटमेंट चक्र के हिसाब से ही शुरू होगी।

सवाल-जवाब

रेंजर्स कॉलेज कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित है।
रेंजर्स कॉलेज की स्थापना कब हुई थी?
इसकी स्थापना साल 1907 में ब्रिटिश सरकार ने की थी।
क्या रेंजर्स कॉलेज को जबलपुर शिफ्ट किया जाएगा?
नहीं, बालाघाट वन सर्किल के मुख्य संरक्षक गौरव चौधरी ने पुष्टि की है कि कॉलेज बालाघाट में ही बना रहेगा।
यहां आखिरी बार ट्रेनिंग बैच कब आई थी?
साल 2014 के बाद से कोई नई बैच ट्रेनिंग के लिए नहीं आई।
नई बैच कब आएगी?
बैच साल में दो बार अलॉट होती है, एक अप्रैल में और दूसरी दिसंबर में, इसलिए नई बैच जुलाई में नहीं आएगी।
कॉलेज का नाम वन रेंजर्स कॉलेज कब पड़ा?
भारत सरकार ने नवंबर 1979 में इसका नाम वन रेंजर्स कॉलेज रखा था।
कॉलेज का प्रशासन मध्य प्रदेश सरकार को कब सौंपा गया?
1 अप्रैल 1990 को इसका प्रबंधन मध्य प्रदेश शासन के वन विभाग को सौंपा गया।
कॉलेज को लेकर सियासी विवाद क्यों हो रहा है?
सांसद भारती पारधी और कांग्रेस नेता अनूप सिंह बैंस दोनों ही कॉलेज को बालाघाट में बनाए रखने का श्रेय लेने का दावा कर रहे हैं।

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